Canada US Relations: कनाडा के आंतरिक मामलों में अमेरिकी दखल पर भड़के पीएम मार्क कार्नी, दी सख्त चेतावनी
Canada US Relations: वाशिंगटन और ओटावा के बीच बढ़ता कूटनीतिक तनाव अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी और इसे अमेरिका का ’51वां प्रांत’ बताने वाले विवादास्पद बयानों के बाद अब एक गुप्त बैठक की खबर ने आग में घी डालने का काम किया है। कनाडा के अल्बर्टा प्रांत के अलगाववादी नेताओं और अमेरिकी अधिकारियों के बीच हुई कथित गुप्त मुलाकातों की रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। कार्नी ने स्पष्ट शब्दों में अमेरिका को अपनी संप्रभुता का सम्मान करने की नसीहत दी है।

अलगाववादी नेताओं और अमेरिकी अधिकारियों की गुप्त मुलाकात का खुलासा
विवाद की मुख्य वजह ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ की एक खोजी रिपोर्ट है, जिसने दोनों पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, अल्बर्टा प्रांत को कनाडा से अलग करने की वकालत करने वाले समूह ‘अल्बर्टा प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट’ (APP) के नेताओं ने वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों के साथ गोपनीय बैठकें की हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले साल अप्रैल से अब तक ऐसी तीन उच्च स्तरीय मुलाकातें होने का दावा किया गया है। इन बैठकों के पीछे के उद्देश्यों और चर्चा के विषयों को लेकर कनाडा सरकार बेहद सतर्क और नाराज नजर आ रही है।
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने संप्रभुता को लेकर जताया कड़ा विरोध
इन गोपनीय मुलाकातों की खबर जैसे ही सार्वजनिक हुई, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बिना देर किए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कनाडा की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कार्नी ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करेगा और एक मित्र देश के आंतरिक मामलों में दखल देने या अलगाववादी तत्वों को शह देने से बचेगा। प्रधानमंत्री का यह सख्त लहजा हाल के वर्षों में अमेरिका के प्रति कनाडा का सबसे कड़ा रुख माना जा रहा है।
ट्रंप की टैरिफ नीतियों और बयानों से बढ़ा अविश्वास
कनाडा और अमेरिका के रिश्तों में यह कड़वाहट रातों-रात नहीं आई है। डोनाल्ड ट्रंप पिछले काफी समय से कनाडा की व्यापारिक नीतियों और सीमा सुरक्षा को लेकर हमलावर रहे हैं। ट्रंप ने न केवल कनाडा से आने वाले सामानों पर भारी टैक्स लगाने की बात कही है, बल्कि अपने सार्वजनिक संबोधनों में कनाडा के अस्तित्व पर भी कटाक्ष किए हैं। ट्रंप के ’51वां प्रांत’ वाले बयान को कनाडा की जनता और सरकार ने अपने आत्मसम्मान पर चोट के रूप में देखा है। अब अलगाववादियों के साथ अमेरिकी अधिकारियों की साठगांठ की खबरों ने इस अविश्वास की खाई को और गहरा कर दिया है।
कूटनीतिक गलियारों में हलचल और भविष्य की चुनौतियां
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अलगाववादियों के साथ अमेरिकी संपर्क की खबरें सच साबित होती हैं, तो यह उत्तर अमेरिकी व्यापार संबंधों (USMCA) और सुरक्षा सहयोग के लिए घातक हो सकता है। अल्बर्टा कनाडा का एक संसाधन संपन्न प्रांत है और वहां अलगाववाद को हवा मिलना पूरे देश की स्थिरता के लिए खतरा है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की चेतावनी ने यह साफ कर दिया है कि कनाडा अब दबकर रहने के मूड में नहीं है। फिलहाल वॉशिंगटन की ओर से इन बैठकों को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन ओटावा में सरकार और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर एकजुट नजर आ रहे हैं।



