Baloch leader open letter to S. Jaishankar: बलोच नेता ने जयशंकर को पत्र लिख पाकिस्तान के खिलाफ क्यों माँगा भारत का साथ…
Baloch leader open letter to S. Jaishankar: बलूचिस्तान के निर्वासित नेता मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक बेहद महत्वपूर्ण खुला पत्र (Open Letter) लिखकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। 2026 की शुरुआत में लिखे गए इस पत्र में मीर यार बलोच ने न केवल भारत के 140 करोड़ लोगों को नए साल की मुबारकबाद दी, बल्कि बलूचिस्तान के 6 करोड़ नागरिकों की आकांक्षाओं को भी आवाज दी। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो रही है।

हिंगलाज माता और साझा विरासत का जिक्र
मीर यार बलोच ने अपने पत्र में भारत और बलूचिस्तान के बीच केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर दिया है। उन्होंने (Cultural Heritage) का हवाला देते हुए लिखा कि हिंगलाज माता मंदिर जैसे पवित्र स्थल भारत और बलूचिस्तान की साझा पहचान के प्रतीक हैं। पत्र में ऐतिहासिक वाणिज्यिक और धार्मिक रिश्तों का जिक्र करते हुए यह तर्क दिया गया है कि दोनों क्षेत्रों के बीच की बॉन्डिंग सदियों पुरानी है, जिसे पाकिस्तान की कृत्रिम सीमाएँ अलग नहीं कर सकतीं।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और मोदी सरकार की प्रशंसा
बलोच नेता ने अपने पत्र में भारत सरकार की आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की जमकर सराहना की। विशेष रूप से पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए (National Security Action) ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए उन्होंने पीएम मोदी के साहस की प्रशंसा की। उन्होंने लिखा कि जिस तरह भारत ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए हैं, उसी तरह बलूचिस्तान के लोग भी बीते 69 वर्षों से पाकिस्तानी दमन से मुक्ति पाने के लिए भारत की ओर एक मजबूत साथी के रूप में देख रहे हैं।
पाकिस्तान को जड़ से उखाड़ने की मांग
इस खुले पत्र का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा वह था जहाँ मीर यार बलोच ने भारत से पाकिस्तान को क्षेत्रीय अस्थिरता की जड़ बताते हुए उसे समाप्त करने में सहयोग मांगा। उन्होंने (Geopolitical Strategy) के तहत दावा किया कि बलूचिस्तान का हर बच्चा और नागरिक इस संघर्ष में भारत के साथ खड़ा होने को तैयार है। बलोच नेता के अनुसार, दक्षिण एशिया में स्थाई शांति तभी संभव है जब बलूचिस्तान जैसे उत्पीड़ित क्षेत्रों को पाकिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्ति मिले और वहां की संप्रभुता बहाल हो।
चीन-पाकिस्तान गठजोड़ और भारत के लिए चेतावनी
पत्र में बलूचिस्तान की भूमि पर चीन की बढ़ती दखलंदाजी पर भी गंभीर चिंता जताई गई है। मीर यार बलोच ने चेतावनी दी है कि यदि बलूचिस्तान की स्वतंत्रता सेनानियों को जल्द ही सैन्य और नैतिक रूप से (Strategic Defense) में मजबूत नहीं किया गया, तो चीन वहां अपने स्थायी सैन्य ठिकाने बना लेगा। उन्होंने जयशंकर को आगाह किया कि बलूचिस्तान में चीनी सैनिकों की मौजूदगी भविष्य में केवल बलूच लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा के लिए भी एक बड़ी सामरिक चुनौती साबित होगी।
बलूच राष्ट्रवाद और भारत की भूमिका
मीर यार बलोच का यह पत्र स्पष्ट करता है कि अब बलूचिस्तान की आजादी की मांग केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न बन चुका है। पत्र के अंत में उन्होंने (International Diplomacy) के जरिए भारत से अपील की है कि वह बलूचिस्तान के संघर्ष को वैश्विक मंचों पर और प्रखरता से उठाए। भारत के लिए यह पत्र एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश है, जो आने वाले समय में भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन संबंधों की दिशा तय करने में भूमिका निभा सकता है।



