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Israel Recognition of Somaliland Sovereignty: नेतन्याहू का वो मास्टरस्ट्रोक जिसने मुस्लिम जगत में मचाया हड़कंप, सोमालीलैंड को बनाया अपना दोस्त…

Israel Recognition of Somaliland Sovereignty: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के एक हालिया और चौंकाने वाले फैसले ने पूरी दुनिया के भू-राजनीतिक समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। इजरायल ने अफ्रीकी महाद्वीप के मुस्लिम बहुल क्षेत्र सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र और संप्रभु राज्य के रूप में औपचारिक मान्यता प्रदान कर दी है। इस घोषणा के बाद से ही सोमालीलैंड की राजधानी हरगेइसा जश्न के सैलाब में डूबी हुई है। रविवार की रात पूरा शहर (National Sovereignty Celebration) की खुशी में दूधिया रोशनी से नहा उठा। यह पहला मौका है जब संयुक्त राष्ट्र के किसी सदस्य देश ने सोमालीलैंड के अस्तित्व को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है।

Israel Recognition of Somaliland Sovereignty
Israel Recognition of Somaliland Sovereignty

26 दिसंबर का वो दिन जब रचा गया इतिहास

बीते 26 दिसंबर को इजरायल ने वह साहसिक कदम उठाया जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमालीलैंड के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही के साथ एक विशेष वीडियो कॉल के माध्यम से इस ऐतिहासिक (Diplomatic Recognition Process) को अंतिम रूप दिया। दोनों नेताओं ने एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए, जो इस नए रिश्ते की नींव बना। यह फैसला साल 2020 के बहुचर्चित ‘अब्राहम समझौते’ की ही एक अगली कड़ी माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य इजरायल और मुस्लिम देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाना है।

99 फीसदी मुस्लिम आबादी वाला अनोखा राष्ट्र

सोमालीलैंड अफ्रीका के ‘हॉर्न’ क्षेत्र में स्थित एक ऐसा देश है, जहां की 99 प्रतिशत आबादी सुन्नी मुस्लिम है। साल 1991 में सोमालिया से अलग होने की घोषणा करने के बाद से ही यह क्षेत्र (De Facto Independence) के साथ अपनी मुद्रा, पासपोर्ट और लोकतांत्रिक व्यवस्था संचालित कर रहा था। बावजूद इसके, पिछले 34 वर्षों से किसी भी देश ने इसे मान्यता नहीं दी थी। इजरायल की इस घोषणा के बाद हरगेइसा की इमारतों पर इजरायली झंडे लहराते देखे गए और लोगों ने इसे अपने लंबे संघर्ष की सबसे बड़ी जीत करार दिया।

लाल सागर और हूती विद्रोहियों पर नजर

आखिर इजरायल को इस छोटे से मुस्लिम राष्ट्र से इतना लगाव क्यों हुआ? इसका जवाब रणनीतिक भूगोल में छिपा है। सोमालीलैंड अदन की खाड़ी पर स्थित है, जो लाल सागर का प्रवेश द्वार माना जाता है। इस स्थान से इजरायल के लिए (Strategic Maritime Monitoring) करना बेहद आसान हो जाएगा, खासकर यमन के हूती विद्रोहियों की गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए यह क्षेत्र एक महत्वपूर्ण निगरानी केंद्र बन सकता है। नेतन्याहू इस देश को मुस्लिम जगत में एक उदारवादी और स्थिर सहयोगी के रूप में देख रहे हैं, जो भविष्य में उनके लिए रणनीतिक ढाल बन सकता है।

मोसाद की गुप्त भूमिका और बढ़ती नजदीकी

इजरायल द्वारा सोमालीलैंड को मान्यता देने के पीछे कोई रातों-रात हुआ फैसला नहीं है, बल्कि इसके पीछे इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद की वर्षों की मेहनत छिपी है। सोमालीलैंड में अल-शबाब जैसे (Counter Terrorism Cooperation) चरमपंथी संगठनों का प्रभाव बेहद कम है, जो इसे इजरायल के लिए एक सुरक्षित और आकर्षक ठिकाना बनाता है। नेतन्याहू ने कृषि, स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में तत्काल सहयोग बढ़ाने की बात कही है। सोमालीलैंड के राष्ट्रपति ने भी इसे एक “ऐतिहासिक क्षण” बताते हुए क्षेत्रीय शांति के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

अरब लीग और इस्लामिक संघ में जबरदस्त रोष

इजरायल के इस कदम ने मुस्लिम राष्ट्रों के संगठन और अरब लीग में खलबली मचा दी है। सोमालिया ने इस फैसले को अपनी संप्रभुता पर “खुला हमला” करार दिया है और इजरायल को अपना खुला दुश्मन घोषित कर दिया है। सोमालिया के राष्ट्रपति हसन शेख मोहम्मद ने संसद के (Regional Political Tension) आपातकालीन सत्र में इस कदम की कड़ी निंदा की। मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब जैसे देशों ने भी सोमालिया की अखंडता का समर्थन किया है और इजरायल के इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।

34 साल का इंतजार और निवेश के खुलते द्वार

सोमालीलैंड के लिए यह केवल राजनीतिक मान्यता नहीं है, बल्कि आर्थिक प्रगति का एक सुनहरा अवसर भी है। तीन दशकों से अधिक समय बाद मिली इस (International Investment Opportunities) मान्यता से अब देश के लिए वैश्विक ऋण, विदेशी निवेश और व्यापार के दरवाजे खुल सकते हैं। अफ्रीकी संघ (AU) ने हालांकि चेतावनी दी है कि इससे महाद्वीप में अलगाववाद को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन सोमालीलैंड के नागरिक इसे अपनी नई सुबह मान रहे हैं। नेतन्याहू ने राष्ट्रपति अब्दुल्लाही को इजरायल आने का आधिकारिक निमंत्रण भी भेज दिया है।

भू-राजनीति की बदलती दिशा और भविष्य की चुनौतियां

इजरायल का यह फैसला हॉर्न ऑफ अफ्रीका और मध्य पूर्व की राजनीति को एक नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। जहां एक ओर इजरायल अपनी (Muslim World Outreach) नीति के तहत नए दोस्त बना रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय विवाद गहराने की भी आशंका है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य पश्चिमी देश भी इजरायल के पदचिन्हों पर चलते हुए सोमालीलैंड को मान्यता देंगे। फिलहाल, सोमालीलैंड की रोशनी और इजरायल की रणनीति ने दुनिया को एक बड़े बदलाव का संकेत दे दिया है।

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