स्वास्थ्य

HealthyIftar – रमजान में संतुलित इफ्तार से सेहत रहेगी दुरुस्त

HealthyIftar – रमजान के महीने में पूरे दिन रोजा रखने के बाद इफ्तार केवल भूख मिटाने का समय नहीं, बल्कि शरीर को दोबारा संतुलित करने का अवसर होता है। लंबे उपवास के बाद शरीर में पानी, नमक और ऊर्जा की कमी हो जाती है। ऐसे में खानपान का तरीका बेहद अहम हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इफ्तार सोच-समझकर किया जाए तो यह न सिर्फ थकान दूर करता है, बल्कि पूरे महीने शरीर को स्वस्थ रखने में मददगार साबित हो सकता है।

इफ्तार को ‘इनाम’ नहीं, जिम्मेदारी की तरह देखें

अक्सर लोग पूरे दिन के उपवास के बाद इफ्तार को एक तरह का इनाम मान लेते हैं और तले-भुने व मीठे व्यंजनों का अधिक सेवन कर बैठते हैं। डॉक्टर मल्हार गणला ने हाल ही में साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि यह सोच बदलने की जरूरत है। उनके अनुसार इफ्तार का मकसद स्वाद से ज्यादा शरीर की जरूरतों को पूरा करना होना चाहिए। गलत खानपान से एसिडिटी, सिरदर्द, भारीपन और अगले दिन सुस्ती जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

शुरुआत सही तरीके से करें

डॉक्टर गणला सलाह देते हैं कि रोजा खोलते समय सबसे पहले शरीर को पानी और नमक की जरूरत होती है। गुनगुना पानी, नींबू पानी या हल्का सूप बेहतर विकल्प हो सकते हैं। बहुत ठंडा पानी अचानक पेट में एसिडिटी बढ़ा सकता है, जिससे असहजता और सिरदर्द हो सकता है। इसलिए शुरुआत हल्के और संतुलित पेय से करना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

मुख्य भोजन से पहले छोटा विराम

विशेषज्ञों के अनुसार पानी और नमक लेने के बाद 10 से 15 मिनट का अंतराल जरूरी है। यह छोटा सा ब्रेक शरीर को संकेत देता है कि भोजन आ रहा है और इससे ओवरईटिंग की संभावना कम हो जाती है। अगर इस चरण को नजरअंदाज कर सीधे भारी भोजन शुरू कर दिया जाए, तो कैलोरी का सेवन अनजाने में काफी बढ़ सकता है।

इफ्तार की थाली में क्या हो शामिल

ब्रेक के बाद भोजन संतुलित होना चाहिए। साफ और हल्का प्रोटीन जैसे ग्रिल्ड चिकन, उबले अंडे या दाल को शामिल किया जा सकता है। इसके साथ साधारण कार्बोहाइड्रेट जैसे चावल या रोटी उपयुक्त माने जाते हैं। तले हुए समोसे, पकौड़े या अत्यधिक नमकीन स्नैक्स से बचना बेहतर है। सब्जियां और सलाद शरीर को फाइबर और जरूरी पोषक तत्व प्रदान करते हैं।

यदि कोई व्यक्ति इफ्तार के बाद हल्का व्यायाम करता है, तो वह प्रोटीन शेक या ओट्स जैसे विकल्प भी चुन सकता है। उद्देश्य पेट भरना नहीं, बल्कि शरीर को संतुलित ऊर्जा देना होना चाहिए।

मीठा सीमित मात्रा में

रमजान में सेवई, खीर या अन्य मिठाइयों का आकर्षण स्वाभाविक है। हालांकि विशेषज्ञों का सुझाव है कि मीठा स्वाद के लिए सीमित मात्रा में लिया जाए। इसे भोजन के अंत में और कम मात्रा में शामिल करना बेहतर रहता है। अत्यधिक मीठे पेय या फलों के रस अचानक शुगर स्तर बढ़ा सकते हैं, जिससे शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

संतुलन ही है कुंजी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और हल्की शारीरिक गतिविधि रमजान के दौरान शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इफ्तार का सही क्रम और समझदारी से चुना गया भोजन पूरे महीने ऊर्जा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

रोजा केवल आत्मिक अनुशासन नहीं, बल्कि शरीर के प्रति सजग रहने का भी समय है। यदि खानपान का ध्यान रखा जाए तो यह अवधि स्वास्थ्य के लिए लाभकारी भी साबित हो सकती है।

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