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मनोरंजन

Bollywood – तृप्ति डिमरी ने ‘ओ रोमियो’ और शाहिद कपूर पर खुलकर की बात…

Bollywood – पिछले कुछ वर्षों में अपनी दमदार स्क्रीन उपस्थिति से दर्शकों के बीच खास पहचान बना चुकीं अभिनेत्री तृप्ति डिमरी इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘ओ रोमियो’ को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म में वह शाहिद कपूर के साथ मुख्य भूमिका में नजर आने वाली हैं और अफशा नाम की एक संवेदनशील, जटिल और बहुस्तरीय लड़की का किरदार निभा रही हैं। हाल ही में तृप्ति ने अमर उजाला से विस्तृत बातचीत में फिल्म से जुड़ी अपनी तैयारी, सह-कलाकारों के साथ अनुभव और करियर को लेकर अपनी सोच साझा की। बातचीत के दौरान उनकी स्पष्टता और ईमानदारी साफ झलक रही थी, जिससे यह समझ आता है कि वह सिर्फ लोकप्रियता नहीं, बल्कि अपने काम की गहराई को महत्व देती हैं।

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चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं गढ़ती हैं पहचान

तृप्ति के मुताबिक, जब उन्हें यह फिल्म ऑफर हुई तो वह बेहद उत्साहित थीं, क्योंकि यह किरदार उनके लिए आसान नहीं था। वह मानती हैं कि कठिन भूमिकाएं ही किसी कलाकार को नया आयाम देती हैं और उसकी अभिनय क्षमता को निखारती हैं। उन्होंने बताया कि विशाल भारद्वाज जैसे प्रतिष्ठित निर्देशक के साथ काम करने का अवसर मिलना अपने आप में बड़ा अनुभव था, इसलिए इस फिल्म को ठुकराने का सवाल ही नहीं था। नाना पाटेकर और फरीदा जलाल जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा करना उनके लिए सपने जैसा रहा। तृप्ति का कहना है कि इस परियोजना ने उन्हें एक कलाकार के रूप में अधिक परिपक्व और आत्मविश्वासी बनाया।

वर्कशॉप से गढ़ा गया अफशा का संसार

फिल्म की तैयारी पर बात करते हुए तृप्ति ने बताया कि उन्होंने अपने किरदार के लिए कई दौर की वर्कशॉप में हिस्सा लिया। इन सत्रों में सिर्फ संवादों पर नहीं, बल्कि अफशा की मानसिकता, उसकी भावनाओं और उसकी पृष्ठभूमि पर गहराई से चर्चा की गई। निर्देशक विशाल भारद्वाज भी इन वर्कशॉप्स में सक्रिय रूप से शामिल होते थे और कलाकारों को किरदार की बारीकियों को समझने में मदद करते थे। तृप्ति का मानना है कि जब किसी किरदार की आंतरिक दुनिया स्पष्ट होती है, तो उसे पर्दे पर जीवंत करना ज्यादा सहज हो जाता है। उनके अनुसार, यही तैयारी फिल्म के भावनात्मक प्रभाव को मजबूत बनाती है।

शाहिद कपूर के साथ सहज तालमेल

शाहिद कपूर के साथ काम करने के अनुभव को तृप्ति ने बेहद सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि शाहिद न केवल प्रतिभाशाली अभिनेता हैं, बल्कि सेट पर बहुत सहयोगी भी हैं। पहले दिन एक भावनात्मक दृश्य की शूटिंग के दौरान वह काफी नर्वस थीं और ज्यादा बातचीत नहीं कर पाईं, लेकिन शाहिद ने बिना कुछ कहे उनकी स्थिति समझ ली। तृप्ति के मुताबिक, शाहिद का यह संवेदनशील व्यवहार उन्हें सहज महसूस कराने में मददगार रहा। कई मौकों पर जब वह दबाव महसूस करती थीं, शाहिद माहौल को हल्का कर देते थे। उन्होंने यह भी साझा किया कि वह बचपन से शाहिद की फिल्मों की प्रशंसक रही हैं, इसलिए उनके साथ काम करना उनके लिए एक खास पल जैसा था।

रिलीज के दिन की बेचैनी

फिल्म रिलीज के दिन की मानसिक स्थिति पर बात करते हुए तृप्ति ने स्वीकार किया कि वह उस दिन बेहद बेचैन रहती हैं। चाहे जितनी भी तैयारी हो, अंदर से घबराहट बनी रहती है। ऐसे समय में वह अपने करीबी दोस्तों के साथ रहना पसंद करती हैं, क्योंकि वे उन्हें ईमानदार प्रतिक्रिया देते हैं। उनके अनुसार, सच्ची राय ही उन्हें जमीन से जुड़े रहने में मदद करती है।

बॉक्स ऑफिस से ज्यादा यादें मायने रखती हैं

बॉक्स ऑफिस नंबर्स को लेकर तृप्ति की सोच काफी संतुलित है। उन्होंने कहा कि हर फिल्म की अपनी यात्रा होती है और उसका परिणाम ही उसकी गुणवत्ता तय नहीं करता। उनके लिए सेट पर मिले अनुभव, सीखे गए सबक और सह-कलाकारों के साथ बिताए पल ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। उनका मानना है कि सालों बाद पीछे मुड़कर देखने पर बॉक्स ऑफिस आंकड़े नहीं, बल्कि काम से जुड़ी यादें ही रह जाती हैं।

ट्रोलिंग पर साफगोई

ऑनलाइन ट्रोलिंग के सवाल पर तृप्ति ने खुलकर कहा कि वह भले ही कई चीजों को नजरअंदाज करती हों, लेकिन आखिरकार वह भी इंसान हैं और उन्हें भी बुरा लगता है। खासकर व्यक्तिगत टिप्पणियां उन्हें ज्यादा आहत करती हैं। हालांकि, वह यह भी मानती हैं कि काम की आलोचना से उन्हें परेशानी नहीं होती, बल्कि वह उसे सीखने का अवसर मानती हैं।

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