Malaika Arora Divorce Journey: क्या टूटी हुई शादियां ही हैं सुकून का रास्ता, मलाइका अरोड़ा ने समाज के दोहरे मापदंडों पर तोड़ी चुप्पी
Malaika Arora Divorce Journey: आज के दौर में भले ही हम आधुनिक होने का दावा करें, लेकिन रिश्तों के टूटने की खबरों को समाज आज भी एक अलग नजरिए से देखता है। अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा का मानना है कि हालांकि अब (Social Acceptance of Divorce) धीरे-धीरे बढ़ रही है, लेकिन भारत के कई हिस्सों में आज भी इसे एक कलंक या टैबू के तौर पर ही देखा जाता है। मलाइका ने स्पष्ट किया कि जब उन्होंने वर्षों पहले अपनी शादी खत्म करने का फैसला लिया था, तब स्थितियां आज के मुकाबले कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण और आलोचनात्मक थीं।

अपनों के विरोध और तानों के बीच एक कठिन फैसला
मलाइका ने हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान उस दौर की कड़वी यादों को साझा किया जब वह अरबाज खान से अलग हो रही थीं। उन्होंने बताया कि उस वक्त सिर्फ बाहरी दुनिया ही नहीं, बल्कि खुद उनके (Personal Life Struggles) में शामिल दोस्तों और परिवार के सदस्यों ने भी उनके फैसले का कड़ा विरोध किया था। उनके चरित्र और निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल उठाए गए, जिससे यह साबित हुआ कि एक महिला के लिए अपनी खुशी के लिए स्टैंड लेना आज भी कितना मुश्किल है।
पछतावे की जगह अपनी खुशी को दी प्राथमिकता
तमाम आलोचनाओं के बावजूद मलाइका (Malaika Arora Divorce Journey) को अपने किसी भी फैसले पर आज मलाल नहीं है। उन्होंने कहा कि उस वक्त वह भविष्य को लेकर अनिश्चित थीं, लेकिन वह यह अच्छी तरह जानती थीं कि (Mental Peace and Happiness) पाने के लिए उन्हें यह कदम उठाना ही होगा। लोग अक्सर सवाल करते थे कि एक महिला अपनी खुशी को परिवार और परंपराओं से ऊपर कैसे रख सकती है, लेकिन मलाइका ने खुद के साथ अकेले रहना स्वीकार किया, बजाय एक घुटन भरे रिश्ते में बने रहने के।
पितृसत्तात्मक समाज के दोहरे मापदंडों पर तीखा वार
मलाइका ने भारतीय समाज की उस मानसिकता पर भी चोट की जहां पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि एक (Patriarchal Society) में होने के कारण पुरुषों से कभी उनके करियर या निजी जीवन के विकल्पों पर सवाल नहीं पूछे जाते। पुरुष अगर अपनी राह बदलता है तो उसे सामान्य माना जाता है, लेकिन अगर एक महिला पारंपरिक रास्तों को छोड़कर अपनी खुशी चुनती है, तो उस पर तुरंत उंगलियां उठने लगती हैं और उसे आदर्श महिला के दायरे से बाहर कर दिया जाता है।
रूढ़ियों को तोड़कर एक नई मिसाल कायम करना
अभिनेत्री का मानना है कि अगर कोई महिला समाज के बनाए नियमों से हटकर अपने लिए एक नया मुकाम बनाती है, तो वह वास्तव में कुछ सही कर रही होती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को (Women Empowerment in India) का असली मतलब तभी समझ आएगा जब वे दूसरों की बातों के बजाय अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीना शुरू करेंगी। मलाइका ने यह साबित कर दिया कि एक असफल शादी का मतलब जीवन का अंत नहीं है, बल्कि यह एक नई और बेहतर शुरुआत हो सकती है।
शादी की संस्था पर मलाइका का आज भी है अटूट विश्वास
निजी जीवन में इतने उतार-चढ़ाव देखने के बाद भी मलाइका का विवाह की संस्था से भरोसा नहीं उठा है। उन्होंने साझा किया कि वह आज भी (Faith in Marriage) रखती हैं, हालांकि वह अब इसे जबरदस्ती किसी पर थोपने या तलाशने के पक्ष में नहीं हैं। उनके अनुसार, अगर भविष्य में शादी का मौका स्वाभाविक रूप से उनके दरवाजे पर दस्तक देता है, तो वह उसे अपनाने के लिए तैयार हैं, लेकिन फिलहाल वह अपने अकेलेपन और अपनी आजादी में पूरी तरह संतुष्ट हैं।
रिश्तों के प्रति एक परिपक्व और सकारात्मक नजरिया
मलाइका ने अपने पिछले अनुभवों से बहुत कुछ सीखा है और वह प्यार को लेकर आज भी उत्साहित रहती हैं। वह कहती हैं कि वह रिश्तों से ऊब नहीं गई हैं और उन्हें आज भी (Healthy Relationships) को संवारना पसंद है। वह प्यार पाने और प्यार बांटने की प्रक्रिया में यकीन रखती हैं। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने आज के युवाओं को एक महत्वपूर्ण सलाह भी दी कि उन्हें बहुत कम उम्र में शादी के बंधन में नहीं बंधना चाहिए, बल्कि पहले खुद को समझना चाहिए।
18 साल के सफर का अंत और एक नई पहचान
मलाइका अरोड़ा और अरबाज खान की शादी साल 1998 में हुई थी और करीब 18 साल के लंबे साथ के बाद 2016 में उन्होंने अलग होने की घोषणा की थी। साल 2017 में उनका (Official Divorce Process) पूरा हुआ, जिसके बाद मलाइका अपनी निजी और पेशेवर जिंदगी में आगे बढ़ गईं। अरबाज से अलग होने के बाद उनका नाम अर्जुन कपूर के साथ जुड़ा, लेकिन हालिया खबरों के अनुसार अब वे दोनों भी अपनी राहें अलग कर चुके हैं, मगर मलाइका आज भी एक सशक्त मिसाल बनकर खड़ी हैं।



