CinemaHistory – पांच साल में बनी मल्टीस्टारर फिल्म, शुरुआत शानदार फिर रही फीकी
CinemaHistory – 1980 के दशक में बनी कुछ फिल्मों की चर्चा आज भी उनके भव्य पैमाने और अनोखी कहानी के कारण होती है। ऐसी ही एक फिल्म थी, जिसने रिलीज के समय जबरदस्त शुरुआत की, लेकिन धीरे-धीरे दर्शकों की दिलचस्पी कम होती गई। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म को बनने में पूरे पांच साल का समय लगा और इसमें उस दौर के कई बड़े सितारे एक साथ नजर आए थे। शुरुआती दिनों में सिनेमाघरों में सीटें पूरी तरह भरी रहीं, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी।

लंबे इंतजार के बाद पर्दे पर आई फिल्म
इस फिल्म का नाम ‘द बर्निंग ट्रेन’ है, जिसे लेकर काफी पहले से ही चर्चा शुरू हो गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की घोषणा अगस्त 1976 में हुई थी, लेकिन इसे दर्शकों तक पहुंचने में मार्च 1980 तक का समय लग गया। यानी लगभग पांच साल की लंबी प्रक्रिया के बाद यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हो सकी। उस समय इतने लंबे समय तक किसी फिल्म का निर्माण चलना अपने आप में बड़ी बात मानी जाती थी।
विदेशी फिल्मों से प्रभावित थी कहानी
‘द बर्निंग ट्रेन’ को आज भले ही एक क्लासिक फिल्म के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसकी कहानी पूरी तरह मौलिक नहीं थी। फिल्म की कहानी कई अंतरराष्ट्रीय फिल्मों से प्रेरित मानी जाती है। इनमें जापान की ‘द बुलेट ट्रेन’ (1975) और हॉलीवुड की ‘द टॉवरिंग इन्फर्नो’ (1974) तथा ‘क्रॉसिंग कसैंडरा’ (1976) शामिल हैं। इन फिल्मों के विभिन्न तत्वों को मिलाकर एक नई कहानी तैयार की गई, जिसमें आपदा, रोमांच और मानवीय भावनाओं का मिश्रण देखने को मिलता है।
‘द बुलेट ट्रेन’ से लिया गया मुख्य विचार
जापानी फिल्म ‘द बुलेट ट्रेन’ की कहानी एक खतरनाक साजिश के इर्द-गिर्द घूमती है। इसमें अपराधियों का एक समूह ट्रेन में बम लगा देता है और सरकार से भारी रकम की मांग करता है। वे चेतावनी देते हैं कि अगर ट्रेन की गति एक निश्चित सीमा से नीचे गई, तो विस्फोट हो जाएगा। इस तरह की हाई-टेंशन स्थिति ने दर्शकों को बांधे रखने का काम किया, और यही विचार ‘द बर्निंग ट्रेन’ में भी किसी न किसी रूप में दिखाई देता है।
आपदा और मानवीय संघर्ष की झलक
फिल्म के निर्देशक रवि चोपड़ा, जो मशहूर फिल्मकार बीआर चोपड़ा के पुत्र हैं, एक ऐसी कहानी बनाना चाहते थे जिसमें आपदा के समय इंसानों की प्रतिक्रियाओं को गहराई से दिखाया जा सके। ‘द टॉवरिंग इन्फर्नो’ से प्रेरित होकर उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि संकट के समय लोग किस तरह व्यवहार करते हैं—कोई घबराता है, कोई साहस दिखाता है, तो कोई दूसरों की मदद के लिए आगे आता है।
‘क्रॉसिंग कसैंडरा’ से जुड़ा सस्पेंस तत्व
एक अन्य फिल्म ‘क्रॉसिंग कसैंडरा’ में यात्रियों को एक ऐसी ट्रेन में फंसा दिखाया गया है, जहां खतरनाक वायरस फैल जाता है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए ट्रेन को बिना रुके चलाने का निर्णय लिया जाता है। इस तरह की बंद वातावरण में बढ़ते खतरे और तनाव का असर ‘द बर्निंग ट्रेन’ की कहानी में भी महसूस किया जा सकता है, जहां हर पल खतरे का एहसास बना रहता है।
दमदार स्टारकास्ट और तकनीकी पक्ष
इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी मल्टीस्टारर कास्ट रही। इसमें धर्मेंद्र, विनोद खन्ना, जीतेंद्र, विनोद मेहरा, हेमा मालिनी, परवीन बाबी, नीतू सिंह, डैनी डेन्जोंगपा और सिमी गरेवाल जैसे कई बड़े नाम शामिल थे। इसके अलावा रंजीत, नासिर हुसैन और सत्येंद्र कपूर जैसे कलाकारों ने भी अहम भूमिकाएं निभाईं। इतने बड़े कलाकारों को एक साथ पर्दे पर देखना उस दौर के दर्शकों के लिए खास अनुभव था।
रेटिंग और आज की उपलब्धता
फिल्म को समय के साथ एक अलग पहचान मिली और आज इसे क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है। आईएमडीबी पर इसे लगभग 7 की रेटिंग मिली है, जो दर्शकों के बीच इसकी स्वीकार्यता को दर्शाती है। हालांकि रिलीज के समय यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पाई, लेकिन बाद में इसकी कहानी और प्रस्तुति की सराहना होने लगी। आज के समय में यह फिल्म डिजिटल प्लेटफॉर्म जियो हॉटस्टार पर उपलब्ध है, जहां नई पीढ़ी भी इसे देख सकती है।



