WEF Youth Pulse 2026 Insights: अब केवल विरोध नहीं, दुनिया चलाने की तैयारी में है आज का युवा…
WEF Youth Pulse 2026 Insights: विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक से ठीक पहले जारी ‘यूथ पल्स 2026’ रिपोर्ट ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाली इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग से पहले 144 देशों के युवाओं की राय ने स्पष्ट कर दिया है कि (global economic transition) के इस दौर में अगली पीढ़ी की प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल चुकी हैं। युवा अब केवल दर्शक बनकर नहीं रहना चाहते, बल्कि वे वैश्विक चुनौतियों के समाधान का हिस्सा बनने के लिए बेताब हैं।

अमीरी और गरीबी के बीच बढ़ती खाई ने उड़ाई नींद
इस सर्वेक्षण का सबसे गंभीर पहलू आर्थिक असमानता को लेकर बढ़ती चिंता है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 48.2 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि ‘अमीर और गरीब के बीच बढ़ती खाई’ भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा है। आज का युवा (wealth inequality trends) को लेकर न केवल जागरूक है, बल्कि वह इसके सामाजिक परिणामों से डरा हुआ भी है। वित्तीय अनिश्चितता का आलम यह है कि आधे से अधिक उत्तरदाताओं ने पैसे की चिंता को अपने मानसिक तनाव का मुख्य कारण बताया है।
राजनीति में युवाओं की एंट्री: अब खुद संभालेंगे कमान
राजनीतिक उदासीनता के पुराने दावों को धता बताते हुए इस रिपोर्ट ने एक क्रांतिकारी सच उजागर किया है। अब युवा केवल आलोचना करने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि उनमें से 36 प्रतिशत ने सक्रिय राजनीति में कदम रखने और (political leadership ambitions) के साथ चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। यह बदलाव दर्शाता है कि नई पीढ़ी शासन व्यवस्था में मूलभूत सुधार करने के लिए सत्ता के गलियारों तक पहुंचने का मन बना चुकी है।
दक्षिण एशिया में स्टार्टअप और उद्यमशीलता का जुनून
वैश्विक चिंताओं के बीच क्षेत्रीय स्तर पर एक सकारात्मक लहर भी देखने को मिली है। दक्षिण एशिया और उप-सहारा अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में युवा नौकरी मांगने के बजाय नौकरी देने की सोच रहे हैं। इन क्षेत्रों में (entrepreneurship in South Asia) सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनकर उभरी है। नवाचार और आत्म-निर्भरता के प्रति यह बढ़ता रुझान बताता है कि आने वाले समय में विकासशील देश वैश्विक अर्थव्यवस्था के नए इंजन साबित होंगे।
रोजगार और शिक्षा: युवाओं की नीतिगत मांगें
नीति निर्माताओं के लिए यह रिपोर्ट एक स्पष्ट गाइडबुक की तरह है, जिसमें युवाओं ने अपनी जरूरतों को साफ तौर पर रखा है। लगभग 57.2 प्रतिशत युवाओं ने रोजगार के अवसरों को अपनी पहली प्राथमिकता बताया है। इसके साथ ही (access to quality education) और किफायती आवास की मांग भी जोर पकड़ रही है। युवा चाहते हैं कि सरकारें ऐसी नीतियां बनाएं जो केवल कागजों तक सीमित न हों, बल्कि उनके जीवन में वास्तविक वित्तीय स्वतंत्रता लेकर आएं।
जलवायु परिवर्तन बनाम महंगाई: व्यक्तिगत और वैश्विक द्वंद्व
सर्वेक्षण में एक दिलचस्प विरोधाभास भी सामने आया है। जहां वैश्विक स्तर पर 56 प्रतिशत युवा जलवायु परिवर्तन को दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते हैं, वहीं व्यक्तिगत स्तर पर उनकी सबसे बड़ी चिंता बदल जाती है। अपने निजी जीवन में 51 प्रतिशत युवा (inflation and cost of living) से सबसे ज्यादा परेशान हैं। यह डेटा बताता है कि पर्यावरण की रक्षा जरूरी है, लेकिन पेट भरने और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की जद्दोजहद आज भी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: डर के साथ दोस्ती की कोशिश
तकनीकी मोर्चे पर युवाओं के मन में एआई को लेकर मिली-जुली भावनाएं हैं। दो-तिहाई युवाओं को डर है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से एंट्री-लेवल की नौकरियां खत्म हो जाएंगी। हालांकि, यह पीढ़ी तकनीक से भाग नहीं रही है, बल्कि 60 प्रतिशत युवा (AI skills adaptation) के जरिए खुद को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं। वे डिजिटल बदलाव के साथ खुद को ढालने के लिए नियमित रूप से नए कौशल सीख रहे हैं।
दावोस बैठक और नीति निर्माताओं के लिए संदेश
19 से 23 जनवरी तक स्विट्जरलैंड में होने वाली डब्ल्यूईएफ की बैठक में इन नतीजों पर गहन चर्चा होगी। यह रिपोर्ट वैश्विक नेताओं को चेतावनी देती है कि वे केवल आर्थिक विकास के आंकड़ों पर खुश न हों, बल्कि (inclusive economic growth) पर ध्यान दें। युवा अब जवाबदेह और स्थानीय नेतृत्व की मांग कर रहे हैं जो उनकी समस्याओं को समझ सके और उन्हें समाधान का हिस्सा बना सके। दुनिया अब एक ऐसे मोड़ पर है जहां युवाओं की भागीदारी के बिना कोई भी बदलाव संभव नहीं है।



