SugarIntake – अधिक चीनी से लिवर और किडनी पर बढ़ता खतरा
SugarIntake – मीठा खाना ज्यादातर लोगों की पसंद होता है। चाय में अतिरिक्त चीनी, ठंडे पेय, मिठाइयां और पैकेट बंद जूस—इन सबमें रिफाइंड शुगर की मात्रा काफी ज्यादा होती है। आम धारणा यह है कि कम उम्र में ज्यादा मीठा खाने से कोई खास नुकसान नहीं होता, या फिर अधिकतम जोखिम केवल डायबिटीज तक सीमित रहता है। लेकिन चिकित्सकीय शोध इससे कहीं अधिक गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। जरूरत से ज्यादा चीनी का सेवन शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर असर डाल सकता है।

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक रिफाइंड शुगर और फ्रुक्टोज का सेवन हृदय, लिवर और किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। समस्या यह है कि इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देता है, जिससे लोग लंबे समय तक अनजान बने रहते हैं।
लिवर पर पड़ने वाला दबाव
विशेषज्ञ बताते हैं कि लिवर शरीर में ग्लूकोज को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है। जब कोई व्यक्ति नियमित रूप से अधिक मात्रा में मीठे पेय या प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ लेता है, तो अतिरिक्त शुगर को लिवर फैट में बदलने लगता है। यह स्थिति नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज की शुरुआत कर सकती है।
समय रहते ध्यान न देने पर लिवर में सूजन बढ़ सकती है, जो आगे चलकर गंभीर स्थितियों का रूप ले सकती है। चिकित्सकों के अनुसार संतुलित आहार और नियमित जांच से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
किडनी पर बढ़ता असर
अधिक चीनी का सेवन खून में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ा सकता है, जो किडनी के लिए हानिकारक है। यदि ब्लड शुगर लंबे समय तक ऊंचा बना रहता है, तो किडनी की फिल्टर करने की क्षमता प्रभावित होती है। इससे शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगते हैं।
इंसुलिन रेजिस्टेंस भी किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालता है। लगातार अनियंत्रित स्थिति रहने पर क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित ब्लड शुगर मॉनिटरिंग और संतुलित जीवनशैली से इस खतरे को रोका जा सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर और हृदय जोखिम
चीनी का अधिक सेवन केवल डायबिटीज तक सीमित नहीं है। इससे हाई ब्लड प्रेशर की संभावना भी बढ़ सकती है, जो हृदय रोगों का प्रमुख कारण है। रक्त वाहिकाओं पर बढ़ते दबाव का असर लिवर और किडनी दोनों पर पड़ता है। इसलिए मीठे खाद्य पदार्थों को सीमित मात्रा में लेना जरूरी है।
किन आदतों में बदलाव जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पैकेट बंद जूस, कोल्ड ड्रिंक और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं। प्राकृतिक मिठास के लिए ताजे फलों का सेवन बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि इनमें फाइबर मौजूद होता है जो शुगर के अवशोषण को नियंत्रित करता है।
चाय और कॉफी में चीनी की मात्रा धीरे-धीरे कम करना एक व्यावहारिक कदम हो सकता है। खाद्य पैकेट पर लिखी सामग्री पढ़ने की आदत भी मददगार है, खासकर जब उसमें हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप जैसे तत्व शामिल हों। पर्याप्त पानी पीना और नियमित व्यायाम करना भी ग्लूकोज संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।
सतर्कता ही बचाव
चीनी कम करना शुरुआती दिनों में चुनौतीपूर्ण लग सकता है, लेकिन लंबे समय के स्वास्थ्य लाभ को देखते हुए यह जरूरी कदम है। संतुलित आहार, सक्रिय जीवनशैली और नियमित स्वास्थ्य जांच से लिवर व किडनी की सेहत सुरक्षित रखी जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज लिया गया छोटा सा सावधानी भरा निर्णय भविष्य में गंभीर बीमारियों और उपचार के खर्च से बचा सकता है।



