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India Pakistan Conflict News: जब हार के डर से कांपने लगा पाकिस्तान, तब आसिम मुनीर को याद आई आसमानी ताकत…

India Pakistan Conflict News: मई का वह महीना दक्षिण एशिया के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले ने भारत के धैर्य की सीमा तोड़ दी थी। इसके जवाब में भारतीय सेना ने 7 मई को (Cross-Border Counter Terrorism Operations) के तहत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का बिगुल फूंका। इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में फल-फूल रहे आतंकी ढांचों को जड़ से मिटाना था। भारतीय लड़ाकू विमानों और जांबाज सैनिकों ने सर्जिकल स्ट्राइक की तर्ज पर घुसपैठ के अड्डों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया।

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पाकिस्तानी सेना प्रमुख का चौंकाने वाला ‘दैवीय’ दावा

भारत की प्रचंड सैन्य शक्ति के सामने जब पाकिस्तान की रक्षा पंक्तियां ढहने लगीं, तब वहां के शीर्ष नेतृत्व का मानसिक दबाव दुनिया के सामने आ गया। इस्लामाबाद में नेशनल उलेमा कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक ऐसा बयान दिया जिसने (Global Geopolitical Strategy) के जानकारों को हैरान कर दिया। मुनीर ने दावा किया कि भारत के साथ युद्ध जैसी उन भयानक परिस्थितियों में खुदा स्वयं पाकिस्तान की मदद कर रहे थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि जब भारतीय प्रहार से पाकिस्तान का अस्तित्व संकट में था, तब उन्हें किसी ‘दैवीय सहायता’ का अनुभव हुआ।

मजहबी कार्ड के पीछे हार का खौफ

मुनीर के भाषण की क्लिप्स जब सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर प्रसारित हुईं, तो यह साफ हो गया कि वे अपनी सैन्य विफलता को धार्मिक चाशनी में डुबोकर पेश कर रहे हैं। उन्होंने उलेमाओं के सामने भावुक होते हुए कहा कि (India Pakistan Border Escalation) के दौरान जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अपने चरम पर था, तब आसमान से कोई ताकत पाकिस्तान को सहारा दे रही थी। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी देश की सेना पेशेवर मोर्चे पर नाकाम होती है, तो वह जनता की सहानुभूति बटोरने के लिए अक्सर धर्म और चमत्कार का सहारा लेती है।

भारतीय एयरफोर्स का प्रहार और पाकिस्तानी एयरबेस की तबाही

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत का लक्ष्य केवल आतंकी ठिकाने थे, लेकिन अपनी फजीहत से बौखलाई पाकिस्तानी सेना ने भारतीय नागरिक इलाकों पर गोले बरसाने शुरू कर दिए। भारत ने इस उकसावे का जो मुंहतोड़ जवाब दिया, उसने (South Asian Defense Analysis) के समीकरण बदल दिए। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई महत्वपूर्ण एयरबेस को निशाना बनाकर उन्हें भारी क्षति पहुंचाई। मुनीर का ‘दैवीय मदद’ वाला बयान इसी सैन्य तबाही के बीच अपनी फौज का गिरता हुआ मनोबल उठाने की एक हताश कोशिश नजर आता है।

1400 साल पुराने इतिहास से पाकिस्तान की तुलना

फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अपने संबोधन में आधुनिक पाकिस्तान की तुलना 1400 साल पहले पैगंबर मोहम्मद द्वारा स्थापित किए गए रियासत-ए-मदीना से कर दी। उन्होंने (Islamic Ideological Warfare) को हवा देते हुए कुरान की आयतों का बार-बार जिक्र किया। मुनीर ने यह स्थापित करने का प्रयास किया कि दुनिया के 57 मुस्लिम देशों में पाकिस्तान सबसे विशिष्ट है और इसे अल्लाह ने ‘शरीफों के रखवाले’ के रूप में चुना है। यह विमर्श पूरी तरह से पाकिस्तान के कट्टरपंथी वर्ग को खुश करने के लिए तैयार किया गया था।

तालिबान को मुनीर की दो टूक चेतावनी

भारत के साथ तनाव के बीच मुनीर ने अपनी पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा की गंभीर स्थिति को भी स्वीकार किया। उन्होंने अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें (Terrorism in Afghanistan) के मुद्दे पर पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) में से किसी एक को चुनना होगा। मुनीर का आरोप था कि पाकिस्तान के भीतर आतंक फैलाने वाले तत्वों में अफगान नागरिक भी शामिल हैं, जो पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके हैं।

जिहाद के अधिकार पर सेना का नया स्टैंड

अपनी बात को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मुनीर ने जिहाद की परिभाषा पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि केवल ‘इस्लामिक स्टेट’ के पास ही जिहाद की घोषणा करने का कानूनी और मजहबी अधिकार है। (Islamic Militancy Regulations) का हवाला देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अल्लाह के आदेश के बिना कोई भी व्यक्तिगत फतवा जारी नहीं कर सकता। यह बयान संभवतः उन विद्रोही गुटों के लिए था जो पाकिस्तान के भीतर ही सेना के खिलाफ हिंसक गतिविधियों में शामिल हैं।

भारत के सामने पस्त पाकिस्तान की हकीकत

अंततः, मुनीर का यह पूरा भाषण एक ऐसी सेना की कहानी बयां करता है जो रणभूमि में तकनीकी और सामरिक रूप से पिछड़ चुकी है। भारत के (Operation Sindoor Impact) ने पाकिस्तान के रक्षा तंत्र की पोल खोल दी है। अब वहां का सैन्य नेतृत्व तलवार के बजाय तर्कों और चमत्कारों के सहारे अपनी सत्ता बचाने की जद्दोजहद कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के इस रवैये को उसकी बढ़ती कमजोरी और अलगाव के तौर पर देखा जा रहा है।

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