CancerPrevention – बदलती जीवनशैली से बढ़ता कैंसर, समय रहते आदतें सुधारने पर रोक संभव…
CancerPrevention – कैंसर आज केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। हर साल दुनिया भर में लाखों लोगों की जान इस रोग के कारण चली जाती है। कभी इसे बढ़ती उम्र से जुड़ी समस्या माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। कम उम्र के लोग, यहां तक कि बच्चे भी कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे केवल आनुवांशिक कारण नहीं हैं, बल्कि तेजी से बदलती जीवनशैली, खानपान की आदतें और पर्यावरणीय परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

जीवनशैली और पर्यावरण कैसे बढ़ा रहे हैं खतरा
हालिया अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि शहरीकरण, लगातार बढ़ता तनाव, शारीरिक गतिविधियों की कमी और प्रोसेस्ड फूड पर निर्भरता ने कैंसर के जोखिम को बढ़ाया है। प्रदूषित हवा, रसायनों के संपर्क और अनियमित दिनचर्या को भी कैंसर से जोड़ा जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आधुनिक जीवनशैली ने शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को कमजोर किया है, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
क्या कैंसर से बचाव संभव है?
इस सवाल का जवाब वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की टीम ने हां में दिया है। शोध बताते हैं कि लगभग 40 प्रतिशत कैंसर ऐसे कारणों से होते हैं, जिन पर समय रहते नियंत्रण पाया जा सकता है। यानी कुछ आदतों में सुधार कर और सही फैसले लेकर बड़ी संख्या में कैंसर के मामलों को रोका जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बचाव के उपाय जटिल नहीं हैं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे-छोटे बदलाव काफी असर डाल सकते हैं।
बड़े अध्ययन में क्या सामने आया
अपने तरह के एक बड़े अध्ययन में शोधकर्ताओं ने अमेरिका, ब्रिटेन समेत करीब 200 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसमें 36 प्रकार के कैंसर के लगभग 1.9 करोड़ मामलों को शामिल किया गया। अध्ययन में पाया गया कि करीब 38 प्रतिशत मामले ऐसे थे, जिन्हें अगर समय रहते जीवनशैली में बदलाव कर लिया जाता, तो टाला जा सकता था। यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि रोकथाम की संभावनाएं काफी व्यापक हैं।
पुरुषों में सबसे बड़े जोखिम कारक
शोध के अनुसार पुरुषों में कैंसर के लिए सबसे बड़ा बदला जा सकने वाला जोखिम कारक धूम्रपान और तंबाकू का सेवन है। विशेषज्ञों ने बताया कि भले ही कई देशों में स्मोकिंग की दर में गिरावट आई हो, लेकिन तंबाकू अब भी कैंसर के हर छह मामलों में से एक के लिए जिम्मेदार है। फेफड़े, मुंह और पेट से जुड़े कैंसर में इसकी भूमिका सबसे अधिक पाई गई है।
महिलाओं में अलग कारण उभरकर आए
महिलाओं में कैंसर के कारण कुछ हद तक अलग पाए गए। यौन संचारित संक्रमण ह्यूमन पेपिलोमावायरस को सर्वाइकल और एनल कैंसर का प्रमुख कारण माना गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीनेशन और सुरक्षित यौन व्यवहार से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा शराब का सेवन, पर्याप्त समय तक स्तनपान न कराना, शारीरिक निष्क्रियता और प्रदूषण भी महिलाओं में कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं।
इलाज में सुधार, लेकिन बचाव अब भी जरूरी
अमेरिकन कैंसर सोसाइटी की रिपोर्ट के अनुसार इलाज और समय पर जांच की वजह से अब कैंसर से बचने की दर पहले से बेहतर हुई है। अमेरिका में 10 में से सात मरीज डायग्नोसिस के बाद कम से कम पांच साल तक जीवित रह रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इलाज के साथ-साथ रोकथाम पर जोर देना ज्यादा प्रभावी रणनीति है।
बदली जा सकने वाली आदतों पर ध्यान जरूरी
शोधकर्ताओं के मुताबिक साल 2022 में दुनियाभर में करीब 1.87 करोड़ नए कैंसर मामलों का पता चला, जिनमें से लगभग 71 लाख मामले ऐसे कारणों से जुड़े थे जिन्हें बदला जा सकता था। महिलाओं में करीब 30 प्रतिशत और पुरुषों में 45 प्रतिशत मामलों में समय रहते सावधानी बरतने से जोखिम कम किया जा सकता था। विशेषज्ञों ने धूम्रपान और शराब से दूरी, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और प्रदूषण से बचाव को अहम बताया है।
कैंसर से जुड़े 30 प्रमुख जोखिम कारक
अध्ययन में कुल 30 ऐसे जोखिम कारकों की पहचान की गई है, जिनमें सुधार कर कैंसर की आशंका को घटाया जा सकता है। इनमें तंबाकू और शराब का सेवन, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, वायु प्रदूषण, कुछ वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण, रसायनों के संपर्क और औद्योगिक प्रदूषक शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और समय पर कदम उठाकर बड़ी संख्या में लोगों को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है।



