Hormone Health – महिलाओं के लिए 10 असरदार आयुर्वेदिक उपाय
Hormone Health – महिलाओं में हार्मोन असंतुलन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। पीसीओएस, अनियमित पीरियड्स, थायराइड गड़बड़ी, त्वचा संबंधी दिक्कतें और पाचन संबंधी परेशानियां अक्सर हार्मोनल बदलाव से जुड़ी होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार और पारंपरिक उपायों के जरिए इन स्थितियों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है। आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर दीक्षा भावसार ने महिलाओं के लिए कुछ प्राकृतिक चीजों को नियमित आहार में शामिल करने की सलाह दी है, जिन्हें हार्मोन संतुलन में सहायक माना जाता है।

शतावरी को माना जाता है सहायक
आयुर्वेद में शतावरी को महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह एस्ट्रोजन संतुलन में मदद कर सकती है और पीसीओएस व मासिक धर्म संबंधी परेशानियों में सहायक हो सकती है। आधा चम्मच शतावरी पाउडर गुनगुने दूध के साथ लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि किसी भी जड़ी-बूटी का सेवन शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
तिल से मिल सकता है प्रजनन तंत्र को समर्थन
तिल के बीजों को प्रोजेस्टेरोन समर्थन से जोड़ा जाता है। पोषण विशेषज्ञ बताते हैं कि हल्का भुना हुआ तिल रोजाना एक चम्मच लेने से ओव्यूलेशन और गर्भाशय की मजबूती में मदद मिल सकती है। तिल कैल्शियम और हेल्दी फैट का भी अच्छा स्रोत है, जो समग्र स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है।
घी पाचन और थायराइड के लिए उपयोगी
भारतीय रसोई में घी का स्थान खास है। आयुर्वेद के अनुसार सीमित मात्रा में गाय का घी हार्मोन सिग्नलिंग को समर्थन दे सकता है। यह पाचन को बेहतर बनाने और शरीर की सूखापन कम करने में सहायक माना जाता है। रोजाना एक चम्मच घी को भोजन में शामिल किया जा सकता है।
अश्वगंधा से तनाव में कमी
तनाव हार्मोन असंतुलन का बड़ा कारण माना जाता है। अश्वगंधा को कोर्टिसोल कम करने और नींद सुधारने में सहायक बताया गया है। आधा चम्मच अश्वगंधा पाउडर गुनगुने दूध के साथ रात में लेने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पीसीओएस और थायराइड सपोर्ट में भी मददगार हो सकता है।
खजूर से ऊर्जा और पोषण
रातभर भिगोए गए दो से तीन खजूर सुबह खाने से शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा मिलती है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से यह कमजोरी दूर करने और प्रजनन क्षमता को समर्थन देने में सहायक माने जाते हैं।
मेथी दाना और इंसुलिन संतुलन
भीगा हुआ मेथी दाना सुबह लेने से इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार की संभावना बताई जाती है। इसे ओव्यूलेशन समर्थन और त्वचा संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी माना गया है।
नारियल पानी से ठंडक और त्वचा लाभ
ताजा नारियल पानी शरीर की अतिरिक्त गर्मी कम करने में मदद कर सकता है। यह त्वचा की गुणवत्ता सुधारने और हाइड्रेशन बनाए रखने में सहायक है।
अलसी से प्रीमेंस्ट्रुअल लक्षणों में राहत
भुनी हुई अलसी का पाउडर एक चम्मच प्रतिदिन लेने से एस्ट्रोजन संतुलन और प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम में कमी की बात कही जाती है। इसमें मौजूद ओमेगा थ्री फैटी एसिड समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं।
आंवला और प्रतिरक्षा समर्थन
आंवला विटामिन सी का अच्छा स्रोत है। एक चम्मच आंवला पाउडर शहद के साथ लेने से थायराइड सपोर्ट और प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
मोरिंगा और मेटाबॉलिज्म
मोरिंगा पाउडर को इंसुलिन संतुलन और मेटाबॉलिज्म सुधार से जोड़ा जाता है। आधा चम्मच मोरिंगा पाउडर भोजन में मिलाकर लिया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन उपायों को अपनाने से पहले व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देना आवश्यक है।



