Donald Trump Aspirin Overdose Concerns: जानें क्या है डोनाल्ड ट्रंप की सनक और एस्पिरिन के ओवरडोज का खौफनाक सच…
Donald Trump Aspirin Overdose Concerns: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सार्वजनिक आचरण इन दिनों वैश्विक चर्चा और चिंता का विषय बना हुआ है। कभी वे राष्ट्रध्यक्षों का मजाक उड़ाते हैं, तो कभी अजीब चेहरे बनाकर सुर्खियां बटोरते हैं। उनकी इस बेचैन कर देने वाली प्रकृति और बार-बार अपनी ही बातों से पलट जाने की आदत ने विशेषज्ञों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या (Donald Trump mental health status) के पीछे उनकी वह दवा है जिसे वे डॉक्टरों के सख्त मना करने के बावजूद पिछले दो दशकों से ले रहे हैं? यह दवा है ‘एस्पिरिन’, जिसे ट्रंप एक सुरक्षा कवच की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।

डॉक्टरों की सलाह को दरकिनार कर लिया भारी डोज
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप रोजाना एस्पिरिन का अत्यधिक सेवन कर रहे हैं। सामान्यतः एस्पिरिन दर्द निवारक और खून पतला करने के काम आती है, लेकिन ट्रंप इसका निर्धारित मात्रा से लगभग चार गुना ज्यादा, यानी 325 मिलीग्राम डोज ले रहे हैं। (Aspirin daily dosage risks) को लेकर व्हाइट हाउस की मेडिकल टीम ने उन्हें कई बार आगाह किया और डोज कम करने की सलाह दी, लेकिन ट्रंप ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उनका तर्क है कि वे अपने दिल में ‘गाढ़ा खून’ नहीं बहने देना चाहते।
क्रॉनिक वीनस इनसफिशिएंसी और हाथ पर नीले थक्के
79 वर्षीय राष्ट्रपति ट्रंप के स्वास्थ्य को लेकर पिछले साल एक बड़ी जानकारी सामने आई थी। उन्हें ‘क्रॉनिक वीनस इनसफिशिएंसी’ नामक बीमारी है, जिसमें पैरों या शरीर की नसों को खून वापस दिल तक पहुंचाने में संघर्ष करना पड़ता है। अक्सर ट्रंप के हाथों पर नीले थक्के या निशान देखे जाते हैं, जिसे (Donald Trump health issues) के विशेषज्ञ एस्पिरिन के कारण होने वाली ब्लीडिंग से जोड़ते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि उनकी बार-बार हाथ मिलाने की आदत और खून पतला करने वाली दवा का मेल इन निशानों की मुख्य वजह है।
क्या एस्पिरिन वाकई दिल की बीमारियों से बचाती है?
एक दशक पहले तक चिकित्सा जगत का मानना था कि एस्पिरिन का रोजाना इस्तेमाल हार्ट अटैक और स्ट्रोक से बचाता है। हालांकि, 2018 में हुए बड़े क्लिनिकल ट्रायल ने इस धारणा को बदल दिया। शोध से पता चला कि (aspirin side effects research) के अनुसार, जिन लोगों को दिल की बीमारी का कोई पुराना इतिहास नहीं है, उनके लिए एस्पिरिन फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है। यह न केवल अंदरूनी ब्लीडिंग का खतरा बढ़ाती है, बल्कि गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर से होने वाली मौतों की संभावना में भी इजाफा कर सकती है।
व्यवहार और मानसिक संतुलन पर दवा का घातक असर
मामला केवल शारीरिक बीमारी तक सीमित नहीं है। एस्पिरिन का ओवरडोज इंसान के बर्ताव में चिड़चिड़ापन, घबराहट और व्याकुलता पैदा कर सकता है। मेडिकल ट्रायल बताते हैं कि बुजुर्गों में इस दवा का अधिक सेवन डिप्रेशन और भ्रम की स्थिति को बढ़ा देता है। ट्रंप के व्यवहार में दिखने वाली (personality changes due to medication) जैसे कि नर्वस होना और बेचैनी, एस्पिरिन के साइड इफेक्ट्स से मेल खाती हैं। यही कारण है कि अब यह सवाल वैश्विक मंचों पर पूछा जा रहा है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति का मानसिक संतुलन स्थिर है?
मेडिकल गाइडलाइंस और डॉक्टरों की चेतावनी
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अन्य स्वास्थ्य संगठनों की स्पष्ट गाइडलाइंस हैं कि 60 या 70 साल से अधिक उम्र के लोगों को रूटीन तौर पर एस्पिरिन नहीं लेनी चाहिए, जब तक कि उन्हें पहले कभी हार्ट अटैक न आया हो। कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ डॉ. जॉन माफी के अनुसार, (medical guidelines for aspirin) केवल उन मरीजों के लिए है जिन्हें पेरिफेरल आर्टरी डिजीज या इस्केमिक स्ट्रोक का इतिहास रहा हो। ट्रंप के केस में, उनकी हालिया कार्डियोवैस्कुलर रिपोर्ट नॉर्मल आई है, फिर भी वे इस हैवी डोज को छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
अंदरूनी रिसाव और ब्रेन हेमरेज का बढ़ता खतरा
एस्पिरिन प्लेटलेट्स के चिपकने की प्रक्रिया को रोकती है, जिससे थक्के नहीं बनते। लेकिन यही गुण जानलेवा भी हो सकता है। खून का यह अत्यधिक पतलापन (internal bleeding risks) को जन्म देता है, जिससे अचानक ब्रेन हेमरेज या पेट के अंदर रक्तस्राव हो सकता है। उम्र बढ़ने के साथ यह जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। ट्रंप की जिद उन्हें एक ऐसे खतरे की ओर ले जा रही है जहां एक छोटी सी चोट भी उनके लिए घातक साबित हो सकती है।
व्हाइट हाउस का मेमो और ट्रंप का अड़ियल नजरिया
पिछले दिनों व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक हेल्थ मेमो में दावा किया गया था कि ट्रंप की धमनियों में केवल मामूली प्लाक है, जो उनकी उम्र में सामान्य है। इसके बावजूद ट्रंप डॉक्टरों की राय से परे अपनी ही धारणाओं पर चलते हैं। वे मानते हैं कि (health checkup controversies) उनके खिलाफ एक एजेंडा है। ट्रंप का यह नजरिया चाहे उनकी अपनी पर्सनालिटी हो या एस्पिरिन का असर, यह पूरी दुनिया को इसलिए बेचैन कर रहा है क्योंकि उनके हाथ में दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति और परमाणु कोड्स हैं।
दुनिया के लिए चिंता का विषय क्यों है ट्रंप की सेहत?
जब दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश का नेता शारीरिक और मानसिक रूप से असुरक्षित महसूस करता है, तो उसके निर्णय वैश्विक शांति को प्रभावित कर सकते हैं। ट्रंप का (global impact of Trump behavior) स्पष्ट रूप से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में दिखाई देता है। उनके सनकी बर्ताव और आक्रामक निर्णयों के पीछे अगर वाकई किसी दवा का नकारात्मक असर है, तो यह अमेरिकी लोकतंत्र और वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा रेड सिग्नल है। उनकी सेहत अब केवल उनका निजी मामला नहीं रह गई है।
विज्ञान और सत्ता के बीच का संघर्ष
डोनाल्ड ट्रंप का मामला यह दिखाता है कि कैसे सत्ता के शिखर पर बैठा व्यक्ति वैज्ञानिक तथ्यों के ऊपर अपने व्यक्तिगत विश्वास को प्राथमिकता देता है। (Donald Trump medical evaluation) की बढ़ती मांग के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या व्हाइट हाउस की मेडिकल टीम उन्हें इस दवा के ओवरडोज को रोकने के लिए राजी कर पाती है। एक ऐसी दुनिया में जहां स्थिरता की सबसे ज्यादा जरूरत है, ट्रंप का ‘एस्पिरिन प्रेम’ अनिश्चितता का एक नया अध्याय लिख रहा है।



