Global Solidarity for Umar Khalid: न्यूयॉर्क के नए मेयर ने उमर खालिद के लिए क्यों खोला अपना दिल…
Global Solidarity for Umar Khalid: न्यूयॉर्क के नवनियुक्त मेयर जोहरान ममदानी ने अपने पद की शपथ लेते ही एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। दिल्ली दंगा मामले में पिछले पांच वर्षों से जेल की सलाखों के पीछे बंद उमर खालिद के लिए ममदानी ने एक भावुक नोट साझा किया है। इस संदेश ने न केवल मानवाधिकारों (Human rights advocacy) की बहस को तेज कर दिया है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि सात समंदर पार बैठा एक राजनेता भारतीय जेल में बंद एक कैदी के विचारों से कितना प्रभावित है।

कड़वाहट के खिलाफ संघर्ष की एक अनूठी याद
जोहरान ममदानी ने अपने पत्र में उमर खालिद (Global Solidarity for Umar Khalid) के उन शब्दों का विशेष जिक्र किया है, जो कड़वाहट और उससे बचने के संकल्प से जुड़े हैं। मेयर ने लिखा कि वह अक्सर उमर के उन विचारों को याद करते हैं जिनमें उन्होंने (Prisoner justice) और विपरीत परिस्थितियों में भी खुद को नकारात्मकता से दूर रखने की बात कही थी। यह संदेश स्पष्ट करता है कि उमर खालिद के विचार केवल भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे वैश्विक स्तर पर उन लोगों को प्रेरित कर रहे हैं जो न्याय और समानता की बात करते हैं।
न्यूयॉर्क की सत्ता और माता-पिता से मुलाकात का संयोग
जोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क के मेयर पद की जिम्मेदारी संभालने से ठीक पहले उमर खालिद के माता-पिता से मुलाकात की थी। दिसंबर के महीने में हुई इस मुलाकात के दौरान ही ममदानी ने (Diplomatic relations) के औपचारिक दायरे से बाहर निकलकर एक मानवीय संवेदना प्रकट की थी। उन्होंने अपने नोट में इस मुलाकात की खुशी जाहिर करते हुए लिखा कि न्यूयॉर्क में हम सभी उमर के बारे में सोच रहे हैं, जो उनके परिवार के लिए एक बड़े नैतिक समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिकी सांसदों का बढ़ता दबाव और राजदूत को पत्र
यह घटनाक्रम केवल एक व्यक्तिगत संदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी कूटनीतिक हलचल भी छिपी है। हाल ही में कई अमेरिकी सांसदों ने भारतीय राजदूत को पत्र लिखकर उमर खालिद की तत्काल रिहाई की मांग की है। इस तरह का (International pressure) भारत की आंतरिक न्यायिक प्रक्रियाओं और वैश्विक मानवाधिकार मानकों के बीच एक नई बहस छेड़ रहा है। अमेरिकी राजनीतिक हलकों में उमर खालिद का मामला अब एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है।
पांच साल का लंबा इंतजार और न्यायिक प्रक्रिया
उमर खालिद सितंबर 2020 से जेल में बंद हैं और उन पर दिल्ली दंगों की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप हैं। उनकी सहयोगी बनोज्योत्सना लाहिरी ने जब जोहरान ममदानी के इस हस्तलिखित नोट को सोशल मीडिया पर साझा किया, तो यह (Social media activism) की ताकत बनकर उभरा। समर्थकों का मानना है कि इतने लंबे समय तक बिना दोष सिद्ध हुए जेल में रहना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है, जबकि जांच एजेंसियां इसे सुरक्षा के लिहाज से जरूरी बता रही हैं।
वैश्विक मंच पर गूँजती उमर खालिद की रिहाई की मांग
जोहरान ममदानी का यह नोट उस समय सामने आया है जब दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन भारत में बोलने की आजादी और असहमति के अधिकार पर सवाल उठा रहे हैं। न्यूयॉर्क जैसे महत्वपूर्ण शहर के मेयर का समर्थन मिलना (Legal representation) और अंतरराष्ट्रीय जनमत को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। अब देखना यह होगा कि विदेशी राजनेताओं और सांसदों का यह बढ़ता हस्तक्षेप भारत सरकार और न्यायपालिका के रुख पर क्या प्रभाव डालता है।



