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KaranJohar – टैलेंट मैनेजमेंट में वफादारी दुर्लभ, बोले फिल्मकार…

KaranJohar – फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों के करियर को दिशा देने का काम अब पेशेवर एजेंसियां संभालती हैं। बड़े सितारों से लेकर नए चेहरों तक, सभी के पीछे एक टीम काम करती है जो प्रोजेक्ट्स, ब्रांड डील और पब्लिक इमेज का ध्यान रखती है। हाल के महीनों में कुछ कलाकारों द्वारा अपनी मैनेजमेंट एजेंसी बदलने की खबरें चर्चा में रहीं। इसी संदर्भ में निर्माता-निर्देशक करण जौहर का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने टैलेंट मैनेजमेंट की चुनौतियों और प्रतिस्पर्धा पर खुलकर बात की है।

एजेंसियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा

मनोरंजन जगत में अब टैलेंट मैनेजमेंट एक संगठित कारोबार बन चुका है। अलग-अलग एजेंसियां बड़े नामों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करती हैं। कई बार कलाकार बेहतर अवसर या नई रणनीति की तलाश में एजेंसी बदल लेते हैं।

करण जौहर ने एक हालिया पॉडकास्ट में कहा कि इस क्षेत्र में स्थायित्व कम है। उनके अनुसार, कलाकार अक्सर असुरक्षा की भावना से घिरे रहते हैं और समय-समय पर बदलाव करते हैं। उनका मानना है कि यह प्रतिस्पर्धी माहौल का हिस्सा है, जहां हर कोई अपने लिए बेहतर विकल्प तलाशता रहता है।

‘थैंकलेस जॉब’ क्यों कहा

करण जौहर ने बातचीत के दौरान टैलेंट मैनेजमेंट को “थैंकलेस जॉब” बताया। उन्होंने कहा कि किसी कलाकार के साथ वर्षों काम करने के बाद भी यह निश्चित नहीं होता कि वह लंबे समय तक उसी एजेंसी के साथ रहेगा।

उनके मुताबिक, कई बार एजेंसियां दो-दो साल तक किसी कलाकार के लिए रणनीति बनाती हैं, प्रोजेक्ट्स तय करती हैं और ब्रांड निर्माण में समय लगाती हैं। लेकिन अचानक कलाकार किसी दूसरी एजेंसी से जुड़ जाते हैं। फिर परिस्थितियां बदलने पर वे वापस भी लौटना चाहते हैं। करण ने इसे एक चक्र की तरह बताया, जो इस पेशे को जटिल बना देता है।

केवल कमीशन मॉडल पर सवाल

करण जौहर का कहना है कि केवल कमीशन के आधार पर यह कारोबार टिकाऊ नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि अब कई एजेंसियां कलाकारों के साथ इक्विटी साझेदारी जैसे विकल्प तलाश रही हैं, ताकि दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित किया जा सके।

उनका मानना है कि इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा केवल प्रोजेक्ट्स या अनुबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की अपेक्षाओं, असुरक्षाओं और व्यक्तित्व को संभालने से जुड़ा है। ऐसे में इसे महज व्यावसायिक अवसर समझना पर्याप्त नहीं होता।

सफलता और असफलता पर नजरिया

तीन दशक से अधिक समय से इंडस्ट्री में सक्रिय करण जौहर ने अपने निजी अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों में उन्होंने सफलता और असफलता दोनों को करीब से देखा है।

उनका मानना है कि यदि खुशी और दुख को केवल पेशेवर परिणामों से जोड़ा जाए, तो संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि करियर में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं और इन्हें सहजता से स्वीकार करना जरूरी है।

एजेंसी के साथ जुड़े कलाकार

करण जौहर की एजेंसी कई युवा कलाकारों का प्रतिनिधित्व करती है। इंडस्ट्री में नए चेहरों को स्थापित करने से लेकर स्थापित सितारों के करियर को दिशा देने तक, एजेंसियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

फिल्म जगत में बदलते समीकरणों के बीच टैलेंट मैनेजमेंट का यह पक्ष दिखाता है कि पर्दे के पीछे भी उतनी ही प्रतिस्पर्धा और रणनीति चलती है, जितनी कैमरे के सामने नजर आती है।

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