Iran Protests and Khamenei Speech 2026: खामेनेई ने ट्रंप को दी पतन की चेतावनी, क्या फिर से दहक उठा है फारस का साम्राज्य…
Iran Protests and Khamenei Speech 2026: ईरान इस समय अपने आधुनिक इतिहास के सबसे गंभीर आंतरिक संकट से गुजर रहा है। पिछले कई दिनों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने अब एक जन-आंदोलन का रूप ले लिया है, जिससे इस्लामी गणराज्य की नींव हिलती नजर आ रही है। शुक्रवार को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सरकारी टीवी पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए (Anti-government protests intensity) पर पहली बार खुलकर बात की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को ‘विदेशी एजेंट’ करार देते हुए साफ कर दिया कि सरकार किसी भी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं है। तेहरान समेत 111 से अधिक शहरों में फैल चुकी यह आग अब शासन के लिए अस्तित्व का सवाल बन गई है।

ट्रंप पर तीखा हमला: ‘अहंकारी’ का होगा पतन
अपने भाषण के दौरान खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे तौर पर निशाने पर लिया। उन्होंने ट्रंप को ‘घमंडी’ और ‘अहंकारी’ बताते हुए भविष्यवाणी की कि जिस तरह इतिहास के बड़े-बड़े तानाशाहों का पतन हुआ, वैसे ही ट्रंप का भी अंत होगा। सर्वोच्च नेता ने आरोप लगाया कि (US President Donald Trump’s involvement) ईरान को अस्थिर करने की साजिशों के पीछे है। उन्होंने कहा कि ट्रंप के हाथ ‘हजारों ईरानियों के खून से रंगे’ हैं। खामेनेई ने तंज कसते हुए कहा कि अगर ट्रंप को देश चलाना आता होता, तो पहले वे अमेरिका की अपनी समस्याओं को सुलझाते।
शहीदों के बलिदान और साजिश का नैरेटिव
ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व ने इन प्रदर्शनों को वैश्विक शक्तियों की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। खामेनेई ने भावुक अपील करते हुए कहा कि (Islamic Republic ideological stance) हजारों शहीदों के खून से सींचा गया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर आरोप लगाया कि वे अमेरिका और इस्राइल को खुश करने के लिए अपनी ही सड़कों पर आगजनी कर रहे हैं। सरकारी मीडिया के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि देश के युवा बहकावे में आकर अपनी ही संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जो सीधे तौर पर ‘दुश्मनों’ के हितों को साध रहा है।
इंटरनेट ब्लैकआउट: बाहरी दुनिया से कटा ईरान
हालात पर काबू पाने के लिए ईरानी प्रशासन ने बेहद सख्त कदम उठाए हैं। गुरुवार रात से ही देशभर में (Nationwide internet blackout) कर दिया गया है। नेटब्लॉक्स और क्लाउडफ्लेयर जैसी संस्थाओं ने पुष्टि की है कि ईरान में इंटरनेट के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल्स और टेलीफोन लाइनें भी ठप कर दी गई हैं। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि प्रदर्शनकारी एक-दूसरे से संपर्क न कर सकें और ईरान की सड़कों पर हो रही हिंसा के वीडियो अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक न पहुंच पाएं। यह पूर्ण डिजिटल सेंसरशिप इस बात का प्रमाण है कि सरकार इन प्रदर्शनों से कितनी डरी हुई है।
निर्वासित शहजादे की पुकार और सड़कों पर सैलाब
इन प्रदर्शनों को तब और गति मिली जब निर्वासन में रह रहे ईरान के पूर्व क्राउन प्रिंस (exiled Crown Prince Reza Pahlavi) ने देश की जनता से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया। दशकों बाद यह पहली बार देखा गया है कि उनके एक बुलावे पर तेहरान से लेकर छोटे शहरों तक में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग राजशाही के समर्थन में और वर्तमान धार्मिक शासन के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे आर्थिक बदहाली, बेरोजगारी और राजनीतिक दमन से तंग आ चुके हैं और अब उन्हें बदलाव चाहिए।
हवाई सेवाओं पर असर: दुबई से उड़ानें रद्द
ईरान में गहराते तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय परिवहन पर भी दिखने लगा है। शुक्रवार को दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से (Flight cancellations to Iran) की खबरों ने यात्रियों में हड़कंप मचा दिया। तेहरान, शिराज और मशहद जैसे प्रमुख शहरों के लिए कम से कम 20 उड़ानें रद्द कर दी गईं। फ्लाई दुबई और अन्य एयरलाइंस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए परिचालन रोक दिया है। यह न केवल यात्रियों के लिए परेशानी का सबब है, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा झटका है जो पहले से ही प्रतिबंधों की मार झेल रही है।
सरकारी टीवी के आरोप और बढ़ता डेथ टोल
ईरानी सरकारी टीवी ने इन प्रदर्शनों को पूरी तरह से ‘आतंकी एजेंटों’ की करतूत बताया है। मीडिया का दावा है कि अमेरिका और इस्राइल से जुड़े गुर्गों ने सड़कों पर हिंसा भड़काई है। हालांकि मानवाधिकार संगठनों (Human Rights organizations reports) के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक कम से कम 45 लोगों की मौत हो चुकी है और 2200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सड़कों पर जलती हुई बसें और सुरक्षा बलों के साथ झड़पें बयां कर रही हैं कि ईरान इस समय एक ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ा है।
क्या ईरान में होने वाला है बड़ा तख्तापलट?
मौजूदा स्थिति को देखकर विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह 2022 के ‘महिला, जीवन, स्वतंत्रता’ आंदोलन से भी बड़ा संकट हो सकता है। (Political instability in Iran) के इस दौर में अब भविष्य की तस्वीर धुंधली है। एक तरफ सरकार अपनी पूरी ताकत से प्रदर्शनों को कुचलने पर आमादा है, तो दूसरी तरफ आम जनता और युवाओं ने आर-पार की जंग छेड़ दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब व्हाइट हाउस और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या खामेनेई की चेतावनी ट्रंप को रोकेगी या यह ईरान में एक नए युग की शुरुआत होगी



