स्वास्थ्य

HeatStroke – सिर्फ धूप नहीं, ये आदतें भी बढ़ाती हैं लू का खतरा

HeatStroke – गर्मियों के दौरान हीट स्ट्रोक या लू लगना एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में सामने आता है। आम धारणा यह है कि केवल तेज धूप में लंबे समय तक रहने से ही लू लगती है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। शरीर का तापमान जब सामान्य स्तर से काफी ऊपर पहुंच जाता है और उसे नियंत्रित करने की क्षमता कम हो जाती है, तब हीट स्ट्रोक जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

बढ़ती गर्मी और उमस के बीच छोटी-छोटी लापरवाहियां भी स्वास्थ्य पर बड़ा असर डाल सकती हैं। ऐसे में इसके लक्षणों और कारणों को समय रहते समझना बेहद जरूरी है।

लू लगने के संकेतों को पहचानना है जरूरी

हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आमतौर पर तेज बुखार, सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी जैसा महसूस होना और अत्यधिक कमजोरी इसके प्रमुख संकेत माने जाते हैं। कई मामलों में त्वचा गर्म और सूखी हो सकती है तथा पसीना आना भी बंद हो जाता है।

स्थिति गंभीर होने पर व्यक्ति भ्रमित महसूस कर सकता है, उसकी धड़कन तेज हो सकती है और कुछ मामलों में बेहोशी भी आ सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत ठंडी जगह पर ले जाकर प्राथमिक सहायता देना और चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक होता है।

शरीर में पानी की कमी बढ़ाती है जोखिम

गर्मी के मौसम में शरीर से लगातार पसीना निकलता है, जिससे पानी और आवश्यक खनिज तत्वों की कमी हो सकती है। यदि पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ नहीं लिए जाएं तो शरीर का तापमान नियंत्रित रखना मुश्किल हो जाता है।

डिहाइड्रेशन की स्थिति में थकान, सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं। लंबे समय तक पानी की कमी रहने पर हीट स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसलिए नियमित अंतराल पर पानी पीना और शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी माना जाता है।

खानपान की गलतियां भी बन सकती हैं वजह

गर्मियों में अत्यधिक मसालेदार, तैलीय और भारी भोजन का सेवन शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थों को पचाने में अधिक ऊर्जा खर्च होती है, जिससे शरीर के भीतर गर्मी बढ़ सकती है।

विशेषज्ञ इस मौसम में हल्का, ताजा और संतुलित भोजन लेने की सलाह देते हैं। मौसमी फल, सलाद और तरल पदार्थों का सेवन शरीर को ठंडा रखने में मदद कर सकता है।

गर्म वातावरण में अधिक समय बिताना खतरनाक

केवल सीधी धूप ही नहीं, बल्कि अत्यधिक गर्म और बंद स्थानों में लंबे समय तक रहना भी जोखिम बढ़ा सकता है। यदि शरीर को पर्याप्त ठंडक नहीं मिलती, तो उसका तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।

कार्यालय, फैक्ट्री, वाहन या खराब वेंटिलेशन वाले कमरों में लंबे समय तक रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। नियमित अंतराल पर आराम और ठंडे वातावरण में समय बिताना उपयोगी हो सकता है।

कपड़ों का चुनाव भी करता है असर

गर्मी में पहने जाने वाले कपड़े शरीर के तापमान को प्रभावित कर सकते हैं। बहुत तंग या सिंथेटिक कपड़े पसीने के वाष्पीकरण में बाधा डालते हैं, जिससे शरीर की प्राकृतिक ठंडक प्रक्रिया प्रभावित होती है।

विशेषज्ञ ढीले और सूती कपड़े पहनने की सलाह देते हैं। ऐसे कपड़े हवा के प्रवाह को बेहतर बनाते हैं और शरीर को अपेक्षाकृत ठंडा रखने में मदद करते हैं।

अत्यधिक शारीरिक मेहनत से भी बढ़ता है खतरा

भीषण गर्मी में लगातार मेहनत करना या बिना पर्याप्त आराम के व्यायाम करना शरीर को तेजी से गर्म कर सकता है। जब शरीर को पर्याप्त विश्राम नहीं मिलता, तो उसकी तापमान नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

विशेष रूप से दोपहर के समय भारी शारीरिक गतिविधियों से बचना चाहिए। यदि व्यायाम करना आवश्यक हो तो सुबह या शाम का समय अधिक उपयुक्त माना जाता है।

बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां

विशेषज्ञों के अनुसार गर्मियों में पर्याप्त पानी पीना, नारियल पानी या ओआरएस जैसे पेय लेना और दोपहर की तेज धूप से बचना उपयोगी उपाय हैं। बाहर निकलते समय टोपी, छाता या सिर को ढकने वाले साधनों का उपयोग भी मददगार साबित हो सकता है।

इसके साथ ही हल्के कपड़े पहनना, संतुलित भोजन करना और शरीर को पर्याप्त आराम देना हीट स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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