ChildHeartHealth – नागौर में छात्रा की मौत से बढ़ी चिंता, जानें बचाव उपाय…
ChildHeartHealth – राजस्थान के नागौर जिले से सामने आई एक घटना ने अभिभावकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों दोनों को झकझोर दिया है। पांचवीं कक्षा की एक छात्रा स्कूल में खेलते समय अचानक गिर पड़ी। बताया गया कि उसे सीने में दर्द हुआ और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रारंभिक आशंका हार्ट अटैक की जताई गई है। इससे कुछ महीने पहले उसी परिवार में 16 वर्षीय भाई की भी अचानक मौत हुई थी। लगातार दो घटनाओं ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

घटना का विवरण और परिवार की स्थिति
सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक बच्ची अपने साथियों के साथ स्कूल परिसर में खेल रही थी। अचानक वह लड़खड़ाई और जमीन पर गिर गई। स्कूल प्रशासन ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे बचा नहीं सके। परिवार का कहना है कि बच्ची पहले से किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त नहीं थी। पांच महीने पहले उसके बड़े भाई की भी इसी तरह अचानक तबीयत बिगड़ी थी। इन घटनाओं ने इलाके में भी चिंता बढ़ा दी है।
क्या बच्चों में हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं
हाल के वर्षों में कम उम्र में हृदय संबंधी समस्याओं की खबरें अधिक सामने आ रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में पारंपरिक हार्ट अटैक के मामले अब भी दुर्लभ माने जाते हैं। दिल्ली के एक निजी अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रवि प्रकाश के अनुसार, वयस्कों में हार्ट अटैक अक्सर अस्वस्थ जीवनशैली से जुड़ा होता है, लेकिन बच्चों में स्थिति अलग हो सकती है।
उन्होंने बताया कि अत्यधिक कैलोरी वाला भोजन, मोटापा और बढ़ता हाई ब्लड प्रेशर जोखिम कारक बन सकते हैं। मोटापा कम उम्र में ही मेटाबोलिक समस्याएं बढ़ाता है, जिससे हृदय पर दबाव पड़ सकता है।
स्क्रीन टाइम और बदलती दिनचर्या
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की दिनचर्या में बड़ा बदलाव आया है। स्क्रीन टाइम बढ़ने से शारीरिक गतिविधियां कम हो रही हैं। लंबे समय तक मोबाइल या अन्य उपकरणों का उपयोग बच्चों की सक्रियता घटाता है, जिससे मोटापा और सूजन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। कुछ अध्ययनों में यह भी संकेत मिला है कि असंतुलित खान-पान और कम व्यायाम का असर हृदय स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
कम उम्र में जोखिम के अन्य कारण
बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आरती सिन्हा के अनुसार, टॉडलर या प्री-स्कूल आयु वर्ग में हार्ट अटैक अत्यंत दुर्लभ होता है। यदि ऐसी घटनाएं होती हैं तो अक्सर इनके पीछे जन्मजात हृदय रोग, आनुवांशिक समस्याएं या दुर्लभ बीमारियां जिम्मेदार हो सकती हैं। कावासाकी रोग जैसे कुछ विशेष संक्रमण भी लंबे समय में हृदय पर प्रभाव डाल सकते हैं।
इसलिए हर मामले को सामान्य जीवनशैली से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। विस्तृत चिकित्सीय जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही वास्तविक कारण स्पष्ट होते हैं।
सतर्कता और जागरूकता की जरूरत
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर नियमित जांच और संतुलित दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी है। पौष्टिक आहार, नियमित खेलकूद और स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण जैसे कदम समग्र स्वास्थ्य के लिए सहायक हो सकते हैं। साथ ही, यदि बच्चे को बार-बार सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत या असामान्य थकान जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
नागौर की यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि व्यापक जागरूकता की आवश्यकता की ओर भी संकेत करती है। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा, लेकिन इस बीच बच्चों के हृदय स्वास्थ्य को लेकर सजग रहना समय की मांग है।



