अंतर्राष्ट्रीय

Iran Protests Crisis: ईरान में लोकतंत्र की आखिरी चीख को कर दिया गया है खामोश, क्या यह है तूफ़ान से पहले की शांति…

Iran Protests Crisis: ईरान की राजधानी तेहरान समेत देश के सभी 31 प्रांतों में पिछले 15 दिनों से जारी आक्रोश ने खामेनई सत्ता की नींव हिला कर रख दी है। सड़कों पर उतरते (Civil Unrest) लाखों लोगों के गुस्से के बीच अब ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का एक बड़ा बयान सामने आया है। अराघची ने दावा किया है कि देश के भीतर स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सरकार भले ही शांति का दावा कर रही हो, मगर लोगों के दिलों में धधक रही विद्रोह की आग बुझती नजर नहीं आ रही।

Iran Protests Crisis
Iran Protests Crisis

हिंसा के पीछे विदेशी साजिश या जनता का असली आक्रोश

ईरानी प्रशासन ने अपने ऊपर लग रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों को मोड़ने के लिए अब बाहरी ताकतों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। विदेश मंत्री ने बिना किसी ठोस सबूत के इस पूरी (International Geopolitics) हिंसा का दोष इजरायल और अमेरिका के सिर मढ़ दिया है। अराघची का आरोप है कि प्रदर्शनों को जानबूझकर हिंसक मोड़ दिया गया ताकि बाहरी ताकतों को ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का मौका मिल सके। यह बयान उस समय आया है जब दुनिया ईरान की सड़कों पर बह रहे खून का हिसाब मांग रही है।

डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और ईरान का पलटवार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान सरकार को प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग न करने की चेतावनी दे रहे हैं, जिसे तेहरान ने एक बड़ी साजिश करार दिया है। अराघची ने सीधे तौर पर (Diplomatic Relations) ट्रंप को घेरते हुए कहा कि अमेरिका ने इन प्रदर्शनों को खूनी बनाने की कोशिश की ताकि उसे सैन्य कार्रवाई या हस्तक्षेप का बहाना मिल सके। ईरान का मानना है कि ट्रंप का रुख न केवल उकसाने वाला है बल्कि यह ईरान की संप्रभुता पर सीधा हमला है, जबकि ट्रंप का कहना है कि वे केवल मानवीय अधिकारों की रक्षा की बात कर रहे हैं।

पांच सौ से ज्यादा मौतें और प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी

ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति अब भयावह मोड़ ले चुकी है, जहाँ मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 500 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से अधिकतर निहत्थे प्रदर्शनकारी थे, लेकिन (Human Rights Violation) सरकार इन आंकड़ों पर कुछ भी बोलने से बच रही है। तेहरान में विदेशी राजनयिकों के सामने भले ही स्थिति नियंत्रण में होने की बात कही गई हो, लेकिन मृतकों के परिवारों का विलाप सरकार के दावों की पोल खोल रहा है।

अल जजीरा की लाइव रिपोर्टिंग और इंटरनेट पर सख्त पाबंदी

ईरान ने जहां एक तरफ पूरे देश में इंटरनेट और संचार के साधनों पर ताला जड़ दिया है, वहीं कतर समर्थित अल जजीरा को रिपोर्टिंग की विशेष छूट दी गई है। अराघची के बयानों को (Media Censorship) इसी नेटवर्क के जरिए प्रसारित किया जा रहा है ताकि वैश्विक स्तर पर सरकार के नैरेटिव को सेट किया जा सके। सरकार का तर्क है कि प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए थे, इसलिए उनके पास बल प्रयोग के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था, लेकिन दुनिया इस ‘नियंत्रित सूचना’ के पीछे छिपे सच को भांप रही है।

जेलों में ठूसे गए हजारों लोग और बदहाल होती अर्थव्यवस्था

विरोध की यह लहर सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह ईरान की न्याय व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन गई है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 10,681 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर जेलों में डाल दिया गया है, जो (Political Stability) ईरान के भविष्य पर सवालिया निशान लगाता है। यह आंदोलन जो 28 दिसंबर को बढ़ती महंगाई और चरमराती अर्थव्यवस्था के खिलाफ शुरू हुआ था, वह अब सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनई के पूरे नेतृत्व को उखाड़ फेंकने की जिद बन चुका है।

186 शहरों में विद्रोह की गूंज और खामेनई का भविष्य

ईरान के 186 शहरों में फैले इस आंदोलन ने यह साबित कर दिया है कि जनता अब और अधिक सहने के मूड में नहीं है। देश के 585 स्थानों पर विरोध प्रदर्शन (Global Security) की स्थिति बनी हुई है, जो शासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है। लोग न केवल आर्थिक सुधारों की मांग कर रहे हैं, बल्कि अब निर्वासित युवा नेता रेजा पहलवी के समर्थन में भी नारे बुलंद होने लगे हैं, जिससे खामेनई प्रशासन की बेचैनी बढ़ना लाजमी है।

क्या बातचीत से थमेगा ईरान का यह खूनी संघर्ष

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि उनकी कड़ी धमकियों के बाद अब ईरान वाशिंगटन के साथ मेज पर बैठने को तैयार दिख रहा है। हालांकि, ईरान के भीतर (Economic Crisis) अभी भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं क्योंकि 7 जनवरी के बाद से आंदोलन ने एक नया और उग्र मोड़ ले लिया है। अब देखना यह होगा कि क्या तेहरान अपनी जनता की आवाज को बंदूक की नोंक पर दबा पाएगा, या फिर यह विरोध प्रदर्शन ईरान के इतिहास में एक बड़े बदलाव की पटकथा लिखेगा।

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