स्वास्थ्य

Breastfeeding: बीमारी के दौरान मां का दूध पीना शिशु के लिए सुरक्षित या नहीं, जानें विशेषज्ञों की राय

Breastfeeding: नवजात शिशु के बेहतर स्वास्थ्य और शारीरिक विकास के लिए मां का दूध अमृत के समान माना जाता है। लेकिन अक्सर माताओं के मन में यह चिंता बनी रहती है कि यदि वे स्वयं बीमार पड़ जाएं, तो क्या उन्हें शिशु को स्तनपान कराना जारी रखना चाहिए। आमतौर पर सर्दी, खांसी या वायरल बुखार होने पर परिवार के सदस्य भी मां को बच्चे से दूर रहने की सलाह देते हैं, ताकि संक्रमण शिशु तक न पहुंचे। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मां की मामूली बीमारी शिशु के लिए खतरे की घंटी नहीं, बल्कि उसके सुरक्षा चक्र को मजबूत करने का एक जरिया हो सकती है।

Breastfeeding: बीमारी के दौरान मां का दूध पीना शिशु के लिए सुरक्षित या नहीं, जानें विशेषज्ञों की राय
Breastfeeding: बीमारी के दौरान मां का दूध पीना शिशु के लिए सुरक्षित या नहीं, जानें विशेषज्ञों की राय
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शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा

मुंबई के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ और पोषण संबंधी मामलों के जानकार डॉ. निमिश कुलकर्णी इस विषय पर एक स्पष्ट और वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखते हैं। उनके अनुसार, वायरल संक्रमण जैसे कि सामान्य जुकाम या बुखार होने पर स्तनपान रोकना कतई जरूरी नहीं है। वे समझाते हैं कि जब एक मां का शरीर किसी वायरस या बैक्टीरिया की चपेट में आता है, तो उसका इम्यून सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाता है और उस विशिष्ट संक्रमण से लड़ने के लिए ‘एंटीबॉडी’ तैयार करने लगता है।

ये सुरक्षात्मक एंटीबॉडी मां के दूध के जरिए सीधे बच्चे के शरीर में प्रवेश करती हैं। इस प्रक्रिया से शिशु को प्राकृतिक रूप से उस बीमारी से लड़ने की ताकत मिलती है। संक्षेप में कहें तो, मां का दूध इस दौरान एक ‘नेचुरल वैक्सीन’ की तरह काम करता है, जो बच्चे की इम्यूनिटी को और अधिक सशक्त बनाता है।

संक्रमण रोकने के लिए जरूरी एहतियात

विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण दूध के जरिए नहीं, बल्कि सांस की बूंदों (ड्रॉपलेट्स) या दूषित हाथों के संपर्क से फैल सकता है। इसलिए बीमारी की स्थिति में स्तनपान कराते समय कुछ बुनियादी सावधानियां बरतनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि फीडिंग कराते समय मां को मास्क पहनना चाहिए ताकि खांसने या छींकने से वायरस बच्चे तक न पहुंचे।

इसके अलावा, हर बार बच्चे को गोद में लेने या दूध पिलाने से पहले हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना अनिवार्य है। स्वच्छता का यह छोटा सा कदम संक्रमण के जोखिम को लगभग खत्म कर देता है। यदि संभव हो, तो फीडिंग से पहले शरीर की स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखें और बच्चे के चेहरे या हाथों को बार-बार छूने से परहेज करें।

दवाइयों के सेवन में डॉक्टरी परामर्श जरूरी

अक्सर महिलाएं बीमारी के दौरान खुद ही मेडिकल स्टोर से दवाएं लेकर खा लेती हैं, लेकिन स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए यह जोखिम भरा हो सकता है। कुछ दवाओं के अंश मां के दूध में मिलकर बच्चे के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए, किसी भी प्रकार की एंटीबायोटिक या बुखार की दवा लेने से पहले अपने डॉक्टर को यह जरूर बताएं कि आप शिशु को स्तनपान करा रही हैं। डॉक्टर ऐसी दवाएं सुझायेंगे जो शिशु के लिए पूरी तरह सुरक्षित हों।

अत्यधिक थकान और कमजोरी की स्थिति

कई बार तेज बुखार या शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी होने के कारण मां के लिए बार-बार ब्रेस्टफीडिंग कराना शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसी स्थिति में डॉ. कुलकर्णी सलाह देते हैं कि यदि मां बहुत ज्यादा थकान महसूस कर रही है, तो अस्थायी रूप से विकल्प के तौर पर फॉर्मूला मिल्क का सहारा लिया जा सकता है। यह मां को आराम करने और जल्दी रिकवर होने में मदद करेगा। हालांकि, जैसे ही ऊर्जा का स्तर सामान्य हो, वापस स्तनपान शुरू कर देना चाहिए ताकि शिशु को मिलने वाले प्राकृतिक पोषण में कोई बाधा न आए।

भ्रामक धारणाओं से बचें और सही निर्णय लें

समाज में यह एक आम धारणा है कि मां की बीमारी दूध के रास्ते बच्चे को बीमार कर देगी। यह वैज्ञानिक रूप से गलत है। वास्तविकता यह है कि स्तनपान बंद करने से शिशु उस सुरक्षा कवच से वंचित हो जाता है जो उसे मां के दूध से मिलने वाली एंटीबॉडीज के रूप में मिल रहा था। किसी भी सुनी-सुनाई बात पर भरोसा करने के बजाय, यह समझना आवश्यक है कि मां का दूध न केवल पोषण है, बल्कि यह शिशु के लिए जीवन रक्षक भी है। सही जानकारी और थोड़ी सी सावधानी के साथ आप अपनी बीमारी के दौरान भी अपने बच्चे की सेहत का पूरा ख्याल रख सकती हैं।

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