Sleep Deprivation: नींद की कमी से शरीर में जमा हो सकता है जहर, जानें सेहत के लिए क्यों जरूरी है गहरी नींद…
Sleep Deprivation: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और देर रात तक स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल ने हमारी नींद के घंटों को काफी कम कर दिया है। अक्सर लोग काम के दबाव या मनोरंजन के चक्कर में अपनी नींद से समझौता कर लेते हैं, लेकिन यह छोटी सी लापरवाही भविष्य में बहुत महंगी पड़ सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो कम सोने का असर सिर्फ अगले दिन की थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर के भीतर कई गंभीर बीमारियों के बीज बो देता है। दरअसल, जब हम सोते हैं, तो हमारे मस्तिष्क का ग्लाइम्फैटिक सिस्टम सक्रिय होकर दिन भर के जमा हुए जहरीले तत्वों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालता है। नींद की कमी इस सफाई प्रक्रिया में बाधा डालती है, जिससे शरीर के आंतरिक अंगों पर बुरा असर पड़ता है।

मस्तिष्क की कार्यक्षमता और मानसिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव
पर्याप्त नींद न लेने का सबसे पहला और गहरा असर हमारे दिमाग पर पड़ता है। नींद की कमी मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की सक्रियता को कम कर देती है, जो तार्किक सोच और आत्म-नियंत्रण के लिए जिम्मेदार होता है। यही कारण है कि कम सोने वाला व्यक्ति अधिक चिड़चिड़ा, तनावग्रस्त और फैसला लेने में असमर्थ महसूस करता है। शोधों से यह भी पता चला है कि लंबे समय तक नींद की कमी से मस्तिष्क में ‘बीटा-एमाइलॉयड’ जैसे हानिकारक प्रोटीन जमा होने लगते हैं, जो आगे चलकर अल्जाइमर और याददाश्त खोने जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
मोटापे और अनियंत्रित मेटाबॉलिज्म से सीधा संबंध
क्या आप जानते हैं कि कम सोने से आपका वजन भी बढ़ सकता है? नींद की कमी शरीर में भूख को नियंत्रित करने वाले दो मुख्य हार्मोन—लेप्टिन और घ्रेलिन—के संतुलन को बिगाड़ देती है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो भूख बढ़ाने वाले हार्मोन घ्रेलिन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे हमें देर रात जंक फूड और मीठा खाने की तीव्र इच्छा होती है। इसके अलावा, नींद की कमी शरीर की इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया को भी प्रभावित करती है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज और मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
उम्र के अनुसार कितनी नींद है आपके लिए अनिवार्य
हर व्यक्ति की नींद की जरूरत उसकी उम्र और शारीरिक गतिविधियों पर निर्भर करती है। स्वास्थ्य मानकों के अनुसार, 18 से 64 वर्ष के वयस्कों को स्वस्थ रहने के लिए हर रात कम से कम 7 से 9 घंटे की निर्बाध नींद लेनी चाहिए। वहीं, किशोरों के लिए 8-10 घंटे और स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए 9-11 घंटे की नींद जरूरी बताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ बिस्तर पर लेटे रहना काफी नहीं है, बल्कि नींद की ‘क्वालिटी’ यानी गुणवत्ता भी मायने रखती है। यदि आप पर्याप्त घंटे सोने के बावजूद सुबह उठकर ताजगी महसूस नहीं करते, तो इसका मतलब है कि आप गहरी नींद (Deep Sleep) के चरणों तक नहीं पहुँच पा रहे हैं।
गहरी और सुकून भरी नींद पाने के सरल उपाय
एक अच्छी नींद स्वस्थ जीवन का आधार है, इसलिए इसे अपनी प्राथमिकता बनाएं। सोने से कम से कम एक घंटा पहले डिजिटल स्क्रीन यानी मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बना लेना सबसे प्रभावी उपाय है। कमरे का वातावरण शांत, ठंडा और अंधेरे वाला रखें ताकि शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर बढ़ सके। शाम के समय चाय या कॉफी जैसे कैफीन युक्त पदार्थों के सेवन से बचें। याद रखें कि नींद आपके शरीर की मरम्मत और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने का समय है। इसे नजरअंदाज करना न केवल आपकी कार्यक्षमता को घटाता है, बल्कि समय से पहले बुढ़ापे और हृदय रोगों को भी न्योता देता है।



