स्वास्थ्य

Heart Attack Survival: घर में अकेले हों और आ जाए हार्ट अटैक, तो जीवन बचाने के लिए तुरंत उठाएं ये जरूरी कदम

Heart Attack Survival: भारत में हृदय रोगों की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, युवाओं में हार्ट अटैक के मामलों में 25 से 30 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। कई बार यह स्थिति इतनी अचानक आती है कि व्यक्ति को संभलने का मौका तक नहीं मिलता। विशेष रूप से उन लोगों के लिए चुनौती और बढ़ जाती है जो घर में अकेले होते हैं। समय पर सहायता न मिल पाना अक्सर जानलेवा साबित होता है। अमेरिका के प्रसिद्ध कार्डियोवैस्कुलर सर्जन डॉ. जर्मी लंदन, जिनके पास 25 वर्षों का अनुभव है, ने कुछ ऐसे जीवनरक्षक उपाय साझा किए हैं जिन्हें अपनाकर आप मेडिकल हेल्प पहुंचने तक खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

Heart Attack Survival: घर में अकेले हों और आ जाए हार्ट अटैक, तो जीवन बचाने के लिए तुरंत उठाएं ये जरूरी कदम
Heart Attack Survival: घर में अकेले हों और आ जाए हार्ट अटैक, तो जीवन बचाने के लिए तुरंत उठाएं ये जरूरी कदम
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पैनिक न करें और इमरजेंसी सेवा को सूचित करें

हार्ट अटैक के दौरान घबराहट होना स्वाभाविक है, लेकिन पैनिक करने से दिल की धड़कन और रक्तचाप अनियंत्रित हो सकते हैं, जो स्थिति को और बिगाड़ देता है। डॉ. जर्मी लंदन के अनुसार, जैसे ही आपको सीने में तेज दर्द, भारीपन या असहजता महसूस हो, सबसे पहला काम इमरजेंसी नंबर पर कॉल करना होना चाहिए। अपनी लोकेशन स्पष्ट बताएं और स्थिति की गंभीरता से अवगत कराएं। याद रखें, शुरुआती कुछ मिनट ‘गोल्डन ऑवर’ कहलाते हैं, जिसमें मिली मदद जान बचा सकती है।

एस्पिरिन का सही तरीके से सेवन करें

डॉक्टर बताते हैं कि हार्ट अटैक की स्थिति में एस्पिरिन (Aspirin) एक जीवनरक्षक दवा साबित हो सकती है। लेकिन इसे लेने का तरीका बहुत महत्वपूर्ण है। एस्पिरिन को पानी के साथ निगलने के बजाय इसे दांतों से चबाकर खाना चाहिए। चबाने से यह दवा खून में जल्दी घुलती है और रक्त के थक्कों (Blood Clots) को बनने से रोकने में मदद करती है। हालांकि यह दवा हार्ट अटैक को पूरी तरह ठीक नहीं करती, लेकिन यह हृदय को होने वाले नुकसान की गति को काफी हद तक धीमा कर देती है।

घर के रास्ते आसान बनाएं और लाइट जलाएं

यदि आप घर में अकेले हैं, तो आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि राहतकर्मी या पड़ोसी आप तक बिना किसी देरी के पहुंच सकें। डॉ. लंदन सलाह देते हैं कि कॉल करने के बाद तुरंत अपने घर का मुख्य दरवाजा खोल दें या उसे अनलॉक कर दें। साथ ही, घर की सभी लाइटें जला दें ताकि बाहर से आने वाले लोगों को पता चल सके कि मदद की जरूरत कहां है। अगर दरवाजा बंद रहेगा, तो इमरजेंसी टीम को उसे तोड़ने में समय लगेगा, जो मरीज के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

बैठने या लेटने की सही मुद्रा अपनाएं

हार्ट अटैक के दौरान चक्कर आना या बेहोश होना एक सामान्य लक्षण है। अचानक बेहोश होकर गिरने से सिर में गंभीर चोट लग सकती है, जो स्थिति को और अधिक जटिल बना देती है। इसलिए, जैसे ही आपको लगे कि तबीयत बिगड़ रही है, तुरंत जमीन पर बैठ जाएं या सुरक्षित तरीके से लेट जाएं। दीवार का सहारा लेकर बैठना सबसे बेहतर माना जाता है क्योंकि इससे हृदय पर दबाव कम होता है और गिरने का डर भी नहीं रहता।

अपनों को कॉल कर संपर्क बनाए रखें

इमरजेंसी सेवाओं को फोन करने के बाद, अपने किसी करीबी दोस्त या परिवार के सदस्य को तुरंत सूचित करें। संभव हो तो उनसे बात करते रहें और फोन काटें नहीं। इससे आपकी लोकेशन और स्वास्थ्य की स्थिति का अपडेट उन्हें मिलता रहेगा। अगर आप बात करने की स्थिति में नहीं हैं, तो बस फोन ऑन रखें ताकि दूसरी तरफ मौजूद व्यक्ति आपकी आवाज या सांसों से आपकी स्थिति का अंदाजा लगा सके। याद रखें, जागरूकता और सही समय पर लिया गया फैसला ही इस गंभीर स्थिति में आपकी सबसे बड़ी ताकत है।

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