स्वास्थ्य

DiabetesCare – बढ़ते मामलों के बीच जरूरी वार्षिक जांच की सलाह

DiabetesCare – देश में डायबिटीज एक तेजी से फैलती स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। अनुमान है कि करीब 10 करोड़ से अधिक लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या प्री-डायबिटीज की अवस्था में है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस शुरुआती चरण को अक्सर हल्के में लिया जाता है, जबकि लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर शरीर के भीतर चुपचाप नुकसान पहुंचाता रहता है।

हाल ही में चिकित्सक डॉ. शालिनी सिंह सोलंकी ने मरीजों को सचेत करते हुए बताया कि चाहे किसी की शुगर नियंत्रित हो, दवा चल रही हो या अभी दवा शुरू न की गई हो, नियमित जांच बेहद आवश्यक है। उनके अनुसार साल में कम से कम पांच अहम परीक्षण करवाने से दिल, किडनी और आंखों से जुड़ी गंभीर जटिलताओं को समय रहते रोका जा सकता है।

HbA1c से तीन महीने का संकेत

डायबिटीज प्रबंधन में HbA1c टेस्ट को सबसे भरोसेमंद माना जाता है। यह पिछले लगभग तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर स्तर का संकेत देता है। रोजाना की जांच में उतार-चढ़ाव संभव है, लेकिन HbA1c दीर्घकालिक नियंत्रण की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अधिकांश मरीजों के लिए इसका स्तर 7 प्रतिशत के आसपास रखना बेहतर होता है। इससे अधिक रहने पर अंगों को नुकसान का खतरा बढ़ सकता है।

फास्टिंग और पोस्ट मील शुगर का महत्व

डॉ. सोलंकी के मुताबिक खाली पेट और भोजन के बाद शुगर की जांच भी उतनी ही जरूरी है। फास्टिंग शुगर से पता चलता है कि रात भर शरीर ने ग्लूकोज को कैसे संभाला, जबकि पोस्ट मील शुगर यह दर्शाती है कि भोजन के बाद अचानक बढ़ने वाले शुगर स्तर पर शरीर की प्रतिक्रिया कैसी रही। इन दोनों रिपोर्ट के आधार पर दवा की मात्रा और खानपान में बदलाव तय करना आसान होता है।

दिल की सेहत के लिए लिपिड प्रोफाइल

डायबिटीज से पीड़ित लोगों में हृदय रोग का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में कई गुना अधिक माना जाता है। उच्च शुगर धमनियों को प्रभावित कर कोलेस्ट्रॉल संतुलन बिगाड़ सकती है। ऐसे में साल में एक बार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना जरूरी बताया गया है। यह अच्छे और खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जानकारी देता है और भविष्य में हार्ट अटैक जैसे खतरे को कम करने में सहायक हो सकता है।

किडनी और आंखों की नियमित जांच

डायबिटीज का असर सबसे अधिक किडनी और आंखों पर देखा जाता है। किडनी फंक्शन टेस्ट के माध्यम से शुरुआती क्षति का पता लगाया जा सकता है। वहीं, डायबिटिक रेटिनोपैथी बिना दर्द के धीरे-धीरे दृष्टि को प्रभावित कर सकती है। नियमित नेत्र जांच से इस जोखिम को समय रहते पहचाना जा सकता है और इलाज शुरू किया जा सकता है।

जागरूकता ही बचाव का रास्ता

विशेषज्ञों का मानना है कि डायबिटीज को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं, लेकिन सही निगरानी और जीवनशैली में सुधार से इसके दुष्प्रभावों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय-समय पर जांच करवाना लंबे समय तक स्वस्थ जीवन की कुंजी है।

बढ़ते मामलों के बीच यह जरूरी है कि लोग लक्षणों को नजरअंदाज न करें और सालाना जांच को अपनी आदत में शामिल करें। समय पर उठाया गया कदम भविष्य की गंभीर समस्याओं से बचा सकता है।

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