MiddleEastCrisis – दुबई एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता
MiddleEastCrisis – मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव के बीच ईरान से जुड़े हमलों ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। बुधवार को दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास ड्रोन हमलों की खबर सामने आई, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात पर असर की आशंका बढ़ गई। इसी घटनाक्रम के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पारित कर ईरान से अपने पड़ोसी देशों पर हमले तुरंत रोकने की अपील की है।

इन घटनाओं का असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार मार्गों को भी प्रभावित कर सकता है।
दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमले की घटना
रिपोर्टों के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात में दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास दो ड्रोन हमले हुए, जिनमें चार लोग घायल हो गए। हालांकि अधिकारियों के अनुसार एयरपोर्ट का संचालन सामान्य रूप से जारी रहा और उड़ानों पर बड़ा असर नहीं पड़ा।
दुबई मीडिया कार्यालय ने बताया कि घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। इसके अलावा गुरुवार सुबह दुबई क्रीक हार्बर स्थित एक ऊंची आवासीय इमारत में आग लगने की घटना भी सामने आई, जिसकी जांच की जा रही है।
खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों को निशाना
खाड़ी क्षेत्र के अन्य हिस्सों से भी हमलों की खबरें सामने आई हैं। बहरीन के गृह मंत्रालय के अनुसार मुहर्रक प्रांत में ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। इसी तरह ओमान के सलालाह बंदरगाह पर स्थित ईंधन भंडारण सुविधाओं में आग लगने की सूचना मिली।
इन घटनाओं ने क्षेत्र की ऊर्जा संरचना और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है और यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बुधवार को पारित प्रस्ताव में ईरान से अपने पड़ोसी देशों के खिलाफ हमलों को रोकने की मांग की। परिषद के कई सदस्य देशों ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में हो रही सैन्य गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय स्थिरता और व्यापार के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं।
इस प्रस्ताव पर मतदान के दौरान अधिकांश देशों ने समर्थन किया। हालांकि चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया और प्रस्ताव को असंतुलित बताते हुए उससे दूरी बनाई।
क्षेत्रीय हमलों की बढ़ती घटनाएं
इसी बीच इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में भी ड्रोन गतिविधियों की जानकारी मिली है। रिपोर्टों के अनुसार इरबिल और सुलेमानिया शहरों की दिशा में ड्रोन लॉन्च किए गए। दक्षिणी इराक के समुद्री क्षेत्र में एक तेल टैंकर पर हमले की घटना भी सामने आई।
बताया गया कि ऑस्ट्रेलियाई झंडे वाले इस जहाज के 25 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया। हालांकि इस घटना ने समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। तेल आपूर्ति के प्रमुख मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ने से ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है।
कई विश्लेषकों का कहना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक तनावपूर्ण बनी रहती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने बाजार में अतिरिक्त तेल उपलब्ध कराने की योजना पर विचार किया है।
इस्रायल और लेबनान में भी बढ़ा सैन्य तनाव
क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के बीच इस्रायल और लेबनान सीमा पर भी सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। गुरुवार को यरूशलम और इस्रायल के अन्य हिस्सों में सायरन बजने और विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं।
इस्रायली सेना ने कहा कि उसने तेहरान से जुड़े लक्ष्यों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की है। वहीं लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े ठिकानों पर भी हमले किए गए।
रिपोर्टों के अनुसार बेरुत के रामलेट अल-बायदा इलाके में हुए हमले में कई लोग हताहत हुए और कई अन्य घायल हुए। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के अनुसार हालिया संघर्ष के कारण लेबनान में बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं।
क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता
मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि मौजूदा तनाव कम नहीं हुआ तो इसका असर न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।



