ShivajiMaharajFilms – सिनेमा में महान योद्धा की गूंज
ShivajiMaharajFilms – छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती हर वर्ष देशभर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। 19 फरवरी 1630 को पुणे के शिवनेरी किले में जन्मे शिवाजी राजे भोसले ने भारतीय इतिहास में एक साहसी और दूरदर्शी शासक के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनके पिता शाहजी राजे भोसले और संरक्षक दादाजी कोंडदेव ने उन्हें युद्धकला और प्रशासन की शिक्षा दी। समय के साथ उनका व्यक्तित्व केवल इतिहास की पुस्तकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सिनेमा और टेलीविजन के माध्यम से भी नई पीढ़ियों तक पहुंचा।

ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित फिल्में
शिवाजी महाराज के जीवन और उनके साहसिक अभियानों पर कई मराठी और हिंदी फिल्मों का निर्माण हुआ है। वर्ष 2022 में आई फिल्म ‘शेर शिवराज’ में प्रतापगढ़ की ऐतिहासिक घटना को दर्शाया गया, जिसमें अफजल खान और शिवाजी महाराज के बीच हुए संघर्ष को फिल्माया गया। कथा में उस प्रसंग को दिखाया गया है जब अफजल खान की साजिश के बावजूद शिवाजी महाराज ने सूझबूझ और साहस से परिस्थिति को पलट दिया।
इसी तरह ‘पावनखिंड’ फिल्म 1660 की ऐतिहासिक लड़ाई पर आधारित है। इसमें मराठा साम्राज्य के सेनापति बाजी प्रभु देशपांडे के बलिदान और शिवाजी महाराज की रणनीति को प्रमुखता से दिखाया गया। यह फिल्म साहस और कर्तव्यनिष्ठा की कहानी के रूप में सामने आई।
मराठी सिनेमा में गौरवगाथा
साल 2019 में रिलीज हुई ‘फरजंद’ में कोंडाजी फरजंद और मराठा सैनिकों की वीरता को केंद्र में रखा गया। फिल्म में सीमित संसाधनों के बावजूद दुश्मन पर विजय प्राप्त करने की कहानी दिखाई गई।
इसी वर्ष आई ‘फत्तेशिकस्त’ में पुणे के लाल महल में शाइस्ता खान के खिलाफ किए गए साहसिक अभियान को चित्रित किया गया। इसमें शिवाजी महाराज की गुरिल्ला रणनीति और नेतृत्व क्षमता को प्रमुखता से उभारा गया।
पर्दे पर शिवाजी का प्रभावशाली चित्रण
छत्रपति शिवाजी महाराज का किरदार कई कलाकारों ने निभाया है। फिल्म ‘तान्हाजी: द अनसंग वॉरियर’ में शरद केलकर ने इस भूमिका को निभाया। उनके अभिनय को दर्शकों ने सराहा और उन्होंने ऐतिहासिक व्यक्तित्व की गंभीरता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
मराठी फिल्म ‘मी शिवाजीराजे भोसले बोलतोय’ में महेश मांजरेकर ने भी इस महान योद्धा का रूप धारण किया। वहीं 1988 में श्याम बेनेगल के धारावाहिक ‘भारत की खोज’ में नसीरुद्दीन शाह ने शिवाजी महाराज की भूमिका निभाई थी।
मराठी टेलीविजन श्रृंखला ‘राजा शिवछत्रपति’ में अमोल कोल्हे का अभिनय भी काफी चर्चित रहा। इस धारावाहिक ने शिवाजी महाराज के जीवन को विस्तृत रूप में दर्शकों तक पहुंचाया।
नई पीढ़ी तक पहुंचती विरासत
फिल्मों और धारावाहिकों के माध्यम से शिवाजी महाराज की वीरता, प्रशासनिक क्षमता और नेतृत्व की झलक नई पीढ़ी तक पहुंच रही है। ऐतिहासिक कथाओं को दृश्य माध्यम में प्रस्तुत करने से उनकी जीवनगाथा और अधिक सुलभ और प्रभावशाली बनती है।



