HealthAlert – अचानक धुंधली नजर को न करें नजरअंदाज…
HealthAlert – अक्सर जब आंखों के सामने धुंधलापन छा जाता है तो लोग इसे सामान्य थकान, देर तक मोबाइल देखने या उम्र बढ़ने का असर मान लेते हैं। कई बार बिना जांच कराए सीधे चश्मा बनवा लेने का फैसला भी कर लिया जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार नजर का धुंधला होना सिर्फ आंखों की कमजोरी का संकेत नहीं होता। यह शरीर के भीतर चल रही किसी गंभीर समस्या की शुरुआती चेतावनी भी हो सकती है। आंखें सीधे तौर पर मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी होती हैं, इसलिए शरीर में होने वाले कई बदलावों का असर सबसे पहले दृष्टि पर दिखाई देता है। अचानक धुंधला दिखना या एक आंख से कम नजर आना ऐसी स्थिति है, जिसे हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है।

डायबिटीज से जुड़ी आंखों की जटिलताएं
डॉक्टर बताते हैं कि अनियंत्रित मधुमेह धुंधली नजर का एक बड़ा कारण है। जब खून में शुगर का स्तर बढ़ जाता है, तो इसका असर आंखों के लेंस पर पड़ता है। लेंस के आसपास तरल जमा होने लगता है, जिससे चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं। लंबे समय तक शुगर नियंत्रण में न रहने पर रेटिना की सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं कमजोर और क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। इस स्थिति को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन समय रहते इलाज न मिले तो यह स्थायी दृष्टि हानि तक पहुंच सकता है। नियमित ब्लड शुगर जांच और समय पर उपचार से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर और दृष्टि पर असर
उच्च रक्तचाप केवल हृदय रोग का कारण नहीं बनता, बल्कि यह आंखों की नसों पर भी दबाव डालता है। अचानक धुंधलापन या नजर का कुछ समय के लिए चले जाना स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। जब मस्तिष्क के उस हिस्से में रक्त प्रवाह बाधित होता है जो देखने की क्षमता को नियंत्रित करता है, तो व्यक्ति को धुंधला या दोहरा दिखने लगता है। ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। देरी होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जिन लोगों को हाई बीपी है, वे नियमित रूप से अपनी आंखों की जांच भी कराएं ताकि किसी भी बदलाव का समय रहते पता चल सके।
मस्तिष्क संबंधी समस्याएं और चेतावनी संकेत
कभी-कभी धुंधली नजर मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर समस्याओं की ओर भी इशारा करती है। दिमाग में असामान्य वृद्धि या ट्यूमर होने पर आंखों की नसों पर दबाव बन सकता है। इसके साथ तेज सिरदर्द, चक्कर आना, उलझन या उल्टी जैसा महसूस होना भी शामिल हो सकता है। इसी तरह कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां, जैसे मल्टीपल स्केलेरोसिस, भी दृष्टि को प्रभावित कर सकती हैं। इन स्थितियों में सिर्फ चश्मा बदलना समाधान नहीं है, बल्कि मूल कारण की पहचान और इलाज जरूरी होता है। अगर नजर धुंधली होने के साथ अन्य असामान्य लक्षण भी हों, तो न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना उचित रहता है।
जीवनशैली और नियमित जांच की अहमियत
विशेषज्ञों का मानना है कि आंखों की सेहत को बनाए रखने के लिए संतुलित जीवनशैली बेहद जरूरी है। नियमित व्यायाम, नियंत्रित आहार और पर्याप्त नींद शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। भोजन में विटामिन ए, ओमेगा-3 फैटी एसिड और हरी सब्जियों का समावेश आंखों के लिए लाभकारी माना जाता है। साथ ही, स्क्रीन टाइम सीमित रखना और समय-समय पर आंखों को आराम देना भी जरूरी है। अगर धुंधलेपन के साथ आंखों में दर्द, लाली या चमक दिखाई दे, तो तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। नियमित आंखों की जांच, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की निगरानी कई गंभीर बीमारियों से बचाव में मदद कर सकती है।
धुंधली नजर को साधारण समस्या मानकर टालना समझदारी नहीं है। यह शरीर की ओर से मिलने वाला संकेत भी हो सकता है कि भीतर कुछ ठीक नहीं चल रहा। समय पर जांच और जागरूकता ही आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।



