स्वास्थ्य

Cholesterol Heart Risk: कोलेस्ट्रॉल लेवल नॉर्मल होने पर भी क्या आ सकता है हार्ट अटैक, जानें एक्सपर्ट की राय

Cholesterol Heart Risk: अक्सर लोग यह मानकर निश्चिंत हो जाते हैं कि यदि उनकी ब्लड रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य है, तो उनका दिल पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि, यह एक बड़ा भ्रम हो सकता है। बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) का धमनियों में प्लॉक के रूप में जमना बेशक हार्ट अटैक का एक बड़ा कारण है, लेकिन यह एकमात्र कारण नहीं है। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कौस्तुभ के अनुसार, कई बार शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा संतुलित होने के बावजूद व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ सकता है। यह स्थिति (Asymptomatic Heart Conditions) की ओर इशारा करती है, जहाँ कोलेस्ट्रॉल के अलावा अन्य छिपे हुए ‘रिस्क फैक्टर्स’ हृदय की कार्यक्षमता को प्रभावित कर रहे होते हैं।

Cholesterol Heart Risk
Cholesterol Heart Risk

हाई ब्लड प्रेशर और धमनियों की कठोरता

कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल होने के बाद भी हार्ट अटैक आने का एक प्रमुख कारण ‘हाइपरटेंशन’ यानी हाई ब्लड प्रेशर है। जब रक्त का दबाव लगातार धमनियों की दीवारों पर अधिक बना रहता है, तो वे समय के साथ सख्त और कमजोर होने लगती हैं। इस प्रक्रिया को चिकित्सा विज्ञान में आर्टेरियोस्क्लेरोसिस कहा जाता है। (Chronic Hypertension Impact) के कारण भविष्य में धमनियों के ब्लॉक होने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे हृदय तक ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति बाधित होती है और व्यक्ति को अचानक हार्ट अटैक आ सकता है।

डायबिटीज और हाई ब्लड शुगर का खतरा

मधुमेह या डायबिटीज के रोगियों में हृदय रोगों का जोखिम अन्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक होता है। यदि आपका ब्लड शुगर लेवल हमेशा बढ़ा रहता है, तो यह रक्त वाहिकाओं और हृदय को नियंत्रित करने वाली नसों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। (Diabetes Related Heart Issues) के मामलों में अक्सर देखा गया है कि कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट ठीक होने के बावजूद शुगर के कारण धमनियों के अंदरूनी हिस्से में सूजन (Inflammation) बनी रहती है, जो क्लॉटिंग या ब्लॉकेज का आधार बनती है।

स्मोकिंग, तंबाकू और निकोटिन का घातक प्रभाव

हार्ट अटैक के सबसे खतरनाक और टाले जा सकने वाले कारणों में धूम्रपान और तंबाकू का सेवन शीर्ष पर है। सिगरेट के धुएं में मौजूद निकोटिन और जहरीले रसायन न केवल फेफड़ों को बल्कि सीधे धमनियों को नुकसान पहुँचाते हैं। यह (Tobacco Induced Arterial Damage) रक्त को गाढ़ा कर देता है और शरीर में रक्त के थक्के (Blood Clots) बनने की प्रक्रिया को तेज कर देता है। यही वजह है कि स्मोकिंग करने वाले युवाओं में कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल होने पर भी साइलेंट हार्ट अटैक की घटनाएं बढ़ रही हैं।

क्रॉनिक स्ट्रेस और नींद की कमी का हृदय पर असर

आज की आधुनिक जीवनशैली में तनाव और अधूरी नींद दिल की सेहत के सबसे बड़े दुश्मन बनकर उभरे हैं। लगातार मानसिक तनाव रहने से शरीर में ‘कॉर्टिसोल’ नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर को अनियंत्रित करता है। (Stress Management Importance) को नजरअंदाज करने से धमनियों में क्रॉनिक सूजन पैदा होती है। नींद की कमी हृदय की मरम्मत प्रक्रिया (Repair Mechanism) को रोक देती है, जिससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

मोटापा और गतिहीन जीवनशैली के परिणाम

यदि आपका दिनभर का अधिकांश समय बैठकर बीतता है और शारीरिक गतिविधि शून्य है, तो आप ‘सेडेंटरी लाइफस्टाइल’ के शिकार हैं। मोटापा न केवल बाहरी रूप से दिखता है, बल्कि यह आंतरिक अंगों के कार्यों को धीमा कर देता है। (Obesity and Heart Function) का गहरा संबंध है क्योंकि अतिरिक्त चर्बी शरीर में मेटाबॉलिक सिंड्रोम पैदा करती है। शारीरिक व्यायाम की कमी से हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे कोलेस्ट्रॉल के सामान्य होने पर भी शरीर रक्त के दबाव को झेलने में सक्षम नहीं रह पाता।

जेनेटिक प्रभाव और फैमिली हिस्ट्री की भूमिका

हृदय रोगों में अनुवांशिकता या फैमिली हिस्ट्री एक ऐसा फैक्टर है जिसे बदला नहीं जा सकता। यदि आपके परिवार में किसी को कम उम्र में हार्ट अटैक आया है, तो आपकी रिपोर्ट नॉर्मल होने पर भी आपको अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। (Hereditary Heart Risk Factors) के कारण कुछ लोगों की धमनियां प्राकृतिक रूप से अधिक संवेदनशील होती हैं। ऐसे लोगों को अपनी लाइफस्टाइल में शुरुआती दौर से ही कड़े बदलाव करने चाहिए और नियमित रूप से प्रोफेशनल कार्डियक चेकअप करवाते रहना चाहिए।

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