स्वास्थ्य

AI Cardiology – साइलेंट हार्ट अटैक पहचानने में आई नई तकनीक

AI Cardiology – हृदय रोग आज दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, हाल के वर्षों में कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों से करोड़ों लोग प्रभावित हुए हैं और लाखों जानें गई हैं। भारत में भी तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, असंतुलित खानपान, मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियां हृदय रोग के खतरे को बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई मामलों में दिल का दौरा बिना स्पष्ट चेतावनी के आता है। ऐसे में समय रहते जोखिम पहचानना बेहद जरूरी हो जाता है।

साइलेंट हार्ट अटैक की पहचान में एआई की भूमिका

चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। अब विशेषज्ञों ने एक ऐसे एआई आधारित टूल की जानकारी दी है, जो इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम यानी ईसीजी डेटा का विश्लेषण कर साइलेंट हार्ट अटैक के संकेत खोज सकता है। साइलेंट हार्ट अटैक वह स्थिति है, जिसमें दिल को नुकसान तो पहुंचता है लेकिन मरीज को सामान्य लक्षण जैसे सीने में तेज दर्द या सांस फूलना महसूस नहीं होता।

यह नया सिस्टम ईसीजी से प्राप्त हृदय संकेतों के पैटर्न का विश्लेषण करता है। एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मोबाइल से जुड़कर डेटा रिकॉर्ड करता है और एआई एल्गोरिदम उस जानकारी को पढ़कर संभावित जोखिम का संकेत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ऐसे मरीजों की पहचान संभव हो सकती है जिन्हें पहले बिना जानकारी के हार्ट अटैक हो चुका हो। समय पर इलाज से दोबारा गंभीर घटना को रोका जा सकता है।

क्यों खतरनाक है साइलेंट मायोकार्डियल इंफार्क्शन

साइलेंट हार्ट अटैक को चिकित्सा भाषा में साइलेंट मायोकार्डियल इंफार्क्शन कहा जाता है। इसमें दिल की मांसपेशियां क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, लेकिन मरीज को स्पष्ट चेतावनी नहीं मिलती। यही वजह है कि कई लोग चिकित्सा सहायता लेने से चूक जाते हैं। समय के साथ यह नुकसान हार्ट फेलियर या दोबारा हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा सकता है। उम्रदराज लोगों, डायबिटीज और उच्च रक्तचाप से पीड़ित मरीजों में यह खतरा अधिक देखा गया है।

कैंसर मरीजों के लिए विशेष एआई मॉडल

यूके की एक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कैंसर मरीजों में सेकेंडरी हार्ट अटैक के खतरे का आकलन करने के लिए भी एआई आधारित मॉडल विकसित किया है। कमजोर कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम वाले मरीजों में जोखिम अधिक रहता है। ONCO-ACS नामक यह टूल क्लिनिकल डेटा और कैंसर से जुड़े कारकों को जोड़कर छह महीने के भीतर संभावित हृदय संबंधी घटना का अनुमान लगाने में मदद कर सकता है। इससे डॉक्टरों को उपचार योजना बनाने में सहायता मिल सकती है।

बच्चों के लिए भी विकसित हुआ एआई समाधान

जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे बच्चों के लिए भी नई तकनीक उम्मीद जगा रही है। एक प्रमुख हृदय केंद्र की टीम ने ऐसा एआई टूल तैयार किया है जो ईसीजी डेटा का विश्लेषण कर जोखिम की पहचान कर सकता है। खासतौर पर टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट जैसी स्थितियों में यह मददगार हो सकता है। सामान्यतः ऐसे मामलों में कार्डियक एमआरआई की जरूरत होती है, लेकिन एआई आधारित विश्लेषण प्रारंभिक आकलन को आसान बना सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई चिकित्सा क्षेत्र में सहयोगी भूमिका निभा सकता है, हालांकि अंतिम निर्णय और उपचार की जिम्मेदारी डॉक्टरों की ही रहती है।

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