स्वास्थ्य

PerfumeHealthRisk – गर्दन पर परफ्यूम स्प्रे करना क्यों हो सकता है खतरनाक…

PerfumeHealthRisk – शरीर की दुर्गंध से बचने और खुद को तरोताजा महसूस कराने के लिए डियोड्रेंट और परफ्यूम का इस्तेमाल आज लगभग हर उम्र के लोग करते हैं। अच्छी खुशबू आत्मविश्वास बढ़ाती है और सामाजिक माहौल में सकारात्मक प्रभाव छोड़ती है। लेकिन हाल के वर्षों में इन उत्पादों में मौजूद रसायनों को लेकर कई शोध सामने आए हैं, जिनमें इनके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर सवाल उठाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रोजमर्रा की आदतों में शामिल इन उत्पादों का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना जरूरी है, खासकर तब जब इन्हें सीधे त्वचा पर स्प्रे किया जाता है।

परफ्यूम में छिपे रसायनों पर उठे सवाल

विभिन्न अध्ययनों में यह बताया गया है कि परफ्यूम और डियोड्रेंट की खुशबू लंबे समय तक टिकाने के लिए कई तरह के सिंथेटिक रसायनों का उपयोग किया जाता है। कुछ शोध रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इन उत्पादों में हजारों प्रकार के रसायन मिलाए जा सकते हैं, जिनमें से सभी का विवरण लेबल पर स्पष्ट रूप से नहीं दिया जाता।

ब्रेस्ट कैंसर प्रिवेंशन से जुड़े एक अध्ययन में यह चिंता जताई गई थी कि कुछ सुगंधित उत्पादों में ऐसे तत्व मौजूद हो सकते हैं जो त्वचा के लिए हानिकारक हों। फ्थेलेट्स, मस्क यौगिक और फॉर्मलडिहाइड जैसे रसायनों का उल्लेख शोध में किया गया है। कुछ देशों में फ्थेलेट्स के उपयोग पर प्रतिबंध भी लगाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन रसायनों के लंबे संपर्क से त्वचा संबंधी समस्याएं, तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव और अन्य स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं।

गर्दन पर स्प्रे करना क्यों माना जाता है जोखिम भरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों की त्वचा की संरचना अलग होती है। गर्दन की त्वचा अपेक्षाकृत पतली और अधिक संवेदनशील होती है। यही कारण है कि जब परफ्यूम सीधे इस हिस्से पर स्प्रे किया जाता है, तो उसमें मौजूद रसायन त्वचा के जरिए तेजी से अवशोषित हो सकते हैं।

बार-बार उपयोग से कुछ लोगों में जलन, खुजली, सूखापन या पिगमेंटेशन जैसी समस्याएं देखी गई हैं। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में एलर्जी की आशंका भी अधिक रहती है। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि कुछ सुगंधित उत्पादों में पाए जाने वाले तत्व एंडोक्राइन डिसरप्टर की तरह काम कर सकते हैं, जो शरीर के हार्मोन सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति पर इसका असर समान नहीं होता, लेकिन सावधानी बरतना जरूरी माना जाता है।

थायरॉइड फंक्शन पर संभावित असर

गर्दन के क्षेत्र में थायरॉइड ग्रंथि स्थित होती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। कुछ विशेषज्ञों का मत है कि यदि लंबे समय तक रसायनों के संपर्क में रहा जाए, तो यह थायरॉइड के कार्य पर असर डाल सकता है।

गर्दन की त्वचा अधिक वैस्कुलराइज्ड मानी जाती है, यानी यहां रक्त प्रवाह अधिक होता है। इस कारण से स्प्रे किए गए रसायन रक्त में अपेक्षाकृत जल्दी पहुंच सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी और व्यापक शोध की आवश्यकता बताई जाती है, फिर भी डॉक्टर सलाह देते हैं कि परफ्यूम को सीधे गर्दन पर लगाने से बचना बेहतर हो सकता है, विशेषकर यदि पहले से थायरॉइड या हार्मोन से जुड़ी समस्या हो।

कैंसर के खतरे को लेकर क्या कहती हैं रिपोर्ट्स

कुछ चिकित्सा पत्रिकाओं में प्रकाशित रिपोर्टों में डियोड्रेंट में पाए जाने वाले एल्यूमीनियम यौगिकों और पैराबीन्स का उल्लेख किया गया है। इन यौगिकों को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। शोधकर्ताओं का कहना है कि सामान्य मात्रा में इनका उपयोग सीधे तौर पर कैंसर का कारण साबित नहीं हुआ है, लेकिन संवेदनशील व्यक्तियों में लंबे समय तक संपर्क जोखिम बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों की राय है कि यदि किसी व्यक्ति को त्वचा पर बार-बार जलन या असामान्य लक्षण दिखाई दें तो उसे ऐसे उत्पादों का उपयोग बंद कर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

सुरक्षित उपयोग के लिए क्या करें

डॉक्टर सलाह देते हैं कि परफ्यूम को सीधे त्वचा की बजाय कपड़ों पर हल्के से स्प्रे करना अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प हो सकता है। इसके अलावा उत्पाद खरीदते समय लेबल पढ़ना और विश्वसनीय ब्रांड का चयन करना भी महत्वपूर्ण है। जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है या जिन्हें हार्मोन संबंधी समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

सुगंधित उत्पादों का उपयोग पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है, लेकिन जागरूकता और संतुलित उपयोग से संभावित जोखिमों को कम किया जा सकता है।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.