India’s Oscar 2026 Nominations: ‘कांतारा’ और ‘तन्वी द ग्रेट’ ने बढ़ाई धड़कनें, क्या इस बार रचेगा इतिहास…
India’s Oscar 2026 Nominations: दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कार ‘ऑस्कर’ की रेस अब एक रोमांचक मोड़ पर पहुंच गई है। भारत की ओर से आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में नीरज घेवान की फिल्म ‘होमबाउंड’ पहले से ही मैदान में मजबूती से डटी हुई है, लेकिन अब दो और भारतीय फिल्मों ने इस दौड़ में शामिल होकर करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। (Academy Awards race) में भारत की यह मजबूत दावेदारी वैश्विक सिनेमा के नक्शे पर हमारी बढ़ती साख का प्रतीक है। हालांकि, मुकाबला कड़ा है, लेकिन भारतीय निर्देशकों के विजन ने हॉलीवुड के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

‘कांतारा चैप्टर 1’ और ‘तन्वी द ग्रेट’ की एंट्री
सिनेमा प्रेमियों के लिए यह किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है कि ऋषभ शेट्टी की ‘कांतारा: चैप्टर 1’ और अनुपम खेर के निर्देशन वाली ‘तन्वी द ग्रेट’ को 201 फीचर फिल्मों की उस विशिष्ट सूची में जगह मिली है, जो 98वें अकादमी पुरस्कारों के लिए विचाराधीन हैं। वैरायटी की रिपोर्ट के अनुसार, (AMPAS eligible films) की इस सूची में शामिल होने का मतलब है कि ये फिल्में अब सीधे तौर पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म पुरस्कार की श्रेणी में प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं। इन फिल्मों की कलात्मकता और मौलिक कहानी ने इन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई है।
कड़े मापदंडों की कसौटी पर खरी उतरी भारतीय फिल्में
ऑस्कर की सर्वश्रेष्ठ फिल्म श्रेणी में शामिल होना कोई आसान काम नहीं है, इसके लिए एकेडमी के बेहद सख्त नियमों का पालन करना पड़ता है। ‘कांतारा’ और ‘तन्वी द ग्रेट’ दोनों ने ही सामान्य एंट्री के अलावा (Inclusion Standards Entry) के कड़े फॉर्म और ‘RAISE’ मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इन फिल्मों ने न केवल अपनी कहानी से दिल जीता, बल्कि अमेरिकी बाजारों में प्रदर्शन और प्रतिनिधित्व की उन तकनीकी शर्तों को भी पूरा किया है, जो किसी भी फिल्म को वैश्विक दावेदार बनाती हैं।
अमेरिकी सिनेमाघरों में सफल प्रदर्शन का जादू
नियमों के अनुसार, किसी भी फिल्म को ऑस्कर की इस श्रेणी में पात्र होने के लिए अमेरिका के शीर्ष 50 बाजारों में से कम से कम 10 में प्रदर्शित होना अनिवार्य है। भारतीय फिल्मों ने (US theatrical release) की इस शर्त को अपनी रिलीज के 45 दिनों के भीतर पूरा कर यह साबित कर दिया कि भारतीय कंटेंट की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही है। 22 जनवरी को आने वाली अंतिम नामांकन सूची से पहले, इन फिल्मों का इस प्रारंभिक दौड़ में शामिल होना ही भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
‘कांतारा चैप्टर 1’ का बॉक्स ऑफिस पर कोहराम
होम्बले फिल्म्स के बैनर तले बनी ‘कांतारा: चैप्टर 1’ ने साल 2025 में बॉक्स ऑफिस के तमाम रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। ऋषभ शेट्टी के लेखन और निर्देशन में बनी इस फिल्म ने (Folklore and culture) को जिस अद्भुत ढंग से पर्दे पर उतारा है, उसने क्रिटिक्स को भी दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। फिल्म की सिनेमेटोग्राफी और ऋषभ के अभिनय ने इसे केवल एक क्षेत्रीय फिल्म न रखकर एक वैश्विक मास्टरपीस बना दिया है, जिससे ऑस्कर की उम्मीदें अब और भी ज्यादा गहरा गई हैं।
‘तन्वी द ग्रेट’ और ऑटिज्म की मार्मिक दास्तां
दूसरी ओर, दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने ‘तन्वी द ग्रेट’ के जरिए एक ऐसी संवेदनशील कहानी पेश की है जो सीधे दिल को छूती है। यह फिल्म (Autism awareness story) पर आधारित है, जिसमें एक ऑटिस्टिक लड़की के जीवन के संघर्ष और उसकी खूबसूरती को दिखाया गया है। अरविंद स्वामी, बोमन ईरानी और जैकी श्रॉफ जैसे मंझे हुए कलाकारों से सजी यह फिल्म अपनी मानवीय संवेदनाओं के कारण ऑस्कर जूरी को प्रभावित करने की पूरी क्षमता रखती है। अनुपम खेर का निर्देशन इस फिल्म को एक अलग ऊंचाई पर ले गया है।
अंतिम नामांकन की घड़ी और करोड़ों की दुआएं
जैसे-जैसे 22 जनवरी की तारीख नजदीक आ रही है, भारतीय फिल्म उद्योग में उत्साह और तनाव दोनों बढ़ रहे हैं। यदि (Final nomination list) में ‘होमबाउंड’ के साथ-साथ इन दोनों फिल्मों में से किसी को भी जगह मिलती है, तो यह भारतीय सिनेमा के लिए एक स्वर्णिम युग की शुरुआत होगी। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि जिस तरह का ‘बज’ इन फिल्मों ने वैश्विक स्तर पर बनाया है, उसे देखते हुए भारत इस बार खाली हाथ नहीं लौटेगा। अब सबकी नजरें एकेडमी के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
भारतीय कहानियों का वैश्विक फिल्म बाजार में दबदबा
‘आरआरआर’ की सफलता के बाद से ही भारतीय फिल्मों को देखने का नजरिया बदला है, और अब ‘कांतारा’ जैसे प्रोजेक्ट्स उस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। (Global cinema trends) में अब भारतीय ग्रामीण परिवेश और भावनात्मक कहानियों को प्रमुखता दी जा रही है। अनुपम खेर और ऋषभ शेट्टी जैसे फिल्मकारों ने यह साबित कर दिया है कि अगर कहानी में दम हो और पेश करने का तरीका अंतरराष्ट्रीय मानकों का हो, तो ऑस्कर का रास्ता ज्यादा दूर नहीं है।



