Obesity – बढ़ते मोटापे से जुड़ी बीमारियों का बढ़ता खतरा
Obesity – देश में बढ़ता मोटापा अब केवल दिखावे या शरीर के आकार का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। शहरी हो या ग्रामीण इलाका, हर उम्र के लोग अतिरिक्त वजन की समस्या से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मोटापा कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकता है। शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे ऐसे बदलाव लाती है, जिनका असर दिल, दिमाग, लिवर और जोड़ों तक पर पड़ता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ समय रहते वजन नियंत्रण पर जोर दे रहे हैं।

हृदय रोग का बढ़ता जोखिम
अधिक वजन का सबसे बड़ा असर हृदय पर पड़ता है। जब शरीर में चर्बी बढ़ती है, तो रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी बढ़ सकता है। इससे धमनियों की भीतरी दीवारों पर वसा जमने लगती है, जो आगे चलकर ब्लॉकेज का कारण बन सकती है। ऐसी स्थिति में दिल तक रक्त पहुंचने में बाधा आती है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। चिकित्सकों के अनुसार, मोटापे से ग्रस्त लोगों में हृदयाघात और स्ट्रोक की आशंका सामान्य वजन वाले लोगों की तुलना में कहीं अधिक होती है। नियमित जांच और संतुलित जीवनशैली अपनाकर इस जोखिम को कम किया जा सकता है।
ब्लड शुगर और डायबिटीज का संबंध
मोटापा और मधुमेह के बीच गहरा संबंध पाया गया है। शरीर पर जमा अतिरिक्त वसा इंसुलिन के प्रभाव को कमजोर कर देती है, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। जब ऐसा होता है, तो रक्त में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर टाइप-2 डायबिटीज विकसित हो सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पेट के आसपास की चर्बी इस जोखिम को और बढ़ा देती है। समय रहते वजन कम करने और खानपान में सुधार लाने से मधुमेह के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है।
उच्च रक्तचाप और अंगों पर दबाव
अधिक वजन शरीर के रक्त संचार तंत्र पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इससे रक्तचाप बढ़ने की संभावना रहती है। हाई ब्लड प्रेशर न केवल हृदय के लिए हानिकारक है, बल्कि यह किडनी और आंखों पर भी असर डाल सकता है। लंबे समय तक अनियंत्रित रक्तचाप रहने से गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वजन घटाने से कई मामलों में रक्तचाप स्वाभाविक रूप से नियंत्रित होने लगता है। इसलिए नियमित मॉनिटरिंग और स्वस्थ दिनचर्या बेहद जरूरी है।
लिवर पर असर और फैटी लिवर की समस्या
मोटापे का प्रभाव लिवर पर भी पड़ता है। शरीर में अतिरिक्त चर्बी लिवर की कोशिकाओं में जमा होने लगती है, जिससे नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर रोग की स्थिति बन सकती है। शुरुआती दौर में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन समय के साथ यह लिवर में सूजन और क्षति का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जीवनशैली में सुधार न किया जाए तो यह स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करती है।
जोड़ों में दर्द और चलने-फिरने में कठिनाई
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापा किसी एक कारण से नहीं बढ़ता, बल्कि खानपान, शारीरिक निष्क्रियता और अनियमित दिनचर्या इसका प्रमुख कारण हैं। संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद वजन नियंत्रण की बुनियाद हैं। तली-भुनी चीजों और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों से दूरी बनाकर, हरी सब्जियां और फलों को आहार में शामिल करना लाभकारी हो सकता है। साथ ही, रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि शरीर को सक्रिय रखती है। समय पर किए गए छोटे-छोटे बदलाव आगे चलकर बड़ी बीमारियों से बचाव में मददगार साबित हो सकते हैं।



