Foreign Policy of India: क्या बांग्लादेश के साथ फिर बहाल होगी पुरानी दोस्ती, आखिर किसने निभाया पड़ोस का धर्म…
Foreign Policy of India: भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने तमिलनाडु के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भारत की विदेश नीति के मानवीय पक्ष को उजागर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति (India Bangladesh relations) केवल समझौतों का खेल नहीं है, बल्कि यह संकट के समय एक-दूसरे का हाथ थामने का नाम है। भारत की नीति हमेशा से अपने पड़ोसियों को प्राथमिकता देने की रही है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों।

अच्छे पड़ोसियों के प्रति भारत का उदार दृष्टिकोण
विदेश मंत्री ने पड़ोसी धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि अगर आपके पास अच्छे पड़ोसी हैं, तो उनके प्रति स्वभाव स्वाभाविक रूप से दयालुता का होता है। भारत ने हमेशा (Good neighborly relations) इस सिद्धांत को सर्वोपरि रखा है कि विकास की यात्रा में कोई भी पड़ोसी पीछे न छूटे। जयशंकर ने अपने हालिया बांग्लादेश दौरे का जिक्र करते हुए रिश्तों की संवेदनशीलता और शिष्टाचार पर विशेष जोर दिया।
आर्थिक संकट में संकटमोचक की भूमिका
इतिहास गवाह है कि जब भी किसी पड़ोसी देश पर विपत्ति आई, भारत ने बिना किसी स्वार्थ के मदद का हाथ बढ़ाया। उदाहरण के तौर पर, जब श्रीलंका गहरे आर्थिक संकट (Financial assistance) से जूझ रहा था, तब भारत ने चार अरब डॉलर की बड़ी सहायता राशि प्रदान कर उसे स्थिरता दी। यह भारत की उस व्यापक सोच का हिस्सा है जिसमें पड़ोसी की खुशहाली को अपनी खुशहाली माना जाता है।
महामारी के दौर में निभाई अटूट दोस्ती
कोरोना काल के दौरान जब दुनिया की महाशक्तियां केवल अपने हितों के बारे में सोच रही थीं, तब भारत ने ‘वैक्सीन मैत्री’ के तहत अपने पड़ोसियों को सुरक्षा कवच प्रदान किया। इस मानवीय पहल (Vaccine diplomacy) ने यह साबित कर दिया कि भारत केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों से एक विश्वसनीय मित्र है। जयशंकर के अनुसार, भारत का बढ़ता कद पूरे दक्षिण एशिया के लिए प्रगति के नए द्वार खोलता है।
बांग्लादेश में लोकतंत्र और स्थिरता की नई उम्मीद
वर्तमान में बांग्लादेश एक कठिन दौर से गुजर रहा है, लेकिन भारत वहां जल्द ही स्थिरता और शांति की कामना करता है। डॉ. जयशंकर ने आगामी चुनावों के प्रति अपनी सद्भावना व्यक्त करते हुए (Democratic process) आशा जताई कि चुनावी प्रक्रिया के बाद वहां की स्थिति सामान्य होगी। भारत का मानना है कि एक स्थिर और समृद्ध बांग्लादेश ही इस पूरे क्षेत्र के साझा विकास के लिए आवश्यक है।
सत्ता परिवर्तन और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की चिंता
2024 में शेख हसीना सरकार के जाने के बाद बांग्लादेश में जो राजनीतिक अस्थिरता पैदा हुई, उसने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खासकर अंतरिम सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा (Human rights violations) और अराजकता ने वैश्विक समुदाय का ध्यान खींचा है। भारत ने हमेशा इन घटनाओं पर अपनी चिंता जाहिर की है और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की वकालत की है।
भारत विरोधी सुरों और बढ़ते तनाव का विश्लेषण
हाल के दिनों में बांग्लादेश के भीतर कुछ कट्टरपंथी तत्वों द्वारा भारत विरोधी भावनाएं भड़काने की कोशिश की गई है। उस्मान हादी की मृत्यु जैसी घटनाओं के बाद भड़की हिंसा (Anti India protests) ने दोनों देशों के बीच के कूटनीतिक संबंधों में एक अस्थायी कड़वाहट पैदा की है। हालांकि, कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ये चुनौतियां अस्थाई हैं और दीर्घकालिक हित ही भविष्य की दिशा तय करेंगे।
साझा विकास और उज्जवल भविष्य का संकल्प
अंततः, भारत और बांग्लादेश का भूगोल और संस्कृति एक-दूसरे से इस कदर जुड़ी है कि उन्हें अलग नहीं किया जा सकता। डॉ. जयशंकर के शब्दों में, भारत का विकास (Regional stability) तभी पूर्ण है जब हमारे पड़ोसी भी साथ मिलकर आगे बढ़ें। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच विश्वास की वही पुरानी डोर फिर से मजबूत होगी और दक्षिण एशिया में शांति का एक नया अध्याय शुरू होगा



