G6PDDeficiency – यहाँ मौजूद है लाल रक्त कोशिकाओं के नुकसान का छिपा जोखिम
G6PDDeficiency – शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाने का जिम्मा रक्त का होता है। यदि लाल रक्त कोशिकाएं स्वस्थ न रहें तो पूरा शरीर प्रभावित हो सकता है। ऐसी ही एक स्थिति है G6PD deficiency, जिसके बारे में जागरूक रहना जरूरी है, क्योंकि यह कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के भी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।

G6PD यानी ग्लूकोज-6-फॉस्फेट डिहाइड्रोजनेज एक एंजाइम है, जो लाल रक्त कोशिकाओं को क्षति से बचाने में मदद करता है। जब शरीर में इस एंजाइम की कमी होती है, तो रेड ब्लड सेल्स जल्दी टूटने लगती हैं। इस प्रक्रिया को हीमोलिसिस कहा जाता है, जो आगे चलकर एनीमिया का कारण बन सकती है।
कितनी आम है यह समस्या?
मेडिकल आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में करोड़ों लोग इस जेनेटिक स्थिति से प्रभावित हैं। कई मामलों में मरीज को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि उसे यह कमी है, क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में लक्षण सामने नहीं आते।
यह समस्या वंशानुगत होती है और अक्सर पुरुषों में ज्यादा पाई जाती है। महिलाओं में भी यह हो सकती है, लेकिन तुलनात्मक रूप से जोखिम कम माना जाता है।
कब बढ़ता है खतरा?
विशेषज्ञ बताते हैं कि G6PD deficiency तब गंभीर रूप लेती है जब कोई बाहरी ट्रिगर लाल रक्त कोशिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालता है। कुछ दवाएं, संक्रमण या विशेष खाद्य पदार्थ इस प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं।
एंटीबायोटिक्स, मलेरिया की कुछ दवाएं और दर्द निवारक दवाएं जोखिम बढ़ा सकती हैं। संक्रमण जैसे हेपेटाइटिस, टाइफाइड या निमोनिया भी स्थिति को बिगाड़ सकते हैं। कुछ मामलों में फवा बीन्स का सेवन भी हीमोलिटिक एनीमिया को ट्रिगर कर सकता है।
लक्षण कैसे पहचानें?
जब लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से टूटने लगती हैं, तो शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है। इसके कारण थकान, कमजोरी और सांस फूलना जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
दिल की धड़कन तेज होना, त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया), और पेशाब का गहरा रंग भी संकेत हो सकते हैं। यदि लक्षण अचानक और तीव्र रूप में सामने आएं, तो इसे हीमोलिटिक क्राइसिस कहा जाता है, जिसमें तुरंत चिकित्सा सहायता आवश्यक होती है।
नवजात शिशुओं में यह स्थिति गंभीर पीलिया का कारण बन सकती है, इसलिए शुरुआती जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।
जांच और प्रबंधन
यदि किसी व्यक्ति का CBC टेस्ट बार-बार कम ब्लड काउंट दिखाए, तो डॉक्टर G6PD स्तर की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। यह एक विशेष रक्त परीक्षण के माध्यम से पता लगाया जाता है।
इस कमी का स्थायी इलाज फिलहाल उपलब्ध नहीं है, क्योंकि यह जेनेटिक स्थिति है। हालांकि, ट्रिगर से बचाव कर जोखिम को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। जिन लोगों को बार-बार पीलिया या एनीमिया की समस्या होती है, उन्हें नियमित चिकित्सकीय निगरानी में रहना चाहिए।
सावधानी ही सुरक्षा
G6PD deficiency वाले अधिकांश लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं, बशर्ते वे जोखिम कारकों से सावधान रहें। किसी भी नई दवा के सेवन से पहले डॉक्टर को अपनी स्थिति के बारे में बताना जरूरी है।
समय पर जांच और जागरूकता से इस स्थिति के कारण होने वाली जटिलताओं को रोका जा सकता है।



