MosquitoControl – कॉइल और अगरबत्ती के धुएं पर उठे स्वास्थ्य सवाल
MosquitoControl – मच्छरों से बचाव के लिए घरों में कॉइल, अगरबत्ती या इलेक्ट्रिक वेपराइज़र जलाना आम बात है। कुछ ही मिनटों में मच्छर कम हो जाते हैं और लोगों को राहत मिलती है। लेकिन हाल के वर्षों में विशेषज्ञों ने इन उपायों के दूसरे पहलू की ओर भी ध्यान दिलाया है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से बचने के प्रयास में हम जिन साधनों का इस्तेमाल करते हैं, क्या वे खुद सेहत के लिए खतरा बन सकते हैं? इसी सवाल पर कई शोध सामने आए हैं, जिनमें इन उत्पादों से निकलने वाले धुएं को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं।

शोध में सामने आए तथ्य
ताइवान और चीन में किए गए अध्ययनों में पाया गया कि मच्छर भगाने वाली कॉइल और अगरबत्ती से निकलने वाले धुएं में ऐसे तत्व मौजूद हो सकते हैं, जिन्हें carcinogens की श्रेणी में रखा जाता है। ये तत्व लंबे समय तक संपर्क में रहने पर स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि एक कॉइल के जलने से निकलने वाला धुआं काफी मात्रा में सूक्ष्म कण छोड़ता है, जो बंद कमरे में जमा होकर सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।
धुएं में मौजूद हानिकारक तत्व
विशेषज्ञों के अनुसार कई मच्छर अगरबत्तियों में भारी धातुओं जैसे लेड, आयरन और मैंगनीज के अंश पाए जा सकते हैं। जब ये जलते हैं तो इनसे निकलने वाला धुआं फेफड़ों के लिए हानिकारक हो सकता है। खासतौर पर अगर कमरा बंद हो और वेंटिलेशन पर्याप्त न हो, तो धुआं अधिक देर तक हवा में बना रहता है। ऐसे में लंबे समय तक इसका संपर्क श्वसन तंत्र पर दबाव डाल सकता है।
अस्थमा और सांस संबंधी समस्याएं
डॉक्टरों का मानना है कि जिन लोगों को पहले से अस्थमा या एलर्जी की समस्या है, उन्हें ऐसे धुएं से अधिक परेशानी हो सकती है। लगातार संपर्क में रहने से खांसी, सांस फूलना या सीने में जकड़न जैसी शिकायतें बढ़ सकती हैं। सूक्ष्म कण फेफड़ों में जमा होकर श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में जोखिम और बढ़ जाता है।
त्वचा और एलर्जी पर प्रभाव
कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया है कि लगातार धुएं के संपर्क में रहने से त्वचा पर असर पड़ सकता है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में जलन या रंग में बदलाव जैसी समस्याएं देखी गई हैं। वहीं एलर्जी प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों को धुएं के कारण बार-बार सर्दी, छींक या आंखों में जलन की शिकायत हो सकती है।
बच्चों के लिए विशेष सावधानी जरूरी
बच्चों का श्वसन तंत्र अभी विकसित हो रहा होता है, इसलिए वे प्रदूषित हवा के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। बंद कमरे में कॉइल या अगरबत्ती जलाने से निकलने वाला धुआं उनके फेफड़ों पर असर डाल सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि इनका उपयोग करना जरूरी हो तो कमरे में पर्याप्त हवा का आवागमन सुनिश्चित किया जाए।
सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ते कदम
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मच्छरों से बचाव के लिए प्राकृतिक उपाय अपनाने की सलाह देते हैं। नीम की सूखी पत्तियों को नियंत्रित तरीके से जलाना, तुलसी या गेंदा जैसे पौधे घर के आसपास लगाना और घर में पानी जमा न होने देना प्रभावी कदम हो सकते हैं। इसके अलावा मच्छरदानी का उपयोग और खिड़कियों पर जाली लगाना भी सुरक्षित उपाय माने जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मच्छरों से बचाव जरूरी है, लेकिन इसके लिए अपनाए जाने वाले तरीकों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। पर्याप्त वेंटिलेशन और सीमित उपयोग से संभावित जोखिम को कम किया जा सकता है।



