BangladeshElection – मतदान से पहले बीएनपी का घोषणापत्र, रिश्तों और सुरक्षा पर जोर…
BangladeshElection – बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से ठीक छह दिन पहले बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने अपना विस्तृत चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है। पार्टी ने इसमें पड़ोसी देशों के साथ संतुलित और सम्मानजनक संबंध, सीमाओं से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों के कल्याण जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी है। घोषणापत्र को मौजूदा राजनीतिक हालात में बीएनपी की नीति और प्राथमिकताओं के स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

पड़ोसी देशों से रिश्तों को लेकर संतुलन का संदेश
बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान द्वारा प्रस्तुत 51 बिंदुओं वाले घोषणापत्र में कहा गया है कि पार्टी देश के हित, स्वतंत्रता और संप्रभुता को सर्वोपरि रखते हुए अन्य देशों के साथ संबंध मजबूत करना चाहती है। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया कि पड़ोसी देशों के साथ समानता, सहयोग और पारस्परिक सम्मान के आधार पर रिश्ते विकसित किए जाएंगे। पार्टी का मानना है कि आपसी समझ पर टिके संबंध ही क्षेत्रीय स्थिरता और सामूहिक प्रगति को आगे बढ़ा सकते हैं। हालांकि घोषणापत्र में किसी देश का नाम नहीं लिया गया, लेकिन सीमापार हत्याओं और अवैध घुसपैठ रोकने की बात को भारत से जुड़े संदर्भ में देखा जा रहा है।
धार्मिक अल्पसंख्यकों के कल्याण का वादा
घोषणापत्र में हिंदुओं सहित सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च बढ़ाने की घोषणा की गई है। पार्टी का कहना है कि सामाजिक सौहार्द और समान अवसर सुनिश्चित करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद होता है। बीएनपी ने भरोसा दिलाया कि सत्ता में आने पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, शिक्षा और आर्थिक उत्थान के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
‘बांग्लादेश प्रथम’ और जल बंटवारे का मुद्दा
बीएनपी ने राज्य शासन के मूल दर्शन के रूप में ‘बांग्लादेश प्रथम’ नीति को अपनाने की बात कही है। घोषणापत्र में पद्मा, तीस्ता और अन्य सीमा पार नदियों से बांग्लादेश के उचित हिस्से का पानी सुनिश्चित करने का वादा भी शामिल है। पार्टी का कहना है कि जल संसाधनों का न्यायसंगत बंटवारा देश की कृषि, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इस संदर्भ में भी किसी देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है।
बदले राजनीतिक परिदृश्य में बीएनपी की बढ़त
तारिक रहमान को पिछले महीने अपनी मां और बीएनपी अध्यक्ष रहीं खालिदा जिया के निधन के बाद पार्टी की कमान सौंपी गई थी। शेख हसीना की अवामी लीग की अनुपस्थिति में बदले राजनीतिक हालात में बीएनपी खुद को सबसे मजबूत दावेदार के रूप में पेश कर रही है। हाल के जनमत सर्वेक्षणों में संकेत मिले हैं कि बड़ी संख्या में पूर्व अवामी लीग समर्थक अब बीएनपी के प्रति झुकाव दिखा रहे हैं।
गोपालगंज में बदला चुनावी दृश्य
दशकों बाद ऐसा हो रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के गृह जिले गोपालगंज में अवामी लीग का पारंपरिक नाव चिन्ह मतपत्रों में नजर नहीं आएगा। इसकी जगह बीएनपी, जमात-ए-इस्लामी और निर्दलीय उम्मीदवारों के चुनाव चिन्ह शामिल होंगे। सड़कों पर लगे पोस्टरों और बैनरों में भी अवामी लीग की गैरमौजूदगी साफ दिखाई दे रही है, जिससे कुछ मतदाताओं में निराशा का माहौल है। गोपालगंज को लंबे समय तक अवामी लीग का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है।
लंबे शासन के बाद बदली मतदाता प्राथमिकताएं
शेख हसीना ने 2024 तक लगातार 15 वर्षों से अधिक समय तक बांग्लादेश की सत्ता संभाली। इस दौरान विपक्षी दलों ने कई बार चुनावों का बहिष्कार भी किया था। हाल में प्रकाशित मतदाता सर्वेक्षणों के अनुसार, लगभग आधे पूर्व अवामी लीग समर्थक अब बीएनपी को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि करीब 30 प्रतिशत मतदाता जमात-ए-इस्लामी के पक्ष में बताए जा रहे हैं। शोध संस्थानों का मानना है कि मतदाता पुराने दलों से पूरी तरह विमुख नहीं हुए हैं, बल्कि नए विकल्पों को परख रहे हैं।
चुनाव से पहले ढाका में तनाव
चुनाव से ठीक पहले ढाका में राजनीतिक तनाव भी देखने को मिला। इंकलाब मोर्चा से जुड़े हजारों प्रदर्शनकारियों ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के सरकारी आवास की ओर मार्च किया और अंदर घुसने की कोशिश की। पुलिस ने हालात काबू में करने के लिए आंसू गैस, साउंड ग्रेनेड और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारी दिसंबर 2025 में पलटन इलाके में मारे गए उस्मान हादी के हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। झड़प के दौरान पथराव भी हुआ, जिसमें करीब 50 लोग घायल बताए गए हैं।



