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DroneIncident – सामने आई होर्मुज के ऊपर से अमेरिकी निगरानी ड्रोन के लापता होने की खबर

DroneIncident – अमेरिकी नौसेना का अत्याधुनिक निगरानी ड्रोन MQ-4C ट्राइटन इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह ड्रोन होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर अपने मिशन के दौरान अचानक संपर्क से बाहर हो गया। बताया जाता है कि उड़ान के दौरान ड्रोन ने आपात स्थिति का संकेत भी भेजा, जिसके बाद से इसका कोई स्पष्ट पता नहीं चल सका है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब तक आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

समुद्री निगरानी के लिए तैयार किया गया विशेष ड्रोन

MQ-4C ट्राइटन को खास तौर पर समुद्री इलाकों में निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए विकसित किया गया है। इसे अमेरिकी रक्षा कंपनी नॉर्थरोप ग्रुम्मन ने तैयार किया है। यह ड्रोन RQ-4 ग्लोबल हॉक प्लेटफॉर्म पर आधारित है और इसे विशाल समुद्री क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। अमेरिकी नौसेना के लिए यह प्रणाली रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

लंबी दूरी और समय तक निगरानी की क्षमता

इस ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी ऊंची उड़ान और लंबे समय तक हवा में बने रहने की क्षमता है। यह 50 हजार फीट से अधिक ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है और 24 घंटे से ज्यादा समय तक लगातार मिशन पर रह सकता है। इसके जरिए सिर्फ तत्काल निगरानी ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक डेटा एकत्र कर विश्लेषण भी किया जाता है, जिससे समुद्री गतिविधियों की विस्तृत तस्वीर तैयार की जा सके।

अन्य विमानों के साथ समन्वय

ट्राइटन को अक्सर P-8A पोसाइडन जैसे गश्ती विमानों के साथ तैनात किया जाता है। इस संयोजन से समुद्र में हो रही गतिविधियों पर लगातार नजर रखना आसान हो जाता है। यह प्रणाली समुद्री सुरक्षा और निगरानी नेटवर्क का अहम हिस्सा मानी जाती है, जिससे रणनीतिक क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखी जाती है।

आपात संकेत के बाद अचानक संपर्क टूटा

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ड्रोन बहरीन के उत्तर में अपने नियमित मिशन पर था, तभी उसने फ्लाइट ट्रैकिंग सिस्टम पर इमरजेंसी कोड प्रसारित किया। यह कोड आमतौर पर किसी गंभीर तकनीकी या अन्य समस्या का संकेत होता है। इसके कुछ ही समय बाद ड्रोन की ऊंचाई में तेजी से गिरावट दर्ज की गई और फिर उसका सिग्नल अचानक गायब हो गया।

घटना को लेकर बनी हुई है अनिश्चितता

ड्रोन के संपर्क टूटने के बाद यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वह दुर्घटनाग्रस्त हुआ या फिर तकनीकी कारणों से उसका ट्रैकिंग सिस्टम प्रभावित हुआ। कुछ स्वतंत्र विश्लेषणों में यह भी कहा गया है कि इमरजेंसी सिग्नल से पहले उसकी दिशा में बदलाव देखा गया था, लेकिन इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।

आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

अब तक अमेरिकी सैन्य अधिकारियों की ओर से इस घटना को लेकर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं की पूरी जानकारी सामने आने में समय लग सकता है, क्योंकि इसमें कई तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं की जांच की जाती है।

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