Bangladesh General Election 2026: मिर्जा फखरुल ने चुनाव आयोग को घेरा, बोले- धांधली हुई तो खैर नहीं…
Bangladesh General Election 2026: बांग्लादेश में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है और इसी बीच विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने मोर्चा खोल दिया है। बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर दो टूक शब्दों में कहा कि आगामी 12 फरवरी को होने वाले मतदान में (Democratic Election Process) की पवित्रता बनाए रखना आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर चुनाव आयोग ने अपनी निष्पक्षता नहीं दिखाई, तो लोकतंत्र का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।

आगारगांव में हाई-वोल्टेज बैठक का शोर
ढाका के आगारगांव स्थित चुनाव आयोग के दफ्तर में हुई यह मुलाकात महज एक औपचारिक भेंट नहीं थी, बल्कि इसमें भविष्य के कड़े तेवर छिपे थे। मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन के साथ हुई इस बातचीत के बाद (Electoral Transparency Standards) पर सवाल उठाते हुए आलमगीर ने मीडिया से कहा कि बीएनपी हमेशा से स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव के पक्ष में रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में कुछ ऐसे तत्व हावी हो रहे हैं जो सत्ताधारी दल के प्रति झुकाव रख रहे हैं।
पोस्टल बैलेट के खेल पर विपक्षी दल का प्रहार
बैठक के दौरान सबसे गंभीर मुद्दा डाक मतपत्रों यानी पोस्टल बैलेट की प्रक्रिया को लेकर उठा, जिसमें विपक्षी दल को बड़ी धांधली की बू आ रही है। मिर्जा फखरुल ने आरोप लगाया कि विदेश में रहने वाले मतदाताओं के लिए (Voter Integrity Issues) को नजरअंदाज करते हुए मतपत्रों की छपाई में हेरफेर किया गया है। बीएनपी का दावा है कि यह पूरी कवायद किसी एक विशेष राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने के मकसद से रची गई है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
चुनावी ड्यूटी वाले कर्मचारियों के लिए नई मांग
चुनाव प्रक्रिया में तैनात होने वाले सरकारी कर्मचारियों के मताधिकार को लेकर भी बीएनपी ने आयोग के सामने अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने मांग की है कि मतदान केंद्रों पर तैनात होने वाले अधिकारियों को (Postal Ballot Regulations) के तहत चुनाव चिह्न आवंटन के बाद ही मतपत्र दिए जाने चाहिए। आलमगीर के अनुसार, ऐसा करने से ही कर्मचारी बिना किसी दबाव के अपनी पसंद के उम्मीदवार को चुन सकेंगे और मतदान की गोपनीयता बरकरार रहेगी।
मतदाताओं के निजी डेटा की चोरी पर हंगामा
आलमगीर ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि बांग्लादेश के कई इलाकों में मतदाताओं की निजी जानकारी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष राजनीतिक दल के कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों के एनआईडी और (Personal Data Privacy) से जुड़ी अन्य जानकारी जैसे बीकेश और मोबाइल नंबर इकट्ठा कर रहे हैं। बीएनपी ने इसे एक गंभीर आपराधिक कृत्य करार देते हुए चुनाव आयोग से अपराधियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मतदाताओं का ढाका ट्रांसफर और बीएनपी का शक
विपक्षी दल ने एक और गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में मतदाताओं को रहस्यमय तरीके से ढाका स्थानांतरित किया जा रहा है। बीएनपी ने इसे (Election Manipulation Tactics) का हिस्सा बताते हुए आयोग से श्वेत पत्र की मांग की है। उन्होंने पूछा है कि आखिर किन क्षेत्रों से और किस आधार पर मतदाताओं की सूची में यह बदलाव किए जा रहे हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की साजिश लगती है।
पक्षपाती निर्वाचन अधिकारियों को हटाने की मांग
बीएनपी ने चुनाव आयोग को उन अधिकारियों की सूची सौंपी है जिन पर सत्ता पक्ष के एजेंट के रूप में काम करने का आरोप है। मिर्जा फखरुल ने स्पष्ट किया कि कई निर्वाचन क्षेत्रों से ऐसी शिकायतें मिली हैं कि वहां के (Administrative Neutrality in Elections) को ठेंगा दिखाकर अधिकारी एक खास पार्टी का प्रचार कर रहे हैं। बीएनपी ने मांग की है कि स्वतंत्र और स्वीकार्य चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ऐसे दागी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटा देना चाहिए।
लोकतंत्र को बचाने के लिए बीएनपी का संकल्प
प्रेस वार्ता के अंत में आलमगीर भावुक और पेशेवर लहजे में नजर आए, उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल एक पार्टी की नहीं बल्कि पूरे बांग्लादेश की जनता की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर (Political Justice in Bangladesh) सुनिश्चित नहीं किया गया, तो जनता का चुनाव प्रणाली से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। बीएनपी ने आयोग को आगाह किया कि वे केवल एक संस्था नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र के रक्षक हैं और उन्हें अपनी इस भूमिका के साथ न्याय करना ही होगा।
विदेशी ताकतों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की नजर
जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी बांग्लादेश के घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं। बीएनपी का मानना है कि (International Election Monitoring) की अनुपस्थिति में निष्पक्षता का दावा करना बेमानी होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग अपने कार्यों से यह साबित करेगा कि वह किसी दबाव में नहीं है। पार्टी ने यह भी साफ कर दिया कि वे चुनावी मैदान में डटे रहेंगे, लेकिन पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं करेंगे।
चुनावी आचार संहिता का खुलेआम उल्लंघन
अंत में, विपक्षी दल ने आयोग को आचार संहिता के उल्लंघन के कई उदाहरण दिए और कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सड़कों पर हो रही (Violation of Election Code) की घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि मैदान सभी के लिए बराबर नहीं है। बीएनपी ने मांग की कि आयोग अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करे और यह सुनिश्चित करे कि 12 फरवरी को होने वाला आम चुनाव बांग्लादेश के इतिहास में एक मिसाल बन सके।



