AnubhavSinha – ‘अस्सी’ के जरिए संवेदनशील मुद्दे पर नई बहस
AnubhavSinha – निर्देशक अनुभव सिन्हा की फिल्म ‘अस्सी’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। घोषणा के समय फिल्म के शीर्षक को लेकर कई तरह के कयास लगाए गए थे। कई लोगों को लगा था कि यह कहानी वाराणसी के प्रसिद्ध अस्सी घाट के इर्द-गिर्द घूमेगी, लेकिन बाद में साफ हो गया कि फिल्म का विषय कहीं अधिक गंभीर और समकालीन है। यह कहानी देश में बढ़ती दुष्कर्म की घटनाओं की पृष्ठभूमि पर आधारित है और समाज की संवेदनहीन होती प्रतिक्रिया पर सवाल उठाती है।

अपराध की खबरों से उपजा विचार
अनुभव सिन्हा ने बातचीत में बताया कि फिल्म का मूल विचार अखबारों की सुर्खियों से आया। उनके मुताबिक, आज सूचना का प्रवाह इतना तेज हो गया है कि किसी भी अपराध की गंभीरता दर्शकों तक वैसी नहीं पहुंच पाती, जैसी पहुंचनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराध भी खबरों की भीड़ में दब जाते हैं। लोगों का ध्यान अब उस बात पर ज्यादा जाता है जो आकर्षक या सनसनीखेज लगे। गंभीर मुद्दे अक्सर चर्चा से बाहर हो जाते हैं। उनके अनुसार, यही प्रवृत्ति उन्हें इस विषय पर फिल्म बनाने के लिए प्रेरित करती रही।
बॉक्स ऑफिस आंकड़ों पर निर्देशक की राय
फिल्मों की सफलता को लेकर होने वाली चर्चाओं पर भी अनुभव ने खुलकर अपनी बात रखी। उनका कहना है कि बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और स्टार रेटिंग की चर्चा अक्सर असली मुद्दे को पीछे छोड़ देती है।
उन्होंने कहा कि करोड़ों के आंकड़े सुनने में भले प्रभावशाली लगें, लेकिन आम दर्शक को यह समझ नहीं आता कि इन संख्याओं का वास्तविक अर्थ क्या है। निर्माता तक पहुंचने वाली राशि और घोषित कलेक्शन में बड़ा अंतर होता है। अनुभव के मुताबिक, अगर उनके हाथ में होता तो वे अपनी फिल्मों के आंकड़े सार्वजनिक ही नहीं करते। हालांकि, मौजूदा व्यवस्था में यह संभव नहीं है।
छोटे शहरों तक पहुंचने की कोशिश
फिल्म को लेकर यह धारणा भी रही है कि इस तरह के विषय केवल सीमित दर्शक वर्ग को आकर्षित करते हैं। इस सोच को तोड़ने के लिए अनुभव सिन्हा ने ‘चल सिनेमा चलें’ अभियान के तहत देश के कई दूसरे दर्जे के शहरों का दौरा किया।
उनका मानना है कि छोटे शहरों के दर्शक केवल व्यावसायिक फिल्मों तक सीमित नहीं हैं। वे सामाजिक विषयों पर बनी फिल्मों में भी रुचि रखते हैं, बशर्ते उन्हें सही तरीके से प्रस्तुत किया जाए। पिछले दो महीनों से टीम ने जमीनी स्तर पर प्रचार किया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक फिल्म की बात पहुंच सके।
‘अस्सी’ को लेकर उम्मीदें
अनुभव का कहना है कि उनके अब तक के काम में ‘अस्सी’ सबसे ज्यादा नाटकीय और गति से भरपूर फिल्म है। इसमें कई ऐसे मोड़ हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। खासतौर पर अदालत से जुड़े दृश्य कहानी का अहम हिस्सा हैं।
उनके मुताबिक, कोर्टरूम ड्रामा दर्शकों को सीधे बहस का हिस्सा बना देता है। लोग न्यायाधीश के फैसले का इंतजार करते हुए खुद भी तर्क-वितर्क में शामिल हो जाते हैं। यही कारण है कि फिल्म के इन दृश्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
असली अदालत का अनुभव
कोर्टरूम दृश्यों को प्रामाणिक बनाने के लिए अनुभव ने वास्तविक अदालतों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की सुसंगठित व्यवस्था देखने के बाद उन्हें लगा कि निचली अदालतों का माहौल अलग हो सकता है।
इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट का दौरा किया। वहां की भीड़, हलचल और व्यस्तता ने उन्हें हैरान किया। इस अनुभव ने उन्हें अपनी पिछली फिल्म ‘मुल्क’ के कोर्टरूम दृश्यों पर भी दोबारा सोचने को मजबूर किया।
उनका कहना है कि अदालत का वातावरण भले सामान्य लगे, लेकिन वहां लिए जाने वाले फैसले किसी के पूरे जीवन को प्रभावित करते हैं। यही द्वंद्व ‘अस्सी’ की कहानी में भी झलकता है।



