स्वास्थ्य

Silent Liver Disease Risk Factors: अगर आप भी हैं इन 3 बीमारियों के शिकार, तो समझो खतरे में है आपका लिवर…

Silent Liver Disease Risk Factors: पिछले दो दशकों में हमारी जीवनशैली में आए बदलावों ने लिवर से संबंधित रोगों को एक महामारी की तरह फैला दिया है। आज के दौर में (Modern Lifestyle Disorders) के कारण केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि बच्चे भी लिवर की गंभीर समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि लिवर हमारे शरीर का वह इंजन है जो जहरीले पदार्थों को बाहर निकालता है, लेकिन हमारी लापरवाही इस इंजन को जाम कर रही है। लिवर सिरोसिस जैसी स्थितियां न केवल कष्टदायक हैं, बल्कि समय पर ध्यान न देने पर जानलेवा भी साबित हो सकती हैं।

Silent Liver Disease Risk Factors
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अन्य बीमारियों का लिवर से गहरा कनेक्शन

अक्सर लोग यह सोचते हैं कि लिवर की बीमारी केवल शराब या गलत खान-पान से होती है, लेकिन यह आधा सच है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आप (Underlying Health Conditions) जैसे पहले से मौजूद कुछ रोगों के शिकार हैं, तो आपका लिवर स्वाभाविक रूप से खतरे के निशान पर है। शरीर के अंगों का एक-दूसरे से गहरा जुड़ाव होता है, और कुछ बीमारियों की अनियंत्रित स्थिति सीधे तौर पर लिवर की कार्यक्षमता को नष्ट कर सकती है। आइए समझते हैं कि वे कौन सी स्थितियां हैं जो आपके लिवर की दुश्मन बन सकती हैं।

डायबिटीज और लिवर के बीच का खतरनाक रिश्ता

डायबिटीज को अक्सर केवल ब्लड शुगर और किडनी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह लिवर के लिए भी उतना ही घातक है। (Diabetes Complications) की वजह से समय के साथ लिवर की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। मधुमेह के रोगियों में ‘नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज’ विकसित होने की संभावना बहुत अधिक होती है। आंकड़े बताते हैं कि लिवर सिरोसिस के लगभग 90 प्रतिशत मरीजों में ग्लूकोज इंटॉलरेंस की समस्या पाई जाती है, जो यह साबित करता है कि अनियंत्रित शुगर सीधे लिवर को मौत के करीब ले जाती है।

हाई ब्लड प्रेशर: हृदय के साथ लिवर का भी दुश्मन

बढ़ा हुआ रक्तचाप केवल दिल के दौरे का कारण नहीं बनता, बल्कि यह लिवर के स्वास्थ्य को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। हमारा शरीर ‘पोर्टल वेन’ नामक एक मुख्य नस के जरिए लिवर तक रक्त पहुँचाता है। (Hypertension Impact) के कारण जब लिवर में रक्त का प्रवाह धीमा होता है, तो पोर्टल वेन पर दबाव बढ़ जाता है। इस स्थिति को ‘पोर्टल हाइपरटेंशन’ कहा जाता है, जो लिवर की नसों में तनाव पैदा कर सिरोसिस जैसी लाइलाज बीमारियों का मार्ग प्रशस्त करता है।

कोलेस्ट्रॉल का बढ़ता स्तर और फैटी लिवर का डर

हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या आज के समय में आम हो चुकी है, लेकिन यह लिवर के लिए ‘स्लो पॉइजन’ की तरह काम करती है। वैसे तो लिवर शरीर से अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को खत्म करने का काम करता है, पर जब आहार में वसा की मात्रा (Cholesterol Accumulation) की सीमा पार कर जाती है, तो लिवर खुद वसा का भंडार बन जाता है। अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल के कारण लिवर में सूजन आने लगती है, जो आगे चलकर फैटी लिवर डिजीज की जटिलताओं को इतना बढ़ा देती है कि लिवर फेलियर की नौबत आ सकती है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: अंगों की नियमित जांच है जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों को शुगर या बीपी की समस्या है, उन्हें केवल इन बीमारियों की दवा लेना ही काफी नहीं है। उन्हें डॉक्टर की सलाह पर समय-समय पर (Diagnostic Screenings) करवाते रहना चाहिए। चूंकि लिवर, किडनी और आंखें आपस में जुड़े हुए संवेदनशील अंग हैं, इसलिए एक अंग की बीमारी का दुष्प्रभाव दूसरे पर पड़ना तय है। नियमित जांच से हम लिवर की बीमारी को शुरुआती स्टेज में ही पकड़ सकते हैं, जिससे इलाज आसान हो जाता है।

पोर्टल वेन पर बढ़ता तनाव और सिरोसिस का खतरा

जब लिवर स्वस्थ नहीं होता, तो वह रक्त को सही ढंग से प्रोसेस नहीं कर पाता। इसके परिणामस्वरूप (Portal Venous Pressure) बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ दबाव न केवल लिवर को सड़ा देता है, बल्कि पेट में पानी भरने (एसाइटिस) जैसी समस्याओं को भी जन्म देता है। ब्लड प्रेशर के मरीजों को अक्सर यह पता ही नहीं चलता कि उनका बढ़ता बीपी धीरे-धीरे उनके लिवर को छलनी कर रहा है। इसलिए बीपी को कंट्रोल में रखना लिवर की लंबी उम्र के लिए अनिवार्य है।

वसायुक्त आहार और लिवर की कार्यक्षमता

हमारे खाने की मेज पर सजी तली-भुनी चीजें लिवर की सबसे बड़ी दुश्मन हैं। (Fatty Diet Risks) के कारण लिवर के चारों ओर चर्बी की एक परत जम जाती है, जिससे इसकी फिल्टर करने की शक्ति खत्म हो जाती है। यूएससी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोध बताते हैं कि बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल लिवर की मरम्मत करने वाली कोशिकाओं को ही मार देता है। अगर आप अपने लिवर को बचाना चाहते हैं, तो आहार में फाइबर बढ़ाना और सैचुरेटेड फैट को कम करना पहला कदम होना चाहिए।

बचाव के उपाय और स्वस्थ दिनचर्या का महत्व

लिवर को सुरक्षित रखने के लिए केवल दवाएं ही काफी नहीं हैं, बल्कि एक अनुशासित जीवनशैली की जरूरत है। (Preventive Healthcare) के तहत रोजाना कम से कम 30 मिनट का व्यायाम, पर्याप्त पानी का सेवन और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना बहुत जरूरी है। लिवर एक ऐसा अंग है जो खुद को पुनर्जीवित (Regenerate) कर सकता है, बशर्ते हम उसे सही पोषण और तनावमुक्त वातावरण प्रदान करें। यदि आप ऊपर बताई गई तीन बीमारियों से जूझ रहे हैं, तो आज ही सतर्क हो जाएं।

निष्कर्ष: जागरूक रहकर ही बच सकती है जान

लिवर की बीमारियां अक्सर तब सामने आती हैं जब वे अंतिम चरण में पहुँच चुकी होती हैं। इसलिए ‘प्रिवेंशन इज बेटर दैन क्योर’ के सिद्धांत को अपनाना ही बुद्धिमानी है। (Long-term Health) के लिए जरूरी है कि आप अपने शुगर, बीपी और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखें। याद रखिए, आपका लिवर आपके शरीर का चौकीदार है; अगर चौकीदार ही बीमार पड़ गया, तो पूरा शरीर बीमारियों का घर बन जाएगा। 2026 में अपनी सेहत का जिम्मा खुद उठाएं और लिवर को स्वस्थ रखने का संकल्प लें।

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