KritiSanon – संघर्ष से सफलता तक पहुंचीं कृति सेनन, नेपोटिज्म पर भी रखी बेबाक राय
KritiSanon – इन दिनों कृति सेनन अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘कॉकटेल 2’ को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। फिल्म को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है और इसमें उनके अभिनय की भी सराहना की जा रही है। आज कृति हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की प्रमुख अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। हाल ही में एक बातचीत के दौरान उन्होंने अपने शुरुआती दिनों के संघर्ष, असफलताओं और इंडस्ट्री में मिले अनुभवों को खुलकर साझा किया।

शुरुआती दौर में कई बार हुआ निराशा का सामना
एक बातचीत में कृति सेनन ने बताया कि उनका करियर किसी एक बड़ी सफलता से नहीं बदला, बल्कि यह लगातार मेहनत और धैर्य का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कई ऐसे मौके आए जब उन्हें खुद पर संदेह हुआ और मनचाहे अवसर नहीं मिलने से निराशा भी हुई। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और हर चुनौती को सीखने का अवसर माना।
कृति के अनुसार, सफलता का रास्ता सीधा नहीं था। उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन हर असफलता के बाद खुद को फिर से तैयार किया। उनका मानना है कि लगातार प्रयास करते रहने की आदत ने ही उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
पहले फोटोशूट और रैंप शो की यादें आज भी हैं ताजा
अभिनेत्री ने अपने शुरुआती मॉडलिंग दिनों का जिक्र करते हुए बताया कि उनका पहला फोटोशूट उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। इसी तरह पहला रैंप शो भी उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण अनुभव साबित हुआ। उन्होंने स्वीकार किया कि दोनों मौकों पर वह भावुक होकर घर लौटी थीं।
हालांकि, उन्होंने इन अनुभवों को अपने आत्मविश्वास पर हावी नहीं होने दिया। कृति ने बताया कि उन्होंने अगले फोटोशूट, अगले ऑडिशन और अगले रैंप शो के लिए फिर से तैयारी की। उनका कहना है कि सीखते रहने की इच्छा और लगातार प्रयास करने का जज्बा ही उन्हें आज इस मुकाम तक लेकर आया है।
नेपोटिज्म पर रखा संतुलित नजरिया
बातचीत के दौरान कृति सेनन ने फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि फिल्मी परिवार से आने वाले कलाकारों को शुरुआती अवसर अपेक्षाकृत आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन लंबे समय तक टिके रहने के लिए प्रतिभा और मेहनत जरूरी होती है।
उन्होंने रणबीर कपूर और आलिया भट्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों कलाकारों ने अपने अभिनय से खुद को साबित किया है। कृति का मानना है कि शुरुआती अवसर मिलना एक बात है, लेकिन दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाना पूरी तरह कलाकार की क्षमता पर निर्भर करता है।
बाहरी कलाकारों के सामने अलग तरह की चुनौतियां
कृति ने यह भी कहा कि इंडस्ट्री में ऐसे कई अवसर आए, जब उन्हें लगा कि किसी फिल्म के लिए उनका नाम विचाराधीन है, लेकिन अंत में भूमिका किसी और को मिल गई। उनके मुताबिक, जो कलाकार फिल्मी पृष्ठभूमि से नहीं आते, उनके लिए खुद को जल्दी साबित करना अधिक जरूरी होता है।
उन्होंने कहा कि अगर बाहरी कलाकार शुरुआती वर्षों में प्रभाव नहीं छोड़ पाते, तो उनके लिए आगे मौके सीमित हो जाते हैं। यही वजह है कि उन्हें लगता है कि सभी कलाकारों के लिए अवसरों का संतुलित माहौल होना चाहिए, जहां प्रतिभा को प्राथमिकता मिले।
लगातार मजबूत होता गया कृति का करियर
करीब 12 वर्षों के फिल्मी सफर में कृति सेनन ने कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। फिल्म ‘मिमी’ में शानदार अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिल चुका है। इसके अलावा ‘बरेली की बर्फी’, ‘दिलवाले’, ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ और ‘क्रू’ जैसी फिल्मों में उनके काम को दर्शकों ने सराहा।
फिलहाल ‘कॉकटेल 2’ में उनके अभिनय को भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। दर्शकों और समीक्षकों की सराहना के बीच कृति एक बार फिर यह साबित करती नजर आ रही हैं कि लगातार मेहनत और धैर्य के दम पर इंडस्ट्री में मजबूत पहचान बनाई जा सकती है।