Assamese Singer Samar Hazarika Death: असमिया संगीत के सुनहरे दौर का हुआ अंत, भूपेन हजारिका के भाई समर हजारिका ने ली अंतिम सांस
Assamese Singer Samar Hazarika Death: असमिया संस्कृति और संगीत जगत के लिए आज का दिन बेहद दुखद खबर लेकर आया है। दिग्गज गायक भारत रत्न भूपेन हजारिका के छोटे भाई और स्वयं एक प्रतिष्ठित संगीतकार (Samar Hazarika Passes Away) के निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे हजारिका ने हाल ही में अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अपने निजारापार स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। उनके जाने से असम ने अपनी एक ऐसी आवाज खो दी है, जो दशकों तक लोगों के दिलों को सुकून देती रही।

पहाड़ी की चोटी पर खामोश हुई सुरीली आवाज
गुवाहाटी के निजारापार इलाके में हजारिका परिवार का एक खास जुड़ाव रहा है, जहां एक पहाड़ी की चोटी पर परिवार के सदस्य अलग-अलग घरों में रहते थे। इसी ऐतिहासिक परिसर के अपने घर में (Assamese Cultural Heritage) को समृद्ध करने वाले इस महान कलाकार का देहांत हुआ। परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, समर हजारिका कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे, लेकिन संगीत के प्रति उनका जुनून अंतिम समय तक कम नहीं हुआ था।
बड़े भाई की विरासत को दी नई ऊंचाइयां
समर हजारिका केवल भूपेन हजारिका के भाई के रूप में नहीं, बल्कि अपनी खुद की एक अलग पहचान के लिए जाने जाते थे। उन्होंने ताउम्र (Legacy of Bhupen Hazarika) को न केवल सहेज कर रखा, बल्कि उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी काम किया। उन्होंने अपने संगीत के माध्यम से मानवता, प्रेम और भाईचारे का जो संदेश दिया, वह उन्हें अपने बड़े भाई की विचारधारा के बेहद करीब खड़ा करता था।
रेडियो और फिल्मों में छोड़ा अमिट प्रभाव
अपने शानदार करियर के दौरान समर हजारिका ने केवल मंचों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो, निजी एल्बमों और कई सफल (Assamese Film Music) के लिए अपनी धुनें तैयार कीं। एक पार्श्व गायक के रूप में उनकी आवाज में जो गहराई और मिट्टी की खुशबू थी, उसने उन्हें असमिया लोक और सुगम संगीत का एक अनिवार्य हिस्सा बना दिया था। उनकी रचनाओं में असम की माटी का दर्द और उसकी संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती थी।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने इस अपूरणीय क्षति पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी संवेदनाएं साझा करते हुए कहा कि हजारिका की मधुर आवाज हर विशेष अवसर को रोशन कर देती थी। मुख्यमंत्री ने (Assamese Musical Landscape) में उनके योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी समारोहों की तैयारी में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनका जाना असम के लिए एक सांस्कृतिक शून्य पैदा कर गया है।
केंद्रीय मंत्री सरबानंदा सोनोवाल ने जताया शोक
केंद्रीय मंत्री सरबानंदा सोनोवाल ने भी समर हजारिका के निधन को राज्य के लिए एक बड़ी क्षति बताया। उन्होंने विशेष रूप से इस बात का जिक्र किया कि (Magh Bihu Festival) के पावन अवसर पर ऐसी दुखद खबर का आना बेहद हृदयविदारक है। सोनोवाल ने कहा कि हजारिका ने अपनी मधुर गायकी से न केवल लोगों का मनोरंजन किया, बल्कि असमिया संगीत को एक नई गरिमा भी प्रदान की, जिसे आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी।
परिवार और प्रशंसकों के बीच शोक का माहौल
समर हजारिका अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिसमें उनकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी शामिल हैं। उनके निधन की खबर मिलते ही (Music Community in Assam) के तमाम कलाकार और प्रशंसक उनके आवास पर जमा होने लगे। हर कोई उस सादगी भरे इंसान और बेहतरीन फनकार को याद कर रहा था, जिसने अपनी पूरी जिंदगी कला की सेवा में समर्पित कर दी थी।
असमिया संगीत में सदा अमर रहेगा नाम
कलाकारों की मृत्यु शरीर से होती है, लेकिन उनकी कला उन्हें हमेशा जीवित रखती है। समर हजारिका के गाए गीत और उनकी तैयार की गई धुनें (Legendary Music Composer) की सूची में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराती हैं। उन्होंने लोक संगीत की जड़ों को पकड़े रखते हुए आधुनिक संगीत के साथ जो प्रयोग किए, वह असमिया संगीत के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होंगे।
बिहू के पर्व पर छाई गम की घटा
असम में माघ बिहू का उत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा था, लेकिन इस महान संगीतकार के बिछड़ने की खबर ने त्योहार की चमक को धुंधला कर दिया। लोग उनके (Devotional and Folk Songs) को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। पूरे राज्य में सांस्कृतिक संगठनों ने उनके सम्मान में शोक सभाएं आयोजित करने का निर्णय लिया है, ताकि उनकी महान विरासत को उचित सम्मान दिया जा सके।
मानवता और बंधुत्व के गीतों का सफर खत्म
समर हजारिका का मानना था कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का एक माध्यम है। उन्होंने अपने गीतों में हमेशा (Humanity and Brotherhood) को प्राथमिकता दी, जो आज के समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है। भले ही आज वे शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन ब्रह्मपुत्र की लहरों और असम की वादियों में उनकी सुरीली आवाज हमेशा गूंजती रहेगी।



