Iran economic crisis and protests: ईरान की सड़कों पर फिर भड़का आक्रोश, क्या ढह जाएगी सत्ता की दीवार…
Iran economic crisis and protests: ईरान की राजधानी तेहरान एक बार फिर अशांत है और इस बार गुस्से की आग पहले से कहीं अधिक तेज नजर आ रही है। रविवार से शुरू हुए इन प्रदर्शनों ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया है, जिसमें सुरक्षा बलों और आम नागरिकों के बीच हुई हिंसक झड़पों में कई लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि यह विरोध शुरू में (Public unrest) के रूप में छोटे स्तर पर था, लेकिन मंगलवार को जब दस बड़े विश्वविद्यालयों के छात्र इसमें शामिल हुए, तो इसने एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप ले लिया।

महंगाई की मार और बेबस आवाम का दर्द
इस जबरदस्त उबाल के पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं, बल्कि भूख और खाली जेबों की कड़वी सच्चाई छिपी है। ईरान में महंगाई की दर दिसंबर के महीने में 42.5 फीसदी के खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है, जिसने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। जब (Economic depression) के कारण रोजमर्रा की चीजें खरीदना असंभव हो गया, तो दुकानदार और व्यापारी सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो गए। रियाल की गिरती कीमत ने रही-सही कसर पूरी कर दी है, जिससे बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
प्रतिबंधों का बोझ और युद्ध की विभीषिका
ईरान की इस दयनीय वित्तीय स्थिति के तार अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और हालिया क्षेत्रीय संघर्षों से जुड़े हुए हैं। परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को (Global sanctions) के बोझ तले दबा दिया है। इसके अतिरिक्त, जून में इजरायल के साथ हुए 12 दिनों के संघर्ष ने देश के खजाने को और भी खाली कर दिया। यही कारण है कि आज ईरानी नागरिक अपनी आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं और सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।
‘तियानमेन’ की याद दिलाता वो वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर इस आंदोलन से जुड़ी एक तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है, जिसे लोग ईरान का ‘तियानमेन’ कह रहे हैं। एक वीडियो में तेहरान की सड़क पर एक निहत्था व्यक्ति पुलिस की मोटरसाइकिलों के सामने शांति से बैठा नजर आता है, जबकि उसके पीछे आंसू गैस का धुआं और चीख-पुकार मची है। यह (Protest symbols) की शक्ति को दर्शाता है, जो साल 1989 के चीन के तियानमेन स्क्वायर आंदोलन की उस ऐतिहासिक तस्वीर की याद दिलाता है जिसमें एक व्यक्ति टैंक के सामने खड़ा हो गया था।
महसा अमीनी के आंदोलन से कितनी अलग है यह लहर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विरोध प्रदर्शन 2022 के महसा अमीनी वाले आंदोलन की तुलना में वैचारिक रूप से थोड़ा भिन्न है। जहां 2022 का विद्रोह (Human rights violation) और सख्त ड्रेस कोड के खिलाफ था, वहीं वर्तमान आंदोलन पूरी तरह से ‘रोटी’ के सवाल पर आधारित है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के नारों में अब भी शासन प्रणाली के खिलाफ तीखापन बना हुआ है। भले ही भीड़ उतनी बड़ी न हो, लेकिन आर्थिक दबाव के कारण इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी देखी जा रही है।
राष्ट्रपति पेजेशकियान की चेतावनी और बेबसी
ईरान की सरकार इस बार प्रदर्शनकारियों को केवल बल प्रयोग से दबाने के बजाय संवाद की बात भी कर रही है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सरकारी टीवी पर एक भावुक बयान देते हुए कहा कि यदि वे जनता की आजीविका के मुद्दों को हल नहीं कर पाए, तो यह शासन के लिए विनाशकारी होगा। लेकिन हकीकत यह है कि (Currency devaluation) के कारण उनके पास विकल्प बहुत सीमित हैं। वर्तमान में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 14 लाख रियाल तक पहुंच जाना इस बात का प्रमाण है कि हालात काबू से बाहर हो चुके हैं।
हिंसा और गिरफ्तारी का दौर जारी
सरकार की बातचीत की इच्छा के बावजूद जमीनी स्तर पर दमन की कार्रवाई रुकी नहीं है। फार्स न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के पथराव और इमारतों को नुकसान पहुंचाने के बाद पुलिस ने बड़े पैमाने पर (Law enforcement) की कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया है। देश के अधिकांश हिस्सों में सर्दियों की छुट्टियों की आड़ में बंदी लागू कर दी गई है ताकि भीड़ को इकट्ठा होने से रोका जा सके। फिलहाल, ईरान एक अनिश्चित भविष्य की ओर बढ़ रहा है जहां भूख और संघर्ष का आमना-सामना जारी है।



