अंतर्राष्ट्रीय

IranWarship – कोच्चि में खड़े ईरानी युद्धपोत के चालक दल की स्वदेश वापसी

IranWarship – ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत के कोच्चि बंदरगाह पर खड़े एक ईरानी युद्धपोत से जुड़े घटनाक्रम ने ध्यान खींचा है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जहाज पर मौजूद गैर-जरूरी चालक दल के अधिकांश सदस्यों को स्वदेश भेजने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि इन नौसैनिकों को तुर्की की एक एयरलाइन के विमान के जरिए जल्द ही कोच्चि से रवाना किया जा सकता है, बशर्ते विमान निर्धारित समय पर हवाई अड्डे पर पहुंच जाए।

लगभग 180 नौसैनिकों को वापस भेजने की तैयारी

मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ईरान ने अपने करीब 180 नौसैनिकों को वापस ले जाने के लिए विशेष परिवहन व्यवस्था की है। जानकारी के अनुसार, इनमें से अधिकांश नौसैनिक दक्षिण भारत के कोच्चि शहर से ही उड़ान भरेंगे।

बताया गया है कि उन्हें पहले विमान से आर्मेनिया ले जाया जाएगा और वहां से सड़क मार्ग के जरिए ईरान पहुंचाया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया को सुरक्षा और लॉजिस्टिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जा रहा है।

मृत नौसैनिकों के शव भी ले जाए जाएंगे

सूत्रों के अनुसार ईरान उन नौसैनिकों के शव भी अपने साथ ले जाने की तैयारी कर रहा है, जिनकी हाल ही में श्रीलंका के तट के पास हुई एक घटना में मौत हो गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक उस दौरान एक अमेरिकी हमले में ईरानी जहाज के डूबने से यह हादसा हुआ था।

हालांकि इस पूरे मामले पर भारत के विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और भारतीय नौसेना की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। संबंधित विभागों से इस विषय पर जानकारी मांगी गई थी, लेकिन फिलहाल कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

तकनीकी समस्या के कारण भारत में रुका जहाज

सूत्रों के अनुसार यह ईरानी युद्धपोत तकनीकी खराबी के कारण भारत के बंदरगाह पर रुका था। ईरान की ओर से अनुरोध किए जाने के बाद भारत ने मानवीय और तकनीकी आधार पर जहाज को आपातकालीन डॉकिंग की अनुमति दी थी।

बताया जाता है कि इस जहाज को 1 मार्च को आपातकालीन रूप से बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति दी गई थी और 4 मार्च से यह कोच्चि में खड़ा है। भारतीय नौसेना की देखरेख में जहाज से जुड़े जरूरी इंतजाम किए गए थे।

जहाज पर मौजूद थे 183 चालक दल के सदस्य

जानकारी के अनुसार जहाज पर कुल 183 चालक दल के सदस्य मौजूद थे। इनमें से अधिकतर नाविकों को फिलहाल कोच्चि में भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया था।

अब योजना के तहत जहाज के गैर-जरूरी कर्मियों को वापस भेजा जा रहा है, जबकि कुछ तकनीकी और आवश्यक कर्मचारी जहाज के साथ ही भारत में रहेंगे ताकि मरम्मत और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जा सकें।

श्रीलंका के पास हुई घटना से बढ़ा तनाव

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत के डूबने की खबर आई थी। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा किए गए हमले के बाद वह जहाज डूब गया था, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।

श्रीलंका के अधिकारियों के अनुसार उस जहाज पर करीब 130 लोग सवार थे। इनमें से लगभग 32 लोगों को बचा लिया गया था और उन्हें अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। हालांकि कई नौसैनिक अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

ऊर्जा संकट और कूटनीतिक बातचीत

इस बीच भारत ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का भी सामना कर रहा है। देश के कई हिस्सों में रसोई गैस की कमी की खबरें सामने आई हैं, जिससे आम लोगों के दैनिक जीवन पर असर पड़ा है।

इन परिस्थितियों में भारत क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर ईरान के साथ लगातार संपर्क में बना हुआ है। हाल ही में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची से कई बार फोन पर बातचीत की है। इन वार्ताओं में समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय हालात जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।

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