Text Neck Syndrome Causes and Prevention: हल्का सा मोबाइल और गर्दन पर मनभर का बोझ, क्या आप भी अनजाने में खुद को दे रहे हैं उम्र भर का दर्द…
Text Neck Syndrome Causes and Prevention: आज के दौर में स्मार्टफोन बेहद स्लिम और हल्के हो चुके हैं, लेकिन इनका प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर बहुत भारी पड़ रहा है। हम अक्सर फोन खरीदते समय उसके कैमरा फीचर्स और लुक पर ध्यान देते हैं, लेकिन कभी उसके वजन और हमारे बैठने के तरीके (Ergonomic Health) के बीच के संबंध को नहीं समझते। क्या आप जानते हैं कि हाथ में पकड़ा हुआ मात्र 200 ग्राम का मोबाइल आपकी गर्दन पर 27 किलो तक का भार डाल सकता है? यह सुनने में किसी तिलिस्म जैसा लग सकता है, लेकिन विज्ञान इसकी पुष्टि करता है कि मोबाइल हाथ में होने के बावजूद उसका असली बोझ हमारी गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है।

गर्दन का झुकाव और रीढ़ पर बढ़ता बोझ
एक स्वस्थ इंसान का सिर सीधा रहने पर लगभग 5 किलो का होता है, लेकिन जैसे ही हम मोबाइल देखने के लिए गर्दन झुकाते हैं, खेल बदल जाता है। शोध बताते हैं कि सिर्फ 15 डिग्री गर्दन झुकाने पर स्पाइन पर 11 किलो का वजन पड़ता है। जब यह झुकाव बढ़कर 45 डिग्री होता है, तो वजन 20 किलो हो जाता है और 60 डिग्री पर यह (Spinal Cord Pressure) बढ़कर पूरे 27 किलो तक पहुँच जाता है। यह स्थिति रीढ़ की हड्डी के लिए बेहद खतरनाक है, क्योंकि मोबाइल भले ही छोटा हो, लेकिन गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर इसकी सजा बहुत बड़ी और पीड़ादायक हो सकती है।
‘टेक्स्ट नेक’ और ‘कार्पल टनल’ का बढ़ता खतरा
आजकल हर दूसरा व्यक्ति गर्दन और पीठ के दर्द से परेशान है, जिसका मुख्य कारण ‘टेक्स्ट नेक सिंड्रोम’ है। घंटों तक मोबाइल पकड़े रहने से न केवल गर्दन की मांसपेशियां प्रभावित होती हैं, बल्कि हाथों में (Carpal Tunnel Syndrome) होने की संभावना भी बढ़ जाती है। गर्दन का गलत पॉश्चर सर्वाइकल स्पाइन की स्थिरता को बिगाड़ देता है, जिससे नसें दबने लगती हैं और हाथ-पैर सुन्न होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। नवीनतम अध्ययन तो यहाँ तक कहते हैं कि यह गलत पॉश्चर मोटापे और शुगर जैसी बीमारियों के लिए भी रास्ता खोल देता है।
युवाओं और बच्चों का खोखला होता स्वास्थ्य
डिजिटल युग की इस लत ने बच्चों का बचपन छीन लिया है और वे अब बाहर खेलना-कूदना भूलते जा रहे हैं। शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण बच्चों के पैरों में कमजोरी और टेढ़ापन देखा जा रहा है। स्मार्टफोन के अनियंत्रित उपयोग (Sedentary Lifestyle Impact) के कारण आज 68% युवा हर वक्त थकान, 58% नींद की कमी और 55% मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। यह स्थिति समाज को अंदर से खोखला कर रही है। नए साल की शुरुआत होने वाली है, और यदि हम अभी नहीं संभले तो यह पुराना दर्द उम्र भर हमारा साथ नहीं छोड़ेगा।
स्पॉन्डिलाइटिस: रीढ़ की हड्डी की गंभीर सूजन
जब हम अपनी रीढ़ की हड्डी की देखभाल नहीं करते, तो स्पॉन्डिलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी जन्म लेती है। यह मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी में होने वाली सूजन है, जो एक प्रकार का गठिया (Arthritis Symptoms) माना जाता है। यह रीढ़ की वर्टिब्रा और जोड़ों को बुरी तरह प्रभावित करता है, जिससे गर्दन और पीठ में असहनीय दर्द और अकड़न महसूस होती है। अंगों में सुन्नता और चलने-फिरने में तकलीफ इसके सामान्य लक्षण हैं। स्वामी रामदेव के अनुसार, योग और सही जीवनशैली ही इस दर्द से मुक्ति का एकमात्र प्रभावी मार्ग है।
कमर दर्द और सर्वाइकल पेन से बचाव के उपाय
अपनी आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके आप बड़े खतरों को टाल सकते हैं। लैपटॉप को कभी भी गोद में रखकर काम न करें, बल्कि हमेशा डेस्क या मेज का सहारा लें। काम करते समय अपने (Correct Sitting Posture) का विशेष ध्यान रखें और पैरों को जमीन पर टिका कर बैठें। हर एक घंटे के काम के बाद कम से कम 5 मिनट का ब्रेक लें और सूक्ष्म व्यायाम करें। सोने के लिए बहुत नरम गद्दे के बजाय तख्त या सख्त बिस्तर का उपयोग करें और डाइट में कैल्शियम व विटामिन डी युक्त चीजों को शामिल करें।
हड्डियों को मजबूत बनाने के आयुर्वेदिक नुस्खे
आयुर्वेद में हड्डियों और जोड़ों के दर्द के लिए रामबाण उपचार मौजूद हैं। यदि आप साइटिका या कंधे के दर्द से परेशान हैं, तो हल्दी वाला दूध और शहद का सेवन करें। प्रभावित जगह पर हल्दी और नारियल के पेस्ट का लेप लगाएं और अदरक की चाय का आनंद लें। तिल के तेल से नियमित मालिश (Natural Bone Healing) करने और सेंधा नमक के गर्म पानी से सिकाई करने पर सूजन में तुरंत राहत मिलती है। हड्डियों की मजबूती के लिए गिलोय का काढ़ा, निर्गुंडी का जूस और एलोवेरा का रस सुपरफूड की तरह काम करते हैं।
भविष्य की सुरक्षा के लिए गर्दन रखें सीधी
निष्कर्ष के तौर पर, मोबाइल का उपयोग बुरा नहीं है, लेकिन उसका तरीका गलत है। मोबाइल देखते समय अपनी आंखों के लेवल पर फोन रखें ताकि गर्दन को झुकना न पड़े। याद रखें कि (Physical Wellbeing) ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है। यदि आप आज अपनी रीढ़ की हड्डी को इस अनावश्यक बोझ से बचा लेते हैं, तो आपका भविष्य दर्दमुक्त और ऊर्जावान बना रहेगा। अपनी गर्दन सीधी रखें, मोबाइल का उपयोग सीमित करें और योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं ताकि आप डिजिटल बीमारियों के चंगुल से बच सकें।



