Iran – पश्चिम एशिया संघर्ष पर ईरान के प्रतिनिधि का बयान, युद्ध नहीं चाहता था देश…
Iran – पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष के बीच भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि ईरान की ओर से युद्ध की कोई इच्छा नहीं थी और उनका देश संवाद के माध्यम से समाधान चाहता था। उनके अनुसार, जब बातचीत चल रही थी उसी दौरान हमला हुआ, जिसके बाद हालात तेजी से बिगड़ते गए और संघर्ष की स्थिति बन गई।

बातचीत के दौरान हमले का आरोप
समाचार एजेंसी एएनआई को दिए गए साक्षात्कार में डॉ. इलाही ने कहा कि मौजूदा क्षेत्रीय संकट के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। उनका कहना था कि ईरान लगातार बातचीत और कूटनीतिक रास्ते के जरिए समाधान की कोशिश कर रहा था।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब वार्ता की प्रक्रिया जारी थी, तभी उनके पक्ष पर हमला किया गया। उनके अनुसार इसी घटना ने संघर्ष को जन्म दिया और हालात धीरे-धीरे युद्ध जैसे माहौल में बदल गए। उन्होंने कहा कि इस टकराव के कारण बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी है।
ईरान ने युद्ध की इच्छा से किया इनकार
डॉ. इलाही ने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी तरह की लड़ाई या युद्ध से लाभ नहीं देखता। उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी ऐसी स्थिति से खुश नहीं हो सकता जिसमें आम लोगों को तकलीफ हो या संसाधनों की कमी पैदा हो।
उन्होंने यह भी कहा कि तेल, गैस और पेट्रोल जैसी ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी परेशानियां आम जनता को प्रभावित करती हैं और ईरान ऐसे हालात का समर्थन नहीं करता। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी देश की तरह ईरान को अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करने का अधिकार है।
वैश्विक नेताओं से हस्तक्षेप की अपील
ईरानी प्रतिनिधि ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे क्षेत्र में शांति बहाल करने के प्रयास करें।
डॉ. इलाही ने विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक नेताओं को उस पर दबाव बनाना चाहिए ताकि संघर्ष को रोका जा सके। उनके अनुसार अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस पहल होती है तो तनाव कम करने और लोगों को राहत देने में मदद मिल सकती है।
मानवीय प्रभावों को लेकर चिंता
उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। युद्ध या तनाव की स्थिति में सबसे अधिक परेशानी आम लोगों को उठानी पड़ती है, चाहे वह आर्थिक दबाव हो, संसाधनों की कमी हो या सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं।
डॉ. इलाही का कहना था कि दुनिया को इस स्थिति को केवल राजनीतिक या सामरिक नजरिए से नहीं देखना चाहिए, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी विचार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शांति और स्थिरता कायम करने के लिए सभी देशों को मिलकर प्रयास करने होंगे।
कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर
उन्होंने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया कि संवाद और कूटनीति ही किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद का स्थायी समाधान हो सकते हैं। उनके अनुसार, बातचीत की प्रक्रिया को मजबूत करना और तनाव कम करने के उपाय तलाशना ही सबसे बेहतर रास्ता है।
डॉ. इलाही ने कहा कि अगर वैश्विक समुदाय सक्रिय भूमिका निभाए तो संघर्ष को सीमित किया जा सकता है और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।



