स्वास्थ्य

Fatty Liver: खराब लाइफस्टाइल से बढ़ रहा है फैटी लिवर का खतरा, बिना शराब पिए भी लिवर हो रहा है बीमार

Fatty Liver: आज के दौर में बदलती जीवनशैली और खान-पान की गलत आदतों ने स्वास्थ्य के सामने कई गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इनमें सबसे प्रमुख समस्या ‘फैटी लिवर’ के रूप में उभरकर सामने आ रही है। हालिया आंकड़ों और विशेषज्ञों की राय पर गौर करें तो पता चलता है कि हर तीन में से एक व्यक्ति इस स्थिति से प्रभावित है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब यह बीमारी केवल उन लोगों तक सीमित नहीं है जो शराब का सेवन करते हैं, बल्कि जो लोग शराब को हाथ भी नहीं लगाते, वे भी इसके शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हमारी रोजमर्रा की कुछ ऐसी आदतें, जिन्हें हम बहुत सामान्य समझते हैं, असल में हमारे लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रही हैं।

Fatty Liver: खराब लाइफस्टाइल से बढ़ रहा है फैटी लिवर का खतरा, बिना शराब पिए भी लिवर हो रहा है बीमार
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मीठे पेय पदार्थ और डिब्बाबंद जूस के छिपे हुए खतरे

अक्सर हम बाजार में मिलने वाले डिब्बाबंद फ्रूट जूस और मीठे ड्रिंक्स को सेहतमंद मानकर पी लेते हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट है। इन पेयों में ‘फ्रक्टोज’ की मात्रा बहुत अधिक होती है। जब शरीर में फ्रक्टोज का स्तर बढ़ता है, तो लिवर इसे सीधे फैट में बदलना शुरू कर देता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इन मीठे पेय पदार्थों का लिवर पर वैसा ही दुष्प्रभाव पड़ता है जैसा कि शराब के सेवन से होता है। नियमित रूप से सोडा या कृत्रिम मिठास वाले जूस पीने से लिवर की कोशिकाओं में वसा जमा होने लगती है, जो आगे चलकर गंभीर सूजन का कारण बन सकती है।

जंक फूड और नमक का अत्यधिक सेवन है हानिकारक

हमारी थाली में स्वाद के लिए शामिल किया गया अतिरिक्त नमक और प्रोसेस्ड जंक फूड लिवर की कार्यप्रणाली को धीमा कर देते हैं। चिप्स, अचार और डिब्बाबंद स्नैक्स में सोडियम की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। यह अधिक नमक लिवर फाइब्रोसिस के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है। इसके साथ ही, एक भ्रांति यह भी है कि ‘नेचुरल’ होने के कारण हर आयुर्वेदिक या हर्बल चीज सुरक्षित है। गिलोय या ग्रीन टी जैसे सप्लीमेंट्स का बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करना लिवर के ऊतकों को चोट पहुंचा सकता है। किसी भी चीज की अति लिवर के लिए विषाक्त साबित हो सकती है।

शारीरिक निष्क्रियता और प्रोसेस्ड मीट का घातक मेल

आधुनिक जीवन में ‘सेडेंटरी लाइफस्टाइल’ यानी शारीरिक गतिविधि का कम होना फैटी लिवर का एक बड़ा कारण है। जब हम दिन भर बैठे रहते हैं और व्यायाम नहीं करते, तो शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति पैदा हो जाती है, जिससे लिवर पर चर्बी जमा होने लगती है। इसके अलावा, जो लोग मांसाहार में प्रोसेस्ड मीट का अधिक सेवन करते हैं, उन्हें भी सावधान रहने की जरूरत है। प्रोसेस्ड मीट में मौजूद नाइट्रेट्स और अन्य प्रिजर्वेटिव्स लिवर में जलन और सूजन पैदा करते हैं। लंबे समय तक ऐसी दिनचर्या बनाए रखना लिवर फेलियर जैसी स्थितियों की ओर धकेल सकता है।

खान-पान और दिनचर्या में बदलाव ही एकमात्र समाधान

लिवर को स्वस्थ रखना पूरी तरह से व्यक्ति की अपनी आदतों पर निर्भर करता है। शराब से दूरी बनाना एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन संतुलित आहार और सक्रिय जीवन जीना भी उतना ही अनिवार्य है। अपनी डाइट से प्रोसेस्ड शुगर और अत्यधिक नमक को बाहर करना लिवर की रिकवरी में मदद करता है। इसके बजाय ताजे फल, सब्जियां और पर्याप्त पानी पीने की आदत डालनी चाहिए। प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट की सैर या व्यायाम शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है, जिससे लिवर पर जमा अतिरिक्त फैट धीरे-धीरे कम होने लगता है।

सजगता और सही जानकारी से संभव है बचाव

फैटी लिवर कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसे ठीक न किया जा सके, बशर्ते समय रहते चेतावनी के संकेतों को समझा जाए। अक्सर लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे समस्या बढ़ जाती है। लिवर हमारे शरीर का एक पावरहाउस है जो मेटाबॉलिज्म से लेकर विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने तक का काम करता है। इसलिए इसकी सेहत से समझौता करना पूरे स्वास्थ्य को खतरे में डालना है। छोटी-छोटी आदतों को बदलकर और डॉक्टर की नियमित सलाह लेकर एक स्वस्थ और लंबा जीवन सुनिश्चित किया जा सकता है।

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