Uttarkashi Gurari Village Fire: उत्तरकाशी के गुराड़ी में शॉर्ट सर्किट ने उजाड़े तीन परिवार, बेजुबानों की मौत से पसरा मातम
Uttarkashi Gurari Village Fire: उत्तरकाशी जिले की मोरी तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम गुराड़ी में मंगलवार की सुबह खुशियां नहीं, बल्कि बर्बादी लेकर आई। जब गांव के लोग गहरी नींद में सो रहे थे, तभी अचानक एक घर से उठी आग की लपटों ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। बताया जा रहा है कि (Electrical Short Circuit) की वजह से लगी इस आग ने पूरे मोहल्ले में दहशत फैला दी। आग की तपिश और धुएं के गुबार के बीच ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए घरों से बाहर भागे, लेकिन तब तक आग ने कई जिंदगियों को अपनी चपेट में ले लिया था।

राहत और बचाव दल की मौके पर तत्परता
घटना की गंभीरता को देखते हुए आपातकालीन परिचालन (Uttarkashi Gurari Village Fire) केंद्र उत्तरकाशी ने तुरंत हरकत में आते हुए बचाव टीमों को सक्रिय किया। घटनास्थल पर राजस्व विभाग, फायर सर्विस, एसडीआरएफ और पुलिस की (Emergency Response) टीमों को एम्बुलेंस के साथ रवाना किया गया। स्थानीय ग्रामीणों और सरकारी टीमों ने मिलकर घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि, जब तक आग बुझती, तब तक तीन परिवारों का सब कुछ जलकर राख हो चुका था और केवल बर्बादी के निशान ही शेष बचे थे।
तीन हंसते-खेलते परिवारों के आशियाने हुए राख
इस भीषण अग्निकांड में रामचंद्र, भरत मणि और ममलेश के आवासीय भवन पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए हैं। कड़ाके की ठंड के बीच इन परिवारों के सिर से छत छिन गई है। पीड़ितों ने रोते हुए बताया कि वे अपने (Residential Property) से सुई तक नहीं निकाल पाए। घर में रखा अनाज, कपड़े और जमा पूंजी सब कुछ आग की भेंट चढ़ गया। इन परिवारों के पास अब सिवाय खुले आसमान और मलबे के कुछ भी नहीं बचा है, जिससे पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
बेजुबानों की दर्दनाक मौत से दहल उठा गांव
आग इतनी तेजी से फैली कि गोशालाओं में बंधे पशुओं को बाहर निकालने का समय ही नहीं मिला। इस हादसे में भारी (Livestock Loss) हुई है, जो इन पहाड़ी परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार थे। रामचंद्र की दो गाय और एक बैल जिंदा जल गए, वहीं भरत मणि की पांच बकरी और एक गाय की भी मौत हो गई। ममलेश के घर में बंधी दो भेड़, एक गाय और दो बकरियां भी आग की चपेट में आ गईं। बेजुबानों की इस दर्दनाक मौत ने अग्निकांड के मंजर को और भी खौफनाक बना दिया है।
प्रशासन की प्रारंभिक जांच और तहसीलदार का बयान
तहसीलदार मोरी ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद बताया कि प्रारंभिक जांच में आग लगने का मुख्य कारण बिजली का शॉर्ट सर्किट ही नजर आ रहा है। (Disaster Assessment) के लिए राजस्व विभाग की टीम बारीकी से नुकसान का ब्योरा जुटा रही है। तहसीलदार ने आश्वासन दिया है कि प्रभावितों को सरकारी मानकों के अनुसार अधिकतम सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या बिजली की वायरिंग में कोई पुरानी खराबी थी या ओवरलोडिंग की वजह से यह हादसा हुआ।
प्रभावितों को बांटी गई फौरी राहत सामग्री
दुख की इस घड़ी में राजस्व विभाग ने तत्परता दिखाते हुए पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री का वितरण किया है। बेघर हुए लोगों के लिए (Government Relief) के तहत कंबल, राशन और टेंट की व्यवस्था की जा रही है ताकि वे इस सर्द रात को काट सकें। पशु चिकित्सा विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची है ताकि यदि कोई पशु झुलसा हुआ मिले तो उसका उपचार किया जा सके। राजस्व विभाग ने कहा है कि विस्तृत रिपोर्ट तैयार होने के बाद मुआवजा राशि सीधे प्रभावितों के खातों में भेजी जाएगी।
पहाड़ी गांवों में अग्नि सुरक्षा की बड़ी चुनौती
उत्तरकाशी के दुर्गम गांवों में इस तरह के हादसे बार-बार बिजली के पुराने बुनियादी ढांचे और लकड़ी के बने घरों की वजह से होते हैं। (Fire Prevention) की उचित व्यवस्था न होने और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को पहुंचने में लगने वाले समय के कारण नुकसान की मात्रा बढ़ जाती है। गुराड़ी की इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन को दूरस्थ क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है। ग्रामीण अब मांग कर रहे हैं कि उनके गांवों में बिजली लाइनों का सुदृढ़ीकरण किया जाए।
एकजुट हुआ गांव: पीड़ितों की मदद को बढ़े हाथ
विपदा के इस समय में गुराड़ी के ग्रामीणों ने भी मानवता की मिसाल पेश की है। बेघर हुए तीनों परिवारों को पड़ोसी अपने घरों में शरण दे रहे हैं। (Community Support) के जरिए लोग पीड़ितों के लिए भोजन और कपड़ों का इंतजाम कर रहे हैं। हालांकि, जिस बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई के लिए सरकारी मदद का ही इंतजार है। उत्तरकाशी का जिला प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजने की तैयारी में है।



