DiabetesControl – देश में बढ़ते शुगर मामलों के बीच कॉफी पर नई शोध
DiabetesControl – देश में हाई ब्लड शुगर और डायबिटीज के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अब यह समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवा और बच्चे भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। भारत में स्थिति खास तौर पर चिंताजनक है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से जूझ रहे हैं, जबकि लगभग 13 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज की अवस्था में हैं। यही वजह है कि भारत को अक्सर “डायबिटीज कैपिटल” कहा जाने लगा है। बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि जीवनशैली और खानपान में बदलाव की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है।

डायबिटीज नियंत्रण क्यों है जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लड शुगर की नियमित जांच और उसे संतुलित रखना बेहद जरूरी है। लंबे समय तक शुगर लेवल ऊंचा रहने से आंखों, किडनी और लिवर पर गंभीर असर पड़ सकता है। कई मरीजों को दवाओं और इंसुलिन इंजेक्शन का सहारा लेना पड़ता है, जो उनके दैनिक जीवन का हिस्सा बन जाता है। हालांकि डॉक्टर इस बात पर भी जोर देते हैं कि दवाओं के साथ-साथ जीवनशैली में सुधार, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
क्या दवा के बिना शुगर कंट्रोल संभव है
हाल ही में प्रकाशित एक शोध ने इस दिशा में नई उम्मीद जगाई है। वैज्ञानिकों ने अध्ययन के दौरान यह जानने की कोशिश की कि क्या कुछ प्राकृतिक पेय पदार्थ ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मददगार हो सकते हैं। शोध के नतीजों में सामने आया कि बिना दूध और चीनी वाली कॉफी शुगर नियंत्रण में सहायक हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इसे दवाओं का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि सहायक उपाय के रूप में देखा जाना चाहिए।
कॉफी पर शोध में क्या सामने आया
जर्नल बेवरेज प्लांट रिसर्च में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, कॉफी में मौजूद कुछ सक्रिय तत्व शरीर में मौजूद अल्फा-ग्लूकोसिडेस एंजाइम की क्रिया को धीमा कर सकते हैं। यह एंजाइम भोजन के बाद कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में बदलने में भूमिका निभाता है। जब इसकी गति नियंत्रित होती है, तो खाने के बाद अचानक ब्लड शुगर बढ़ने की संभावना कम हो सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह प्रभाव टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है।
दवा से तुलना में कॉफी का असर
अध्ययन के दौरान रोस्टेड अरेबिका कॉफी में पाए गए तत्वों की तुलना डायबिटीज में इस्तेमाल होने वाली दवा एकार्बोस से की गई। एकार्बोस भोजन के बाद कार्बोहाइड्रेट के पाचन को धीमा करती है, जिससे शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है। शोध में पाया गया कि कॉफी के कुछ घटक भी इसी तरह एंजाइम को प्रभावित कर सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि नियमित और सीमित मात्रा में कॉफी का सेवन ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव को कम करने में भूमिका निभा सकता है।
लिवर और हृदय स्वास्थ्य पर प्रभाव
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि कॉफी का सेवन लिवर से जुड़ी समस्याओं, खासकर फैटी लिवर, के जोखिम को घटाने में सहायक हो सकता है। डायबिटीज मरीजों में फैटी लिवर की समस्या आम देखी जाती है। इसके अलावा, कुछ अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में यह पाया गया है कि दिन में दो से तीन कप कॉफी पीने वाले लोगों में हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा अपेक्षाकृत कम हो सकता है। हालांकि यह प्रभाव व्यक्ति की जीवनशैली और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों पर भी निर्भर करता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
चिकित्सकों का कहना है कि किसी भी प्राकृतिक उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। कॉफी का अत्यधिक सेवन नींद की समस्या, घबराहट या पेट संबंधी दिक्कतें भी बढ़ा सकता है। इसलिए संतुलन बेहद महत्वपूर्ण है। डॉक्टर इस बात पर जोर देते हैं कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और समय-समय पर हेल्थ चेकअप ही डायबिटीज प्रबंधन की बुनियाद हैं। कॉफी को एक सहायक विकल्प के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे दवा का विकल्प समझना सही नहीं होगा।



