अंतर्राष्ट्रीय

MigrantWorkers – खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच प्रवासी मजदूरों की बढ़ी चिंता

MigrantWorkers – अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब सीधे खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों प्रवासी मजदूरों पर दिखने लगा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि रोजमर्रा की जिंदगी और रोज़गार के बीच संतुलन बनाए रखना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। मिसाइल हमलों और लगातार बजते सायरनों के बीच काम करने वाले ये लोग खुद को बेहद असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। जो लोग इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं, वही आज सबसे ज्यादा जोखिम में हैं और उनके पास विकल्प भी सीमित हैं।

रोज़मर्रा की जिंदगी में घुला डर

कतर में घरेलू कामगार के रूप में काम कर रहीं 49 वर्षीय नोर्मा टैक्टाकॉन की स्थिति इस संकट की गंभीरता को समझने के लिए काफी है। उनका परिवार फिलीपींस में रहता है और पूरी तरह उनकी कमाई पर निर्भर है। मौजूदा हालात ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अब अपने देश लौट जाना बेहतर होगा। वे अपने पति के साथ मिलकर छोटा कारोबार शुरू करने पर विचार कर रही हैं, लेकिन आर्थिक अस्थिरता के कारण यह फैसला आसान नहीं है।

हमलों में बढ़ती हताहतों की संख्या

हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संघर्ष के बीच कई प्रवासी मजदूरों की जान जा चुकी है। तेल अवीव में एक मिसाइल हमले के दौरान फिलीपींस की एक केयरगिवर घायल हो गईं, जब वह अपने मरीज को बचाने की कोशिश कर रही थीं। इसी तरह नेपाल के एक सुरक्षा गार्ड और दुबई में काम कर रहे एक बांग्लादेशी मजदूर की भी अलग-अलग घटनाओं में मौत हो गई। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह संघर्ष केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर भी गहरा असर डाल रहा है।

सीमित संसाधनों में फंसे मजदूर

खाड़ी देशों में काम करने वाले अधिकतर प्रवासी मजदूर कम आय और सीमित सुविधाओं के बीच जीवन बिताते हैं। घरेलू कामगार, निर्माण श्रमिक और सुरक्षा गार्ड जैसे काम करने वाले ये लोग अक्सर आपात स्थिति में सुरक्षित विकल्प नहीं तलाश पाते। कई मामलों में उनके पास न तो पर्याप्त बचत होती है और न ही तत्काल अपने देश लौटने के साधन। यही कारण है कि खतरे के बावजूद वे वहीं काम करने को मजबूर हैं।

खाड़ी अर्थव्यवस्था में अहम योगदान

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में करीब 2.4 करोड़ प्रवासी मजदूर काम कर रहे हैं। यह क्षेत्र वैश्विक स्तर पर श्रम प्रवासन का एक बड़ा केंद्र माना जाता है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देशों से आए ये लोग खाड़ी की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके बिना कई क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित हो सकता है।

आर्थिक मजबूरी बन रही बड़ी वजह

हालांकि जोखिम के बावजूद इन मजदूरों का यहां बने रहना एक बड़ी सच्चाई को दर्शाता है। कई प्रवासी कामगारों को अपने देश की तुलना में यहां बेहतर आय मिलती है। उदाहरण के तौर पर, फिलीपींस के घरेलू कामगारों को खाड़ी देशों में औसतन 500 डॉलर तक मासिक वेतन मिल जाता है, जो उनके देश में मिलने वाली आय से कई गुना ज्यादा है। यही कारण है कि वे खतरों के बावजूद काम छोड़ने का फैसला नहीं कर पाते।

अनिश्चित भविष्य और बढ़ती चिंता

वर्तमान हालात ने इन प्रवासी मजदूरों के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो इनके सामने सुरक्षा और रोजगार दोनों को लेकर संकट गहरा सकता है। फिलहाल, ये मजदूर हर दिन नए जोखिमों के साथ काम कर रहे हैं, इस उम्मीद में कि हालात जल्द सामान्य होंगे।

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