Vitamin D Deficiency Symptoms: अगर दिख रहे हैं ये लक्षण, तो तुरंत हो जाएं सावधान, वरना…
Vitamin D Deficiency Symptoms: विटामिन-डी हमारे शरीर के लिए एक अनिवार्य पोषक तत्व है, जिसे ‘सनशाइन विटामिन’ भी कहा जाता है क्योंकि हमारा शरीर सूरज की रोशनी के संपर्क में आने पर इसे प्राकृतिक रूप से बनाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह विटामिन न केवल हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए (Calcium Absorption) में मदद करता है, बल्कि यह हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को भी बूस्ट करता है। इसकी कमी होने पर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग और प्रक्रियाएं प्रभावित होने लगती हैं, जिसे अक्सर लोग शुरुआत में सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

हड्डियों और जोड़ों में लगातार रहने वाला दर्द
विटामिन-डी की कमी का सबसे पहला और स्पष्ट संकेत हड्डियों में होने वाला दर्द है। चूंकि विटामिन-डी कैल्शियम के अवशोषण के लिए जिम्मेदार है, इसकी कमी से हड्डियां नरम और कमजोर होने लगती हैं, जिसे मेडिकल भाषा में (Osteomalacia in Adults) कहा जाता है। यदि आपको अक्सर पीठ के निचले हिस्से, कूल्हों या पैरों की हड्डियों में गहरा दर्द महसूस होता है, तो यह संकेत है कि आपके शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन-डी नहीं मिल रहा है।
हर वक्त महसूस होने वाली अत्यधिक थकान
क्या आप पर्याप्त नींद लेने के बाद भी खुद को थका हुआ और ऊर्जाहीन महसूस करते हैं? विटामिन-डी का निम्न स्तर आपकी (Energy Levels) को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है। शोध बताते हैं कि विटामिन-डी कोशिकाओं के भीतर माइटोकॉन्ड्रिया की कार्यक्षमता को बढ़ाता है, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसकी कमी होने पर व्यक्ति को दिन भर सुस्ती और मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होती है, जिससे दैनिक कार्यों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
इम्युनिटी का कमजोर होना और बार-बार बीमार पड़ना
विटामिन-डी हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रमणों और हानिकारक बैक्टीरिया से लड़ने के लिए तैयार करता है। यदि आप अक्सर सर्दी, खांसी या फ्लू की चपेट में (Immune System Response) के कारण आ जाते हैं, तो यह विटामिन-डी की भारी कमी का लक्षण हो सकता है। यह विटामिन सीधे उन कोशिकाओं के साथ संपर्क करता है जो संक्रमण से लड़ने के लिए जिम्मेदार होती हैं, इसलिए इसकी कमी आपको बार-बार अस्पताल के चक्कर लगवा सकती है।
घाव भरने में होने वाली असामान्य देरी
सर्जरी या चोट के बाद घाव का धीरे-भरना भी विटामिन-डी की कमी का एक अनजाना लक्षण है। विटामिन-डी शरीर में नए ऊतकों यानी टिश्यूज के निर्माण के लिए (Wound Healing Process) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सूजन को नियंत्रित करने और संक्रमण को रोकने वाले यौगिकों के उत्पादन में मदद करता है। यदि आपके छोटे-छोटे जख्म भी ठीक होने में काफी समय ले रहे हैं, तो आपको अपने विटामिन स्तर की जांच तुरंत करानी चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य और डिप्रेशन का गहरा संबंध
विटामिन-डी का प्रभाव केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे मस्तिष्क के उन हिस्सों को भी प्रभावित करता है जो मूड को नियंत्रित करते हैं। सर्दियों के मौसम में (Seasonal Affective Disorder) का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि धूप कम मिलती है और विटामिन-डी का स्तर गिर जाता है। अध्ययनों में पाया गया है कि जिन लोगों में इस विटामिन की कमी होती है, उनमें चिंता, तनाव और उदासी के लक्षण अधिक देखे जाते हैं।
बालों का तेजी से झड़ना और पतला होना
जब तनाव को बालों के झड़ने का मुख्य कारण माना जाता है, तो अक्सर लोग पोषक तत्वों की कमी को भूल जाते हैं। विटामिन-डी हेयर फॉलिकल्स यानी बालों की जड़ों को उत्तेजित करने के लिए (Hair Follicle Cycle) में अनिवार्य होता है। विशेष रूप से महिलाओं में, विटामिन-डी की कमी से बाल झड़ने की समस्या काफी बढ़ सकती है, जिसे ‘एलोपेसिया’ जैसी स्थितियों से भी जोड़कर देखा जाता है। स्वस्थ और घने बालों के लिए शरीर में इस विटामिन का पर्याप्त स्तर होना बहुत जरूरी है।
विटामिन-डी की कमी को कैसे करें पूरा?
इस कमी को दूर करने का सबसे सरल और मुफ्त तरीका है रोजाना 15-20 मिनट सुबह की गुनगुनी धूप में बैठना। इसके अलावा अपनी डाइट में (Fortified Foods) जैसे कि फैटी फिश, अंडे की जर्दी, मशरूम और फोर्टिफाइड दूध या अनाज शामिल करें। यदि कमी बहुत अधिक है, तो डॉक्टर की सलाह पर विटामिन-डी सप्लीमेंट्स या इंजेक्शन भी लिए जा सकते हैं। समय रहते इन लक्षणों को पहचानना आपको भविष्य की बड़ी बीमारियों जैसे ऑस्टियोपोरोसिस से बचा सकता है।



